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مهلاً
لتمتحــنَ
الطريــقَ
خطاكـا
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إن
كلفـــوك
لغايــة
إدراكــا
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يـا
صـاحب
الجـاه
العريض
تحية
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لــو
هــز
عطفَــك
شـاعرٌ
حيـاك
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أهلاً
بصــارمك
الطويـل
ومرحبـاً
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إن
لـم
تضـعه
فـي
مكـان
نداكا
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فـي
مصـر
شـعب
لا
يضـام
ومالـكٌ
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متفـــرد
لا
يقبـــل
الإشــراكا
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تلقـاك
صـافية
السـماء
وديعـة
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مــا
للـبريء
الحـر
أن
يخشـاك
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مـا
أنـت
حابس
نيلها
يوماً
ولا
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أهرامهـــا
مهدومــة
بقواكــا
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اللّـه
أكـبر
مـن
جيوشـك
سـطوة
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والـدهر
أبعـد
مـن
مدى
مرماكا
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ولأنــت
أعلــى
همــة
وشـمائلاً
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مــن
أن
تَمُــدَّ
لآمنيــن
شـباكا
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وأبـر
مـن
أن
تلتـوي
حقداً
على
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أســرى
هنــا
يتلمسـون
فكاكـا
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هل
يذنب
الجرحى
إذا
هم
حاولوا
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دون
الضــواري
صــيحة
وحراكـا
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هـل
كـان
للألمـان
فيهـم
مـأرب
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يومـاً
إذا
مـا
جاملوا
الأتراكا
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مـا
كـان
بغيـاً
حبهـم
ولو
اَنَّه
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أعيــا
وأشــقى
اللائم
الأفاكـا
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لسـنا
قطيعـاً
غـاب
راعيـه
كما
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كنــا
ولسـت
الضـيغم
الفتاكـا
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يـأبى
عليـك
وقـد
بلوت
نفوسنا
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ماضـي
احتراسـك
أن
نكون
عداكا
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ضـمنت
تجاربـك
الـتي
أحسـنتها
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فـي
مصـر
أن
تعصي
الذي
أغراكا
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إن
كنـت
طلـق
الوجه
أو
متجهماً
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فــاللّه
يعلـم
منتهـى
نجواكـا
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ولعـل
شـأنك
فـي
مشيبك
غير
ما
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أســلفته
فــي
عنفـوان
صـباكا
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فليهــدأ
المتطيّـرون
هنـا
وإن
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قصـفت
رعـود
المرجفيـن
هناكـا
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ضـجّوا
وعـادوا
ينصـتون
وربمـا
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سـبقت
يمينـك
بالعظـائم
فاكـا
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لك
ما
تشاء
من
البلاد
سوى
الذي
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لا
يــدَّعي
فيهــا
الــذي
ولاكـا
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وإذا
عنيــت
بكــل
مقضـيٍّ
فمـن
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أولـى
بإنجـاز
الوعـود
سـواكا
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ميثـاق
دولتـك
الكبيرة
خير
ما
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ترعـاه
لـو
عـدل
الذي
استرعاك
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يـا
فاتح
الخرطوم
بالجند
الذي
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أمســى
فــدى
أسـلابها
وفـداكا
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أذكــر
صـنائعه
الـتي
دبَّرتهـا
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حــتى
بلغـت
بهـا
رفيـع
علاكـا
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ومحامـل
الأبطـال
بعـد
قتـالهم
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إنــا
لأقربهــم
إلــى
رحماكـا
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إن
الطهـور
بنـانه
أولـى
بمـا
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نــوَّلت
ذاك
الأغلــب
الســفّاكا
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فـأقم
بمصـر
مقـام
ضـيف
محسـن
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وعليهــمُ
أن
يكرمــوا
مثواكـا
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واذكـر
لوادي
النيل
نعمته
عسى
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تعطـي
بنيـه
بعـض
مـا
أعطاكـا
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فـإذا
تجـاوزت
الكنانة
فافتتح
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مـا
شـاء
عزمـك
واصـعد
الأفلاكا
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فــي
غيـر
مصـر
ذرائع
ومواقـع
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للمســتزيد
مطامعــاً
وعراكــا
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ولئن
غضـبت
علـى
الأباة
فصبرهم
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أولـى
وأجمـل
مـن
رجـاء
رضاكا
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فـاعرف
لهم
عذر
الحريص
إذا
همُ
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لـم
يسـلموا
لك
ما
تنال
يداكا
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