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ملــك
كمــا
ترضـى
وعـدلٌ
قـائمُ
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منـك
النـدى
ولـك
الولاء
الدائمُ
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ولأهلــك
النجـوى
وأنـت
نزيلهـم
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ولمصـر
مـا
حمـل
البشير
القادم
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يـا
تـالي
السـلطان
إذ
جمعتْكما
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فــي
اللّـه
أعيـادٌ
لـه
ومواسـم
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إن
الـذي
يبغـي
عليـك
وأنـت
في
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هـذي
المكانـة
لهـو
بـاغٍ
غـارم
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أولـى
بمـن
عـرض
الجيـوش
مدرباً
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أن
يُفتـدَى
وهـو
المصـلي
الصائم
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أحييـتَ
فـي
رمضـان
بيـن
ربوعِهم
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للّــه
مــا
أحيَــت
بمكـة
هاشـم
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وولائم
لحمـــاة
مصـــر
كأنمــا
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أنباؤهـــا
لعفــاة
مصــر
ولائم
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ومظـاهر
الـدين
الفضائل
والهدى
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ومظــاهر
الـدنيا
نـدى
ومكـارم
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وتركـت
فـي
شـوارهم
الأثـر
الذي
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أثنـى
عليـه
المستشـير
الحـازم
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أولـى
لـك
الحصـن
الـذي
أمددته
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وإن
اشــتهتك
مــدائن
وعواصــم
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لـك
فيـه
جنـد
إن
تشـأ
فضـراغم
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ملــء
البلاد
وإن
تشــأ
فقشـاعم
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قـالوا
عليـل
قلـت
مجهـوداً
بما
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لا
تســـتطيع
أعـــارب
وأعــاجم
|
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إن
الــذي
حــاط
البلاد
أحـق
أن
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يبقـى
لهـا
وهـو
الصحيح
السالم
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فاسـلك
سـبيلك
في
العيون
قريرة
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واسـكن
قلوبـاً
عُـدْتَ
وهـي
حوائم
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تبعــت
قطـارك
وهـو
قصـر
سـائر
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بعـد
السـفينة
وهـي
طـود
عـائم
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حسـب
الـورى
شـرحاً
لما
جربت
أن
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تلقــى
وفــودَهُمُ
وثغــرك
باسـم
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وكلــت
بالأحكــام
أكــرم
حـوله
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متعــاونون
علـى
الصـلاح
أكـارم
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وزراء
مصــر
ومعلنــو
برهانهـا
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إن
زاغ
جبـــارٌ
وكــابر
نــاقم
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سـاروا
الهوينا
راشدين
فأدركوا
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مـا
ليـس
يـدركه
الهلوع
الهائم
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فـإذا
هُـمُ
رَضـِيَ
الضعيفُ
المشتكي
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عنهـم
فقـد
غضـب
القـوي
الهاجم
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يا
ابن
الذين
بنوا
لمصر
كيانها
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والشـرق
فوضـى
والعبـاد
سـوائم
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أفضـوا
إليـك
بـأمر
مصـر
وإنـه
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بــك
مسـتعاد
مجـدها
المتقـادم
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توصــيك
بالميعـاد
وهـو
فريضـة
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ذكــرى
مخلــدة
لهــم
ومعــالم
|
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والقـوم
أضـياف
وفوا
أو
أخلفوا
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وكرامـــة
الأضـــياف
حـــقٌّ
لازم
|
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إن
شـئت
فهـي
لهـم
مجـال
واسـع
|
أو
شـئت
فهـي
المـأزق
المتلاحـم
|
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فليُســلموا
حكــم
البلاد
لأهلهـا
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ولهــم
مشــارب
جمــة
ومطــاعم
|
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وإذا
هـمُ
خـافوا
علينـا
داهمـاً
|
فبــأي
بنيــان
يــرد
الــداهم
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أبقـــادةٍ
هــذا
لهــذا
خــاذلٌ
|
وبـــأخوة
هــذا
لهــذا
هــازم
|
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ومطـــالب
تجتـــاحهن
مطـــالب
|
وعـــزائم
تغتـــالهن
عـــزائم
|
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فليصـنعوا
المعـروف
يـذكره
لهم
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بعــد
الجلاء
المعشـر
المتشـائم
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وليتركونـا
نَبـنِ
في
القطرين
ما
|
شـئنا
وليـس
لمـا
بنينـا
هـادم
|
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قــد
يفعـل
الحـرُّ
الأبـي
لنفسـه
|
مـا
ليـس
يفعلـه
الأجيـر
الخادم
|
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ومـن
الصـواب
وقـد
ملكت
نجاتنا
|
أن
ترقبنَّهـــمُ
وأنـــت
مســالم
|
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إن
الأســاليب
الــتي
أحســنتها
|
لَمــــدارجٌ
ميمونـــة
وســـلالم
|
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للّـــه
رأيــك
نــائلاً
ومنــوِّلاً
|
مــا
لا
تحــاوله
قنــا
وصـوارم
|
|
ذا
بعــض
عـدتك
الـتي
أعـددتها
|
للــدهر
وهــو
مــروَّع
متفــاقم
|
|
لــو
يصـبر
الأحـرار
صـبرك
مـرة
|
مـا
لامهـم
فيمـا
اشـتهوه
اللائم
|
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ولربمـا
اتهـم
الـبريء
وأبعـدت
|
عنــه
الصــديقَ
دسـائس
ونمـائم
|
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إن
يسـكت
الشـاكي
إليـك
فطاعـة
|
لـك
لا
كمـا
سـكت
المغيظ
الواجم
|
|
لا
يُغضــــبنَّك
صـــائحٌ
متعجِّـــلٌ
|
مـا
أنـت
مزمعـه
ومـا
هـو
زاعم
|
|
مـاذا
علـى
المشـتاق
إذ
يهتاجه
|
لأليفـه
الـبرق
الـذي
هـو
شـائم
|
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إن
يعلـم
الشعب
الوديع
بحقك
ال
|
أعلــى
فـأنت
بحـق
شـعبك
عـالم
|
|
جـاء
اليقيـن
فلا
سبيل
لما
ادعى
|
فيــه
مريــب
أو
تخيــل
واهــم
|
|
مـن
يملـك
القـول
المـبين
فإنه
|
لا
يحــذر
الأجنــاد
وهـي
خضـارم
|
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وأقــرت
الصــيد
الـدهاة
بحقـه
|
ســيان
راض
فـي
الـدهاة
وراغـم
|
|
والحـق
إن
لـجَّ
الدعاة
به
استوى
|
فـــي
نفعــه
متشــيِّعٌ
ومقــاوم
|
|
وإذا
علـت
نفـس
الأبـي
غلـت
فلا
|
مســــتأجر
لإبـــائه
ومســـاوم
|
|
والشـعب
مختار
السلام
إلى
العلى
|
ســبباً
وأسـباب
الشـعوب
جـرائم
|
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لانــت
ســجاياه
كسلســل
نيلــه
|
وتحمــل
الأيــام
وهــي
مغــارم
|
|
لا
نـــال
بــاغ
بــالأذى
حريــة
|
فـي
الخـافقين
ولا
اسـتقل
الآثـم
|
|
إنــي
أرى
متنــازعين
تســوقهم
|
عميـاً
إلـى
الأمـد
السحيق
سخائم
|
|
دولاً
إذا
احــتربت
فإنــك
آمــن
|
وإذا
هــي
اصـطحبت
فإنـك
غـانم
|
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والـدهر
يكتـم
حادثـاً
وأخاف
أن
|
يتنـاول
الـدولات
مـا
هـو
كـاتم
|
|
وخـوارج
عاشـوا
علـى
حنـق
كمـا
|
تســعى
عقــارب
أو
تـدب
أراقـم
|
|
ألفـوا
الشعاب
العوج
شائكة
كما
|
ألفـوا
الرياح
الهوج
وهي
سمائم
|
|
بئســت
حـدائق
مـن
دمـاءٍ
ريُّهـا
|
ومنـــازلٌ
أحجـــارهن
جمـــاجم
|
|
يـا
ليـت
جـدك
لـم
يـدع
متنمراً
|
منهـم
ولـم
يـرع
الجزيـرة
راحم
|
|
أحــزاب
مصــر
إذا
رضــيت
قلادة
|
شــتى
فرائدهــا
وأنـت
النـاظم
|
|
والنيـل
بيـن
يـديك
يجري
سلسلاً
|
والعيـش
رغـد
فـي
زمانـك
نـاعم
|
|
أتهـز
يومـاً
عرشـك
العـالي
يـد
|
ولــه
قلــوب
المخلصـين
دعـائم
|
|
لا
مصـــر
واجفــة
ولا
أنصــارها
|
مستضــعفون
ولا
الخليفــة
نـائم
|
|
هــذي
البلاد
المطمئنــة
كلمــا
|
دهــــت
البلاد
زلازل
ورواجــــم
|
|
لـك
أن
تكـون
كمـا
تشاء
وحسبها
|
أن
لا
يسـوس
الملـك
غيـرك
حـاكم
|