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أتحســب
أن
أبنيـة
المعـالي
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تشـاد
بغيـر
ألويـة
العوالي
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وهـل
يُحْـوَى
جميـل
الذكر
إلا
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بسـمر
الخـطّ
أو
بيـض
النصال
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أيــا
للــه
دَرُّ
فَــتىً
يُـرَوِّي
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شـفار
الـبيض
في
ضيق
المجال
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يَكُــرُّ
ولا
يفــر
إذا
ترامــت
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بأسـد
الحـرب
خيـل
كالسعالي
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إذا
مــدّ
الطـراد
رواق
تقـع
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تعمــد
ضـرب
أعنـاق
الرجـال
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تـراه
يـدير
كأس
الموت
صِرفاً
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مـن
الملـد
المثقفـة
الطوال
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كعـزّ
الـدين
أيبـك
حين
يسطو
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فَيُرْخِـصُ
بأسـه
المهج
الغوالي
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فـتى
مـا
فـاته
كرم
السجايا
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ولا
شـــرف
المســاعي
والخلال
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مهيـب
الحـزم
بسـام
الأيـادي
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مَخُـوفِ
العـزم
مرجـو
النـوال
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أغـرّ
معـاود
الغمـرات
يجلـو
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دياجيهـــا
بمرهفــة
صــقال
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يميـل
بعِطفـه
النشـوان
سُكْراً
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إذا
حـدثت
عـن
يـوم
القتـال
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فلا
تــذكر
لـديه
سـوى
حسـام
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ورمــح
أو
ســماح
أو
نــوال
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وجـــرد
أعوجيـــات
وســـود
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تنــزه
أن
تبــالي
بالنبـال
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فخـذ
مـن
سـيفه
نقـع
الأماني
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وخـف
مـن
سـيفه
وقـع
الوبال
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فيـا
راجـي
النـدى
خيم
لديه
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بنـادي
الجـود
ممـدود
الظلال
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أيبـذل
نفسـه
فـي
يـوم
حـرب
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ويبخـل
عنـك
فـي
سـلم
بمـال
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تسـوغ
لـه
منادمـة
المنايـا
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سـياغ
الخمـر
بالمـاء
الزلال
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إذا
دارت
رحـا
الهيجاء
يوماً
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وغُلــبُ
كماتهـا
تـدعو
نَـزَال
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تَقَحَّــمَ
حولهـا
وسـما
إليهـا
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وكـان
لحـرِّ
تلـك
النار
صالي
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فحــدث
عــن
مــآثر
أشــرفيّ
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نـــتروج
بالمفــاخر
والجلال
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وَسـَلْ
دميـاط
عنـه
فلن
تراها
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تَلَجْلَـجُ
إذ
تجيـب
عـن
السؤال
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أكـان
سـواه
فارسـها
وشـافي
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غليـل
الـدين
مـن
عصب
الضلال
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فيـا
مـن
لا
يجـارى
مـن
سماح
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ويـا
مـن
لا
يبـارى
في
معالي
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كملــت
مناقبــاً
وعلاً
ومجـداً
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أعيـذ
علاك
مـن
عيـن
الكمـال
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لقـد
أبـدعت
في
بذل
العطايا
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فمـا
تحـذو
السماح
على
مثال
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ويـوم
الـزاب
لو
كروا
يميناً
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ككـرك
إذ
حملـت
علـى
الشمال
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لغـادرت
الجمـاجم
مـن
أنـاس
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علـى
تلـك
الأباطـح
والرمـال
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ولكــن
أســلموك
لجـرد
خيـل
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أتتــك
مغيـرة
شـبه
الجبـال
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فقـارعت
الكمـاة
وكـان
يوماً
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تُحَــدِّثُ
عنــه
ربـات
الحجـال
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وحـاتم
طيـئ
فـي
الجـود
عبد
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لعبــدك
إذ
يجــود
بلا
سـؤال
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وعنــترة
الفـوارس
لا
يبـاري
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طعانـك
عنـد
مشـتجر
العوالي
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ومــا
الأيـام
إلا
مـا
تراهـا
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كمثـل
الظـل
يـؤذن
بانتقـال
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فـأعط
النفـس
منيتهـا
وبادر
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منيتهـــا
ولا
تبخــل
بمــال
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فيـا
مـن
لـم
يزل
يسري
نداه
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إلى
راجي
النوال
سُرَى
الخيال
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تلـق
مـدائحاً
كـالروض
أضـحى
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يباكرهـا
الحيـا
غِـبَّ
الشمال
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فقـدر
المـال
عنـد
نداك
هين
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وسـعر
الشـعر
عنـد
علاك
غالي
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فلا
زالــت
جــدودك
ســاميات
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ولا
برحــت
سـعودك
فـي
تعـال
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