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نزلـوا
بالسـفح
مـن
وادي
زرود
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ونزلنــا
بالغضـا
ذات
الوقـود
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فانقضـت
منهـم
أويقـات
اللقـا
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وقضــت
بـالموت
أيـام
الصـدود
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لـو
ترانـي
يـوم
سـارت
عيسـهم
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مـن
خفـوق
خلتنـي
بعـض
البنود
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بخلـوا
عـن
أن
تراهم
في
الكرى
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مقلـتي
يـا
مقلتي
بالدمع
جودي
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وعــدوا
والوعــد
منهــم
خلـب
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رب
بـرق
مـا
بـه
غيـر
الرعـود
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أيــن
آرام
المصــلى
والنقــا
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مـن
وفـا
عهـد
وانجـاز
وعـودي
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أنكــروا
دعـوى
صـباباتي
بهـم
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وشـؤن
الـدمع
مـن
بعـض
الشهود
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صــوَّب
العــبرة
تصـعيد
الحشـا
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نـار
وجـود
جـاوزت
حـدَّ
الصعود
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ومحـــال
حــرَّ
وجــدي
ينطفــي
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بســوى
رشـفي
لمـى
ثغـر
بـرود
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كيــف
أختـار
صـدوري
عـن
لمـى
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حــف
كـالروض
بـأنواع
الـورود
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تركـوا
الملعـب
فـي
حـزوي
ومن
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مهجـتي
قـد
سـكنوا
غـاب
الاسود
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حســد
القلــب
عليهــم
نـاظري
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فغــدا
بعـض
علـى
بعـض
حسـودي
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سـاهرت
عينـي
السـهى
حـتى
سها
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طرفــه
معتجــرا
ثـوب
الرقـود
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والسـواري
السـبع
بـاتت
هجـدا
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فهـي
أحـرى
مـن
وجـودي
بهجودي
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وضــنائي
فــي
الهـوى
أطمعنـي
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أن
أرى
سـلكا
لهاتيـك
العقـود
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كــم
هزبــر
طـاح
فـي
أحبولـة
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غزلتهـا
مقلـة
الظـبي
الشـرود
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ســـلبت
راحتـــه
مـــن
يــده
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فغـــدت
مغلولـــة
ذات
قيــود
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قـد
مضـى
عصـر
الصـبا
واتضـحت
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للعيـون
السـود
بينـض
غير
سود
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ونــأت
عنـي
اللـواتي
كـنَّ
فـي
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خــدمتي
بيــن
قيــام
وقعــود
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وانقضـت
تلـك
الليـالي
في
هوى
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كـل
ظميـاء
اللمـى
حسـناء
رود
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كلمــا
خاطبتهــا
قـال
الصـدى
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يـا
ليالينـا
بطيب
الوصل
عودي
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ومــتى
روض
الأمــاني
قــد
ذوى
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بثنا
المولى
الشهاب
اخضرَّ
عودي
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وغصــون
القصــد
فيــه
أزهـرت
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بــــورود
كقــــدود
وخـــدود
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فــانثنى
ينظــم
منــه
قلمــي
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دررا
تــزري
بقرطــي
كـل
خـود
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قبلــه
مــن
نظــرت
عيـن
ذكـا
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ســيدا
فــي
قـومه
غيـر
مسـود
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خنـدف
العليـا
بـه
قـد
أنجبـت
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فــأتى
خيــر
وليـد
مـن
ولـود
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وورت
فكرتــــه
زنـــدا
بـــه
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آل
فهــر
فــاخرت
كـل
الزنـود
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فلقـــت
أقلامـــه
صــبح
هــدى
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رفعــت
فســطاطه
فــوق
عمــود
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جنـــد
الأرواح
فـــي
تحــبيره
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فهــو
مشـغول
بـترتيب
الجنـود
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مســلم
أذكــى
مصـابيح
الهـدى
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وبخــاري
الثنــا
بعــد
همـود
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وأحــــــاديث
علا
سلســـــلها
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ألحــق
الآبـاء
منهـا
بالجـدود
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عيــن
ذي
النــون
حكـى
مزبـره
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فـانبرى
مخضوضـعا
غـب
السـمود
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تاليــا
تســبيح
بــاريه
بهـا
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عـــاكف
بيــن
ركــوع
وســجود
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شــــيبت
لمتــــه
الآي
كمـــا
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شـيبت
خيـر
الـورى
سـورة
هـود
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والطبــاق
الســبع
قـد
طبقهـا
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رؤيــة
فســرها
حــال
الشـهود
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والبحــار
السـبع
قـد
أدرجهـا
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ذلـك
الطمـاطم
فـي
سـبع
جلـود
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نــزل
الــروح
بهــا
فانتعشـت
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ونشــت
أرواحهــا
بعــد
ركـود
|
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أوقــف
الكشــاف
فــي
تفسـيره
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يـا
لـه
فخـر
علـى
كشف
الحدود
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حجــــة
بالغــــة
برهانهـــا
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قــام
مــن
غيــر
دفـوع
وردود
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نشـر
العلـم
الـذي
كـف
البلـى
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قـد
طـوته
تحـت
أطبـاق
اللحود
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وفــد
الســيد
والســعد
إلــى
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بـابه
والفخـر
مـن
بعض
الوفود
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لـم
أجـد
لـي
علـة
عـن
مدح
من
|
علـــة
كــان
أبــوه
للوجــود
|
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فاتخــذت
المــدح
فيــه
سـلما
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لصــعودي
فــوق
غايـات
سـعودي
|
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فحبــاني
منحــا
منهــا
أنــا
|
وكســاني
مــن
علا
أسـنى
بـرود
|
|
دام
مــن
غيــر
جمــود
لطفــه
|
سـائلا
والفكـر
مـن
غيـر
خمـود
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