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إلـى
الـدر
اليـتيم
سـلام
صبٍّ
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تصـب
دمـوعه
الـدر
اليتيمـا
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فتنظمــه
مـن
العـبرات
أيـد
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بسـلك
مـن
ضـنى
عقـدا
نظيما
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وفـي
وادي
عقيـق
الدمع
عيني
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مـن
الاجفـان
سـوَّرت
الحطيمـا
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وزمـزم
بالمقـام
أبـو
قـبيس
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فـؤادي
يسـمع
الصوت
الرخيما
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وأشــواق
تؤجــج
نــار
وجـد
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بمديـة
حرهـا
تفـرى
الأديمـا
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وأنفـــاس
تصـــعدها
نفــوس
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تعيـر
نفاسـة
الطبع
النسيما
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وشــكوى
مـن
حـوادث
موبقـات
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لقـد
جددن
لي
الحزن
القديما
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فكــم
سـهم
تفـوَّقه
المنايـا
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فتصمى
من
كلى
المجد
الصميما
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وكـم
سـلب
الحمـام
كرام
قوم
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فلــم
يــترك
شــهما
كريمـا
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وكـم
رزء
كسـا
الدنيا
سوادا
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أحــال
نهارهــا
ليلا
بهيمـا
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وكــم
ميــت
قضـى
وبكـل
حـيٍّ
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عليـه
مـأتم
الـدنيا
اقيمـا
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وكـم
نـدب
عليـه
النـدب
فرض
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قضــينا
ان
تــاركه
أثيمــا
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وكــم
بــأكفه
لطـم
الثريـا
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فـتى
بيـد
الردى
أضحى
لطيما
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ومـا
مـن
مغـرم
بالمجـد
إلا
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رأينـا
اللحـد
كان
له
غريما
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وأي
زعيــم
قــوم
مـا
تصـدَّى
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لــه
حتـف
فكـان
بـه
زعيمـا
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ومـن
منـه
أصـاب
الضـيم
ضيم
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يضـيم
النـاس
طـراً
حيث
ضيما
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ومـن
قـد
خلـف
العبـاس
فينا
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لعمـري
خلـف
الملـك
الكريما
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أبــر
ابـن
غـدا
بـأب
رحيـم
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نؤمَّـل
منهمـا
الـبرَّ
الرحيما
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أعزيـــه
لفقـــد
أب
أبـــي
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وخــال
يملأ
الملــوين
خيمـا
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بــبر
أبيــه
أعـددناه
ممـن
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عشـية
أمطروا
دخلوا
الرقيما
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سـقى
اللـه
العلـي
ثـرى
عليٍّ
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سـمي
المرتضـى
غيثـا
عميمـا
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وخــال
تحــت
عارضـه
تـوارى
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فعطـل
مـن
حلـى
خـداً
وسـيما
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فكــل
منهمـا
إذ
صـار
بـدرا
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عشــية
تمــه
للخســف
سـيما
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أغاضــتنا
منيــة
ذا
وهــذا
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وكـم
قـد
غـاض
ذو
سفه
حليما
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وهـب
ان
العلـي
غـدا
رميمـا
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فقـد
أحيا
من
الفضل
الرميما
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بقـائم
وقتـه
العبـاس
من
قد
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غـدا
لقواعـد
العليـا
مقيما
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فيـا
مـن
سـاءني
منـه
مصـاب
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بـرزء
شـيب
الطفـل
الفطيمـا
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تعــزى
فـالعزاء
علـى
عظيـم
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ينال
به
الفتى
الاجر
العظيما
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ومـن
كنـت
ابنـه
تكفيـك
منه
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هـدايتك
الصـراط
المسـتقيما
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فمـن
تحكيمـه
كنـت
الحكيمـا
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ومـن
تعليمـه
صـرت
العليمـا
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فعـش
قلبـا
سـليما
للمعـالي
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فمنــك
تملكـت
قلبـا
سـليما
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