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قضـت
لـك
البيض
والقنا
السُّلُب
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أن
نفــوس
العــدا
لهـا
سـَلَب
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فقـم
لملـك
الـدنيا
فأنت
لها
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خيــر
عتــاد
ترجــى
وترتقـب
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فالملـك
مـا
زال
يسـتقر
علـى
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مــا
أسسـته
الرمـاح
والقضـب
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فَصــُلْ
بهــا
واصـلاً
إلـى
أمـد
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لا
الحـزم
عنـه
مـاض
ولا
الحسب
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فتلــك
تهــتز
فــي
مراكزهـا
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وهــذه
فــي
الســعود
تضـطرب
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دام
أوام
الـدنيا
إليـك
ومـا
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يـروي
صـداه
إلا
الـدم
السـرب
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فمــا
لهــذي
الجيـاد
لا
عَنَـق
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يلفـــت
أعناقهـــا
ولا
خَبَــب
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قــد
آن
أن
يجتنــى
مناكبهـا
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مســــومات
ففيـــم
تجتنـــب
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فليـس
تُحْمَـى
منـك
الحصون
إذا
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مـا
شـن
هـذا
العرمـرم
اللجب
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يقـــدمه
يــوم
كــل
معركــة
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أغلــب
عــادات
جيشـه
الغلـب
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ومــدلجين
ارتمــت
بهـم
همـم
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ليـس
لهـا
فـي
سوى
الغنى
أرب
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حقــائب
العيــس
فـي
رحـالهمُ
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قـد
نفضـتها
السـنون
والحقـب
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حــداهم
الفقــر
قاطعـاً
بهـم
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مفــاوزاً
فـي
ركوبهـا
العطـب
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قلــت
لهــم
والظلام
يقــدمهم
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فــي
لجــج
منـه
موجهـاً
صـخب
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لا
تســأموا
فالصــباح
مقـترب
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إســـفاره
والنجــاح
مرتقــب
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هذا
الغياث
الغازي
الذي
وعدت
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بـــه
الأمــاني
وهــذه
حلــب
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يـا
فـوز
آمـالكم
لقـد
وصـلت
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بكـم
إلـى
حيـث
ينتهـي
الطلب
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لــوذوا
بمـن
لا
تـزال
صـاغرة
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تكبـو
وتنبـو
عـن
جاره
النوب
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بالملـك
الظـاهر
الـذي
شـرفت
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بـه
المعـالي
واسـتعلت
الرتب
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بمــن
تعيــد
الظُّبـا
وقـائعه
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ذكورهـــا
بــالنجيع
تختضــب
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والســمر
مثـل
الأشـطان
واردة
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حيـث
قلـوب
العـدا
لهـا
قُلُـب
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والزغـف
تحكـي
غـدران
محنتـه
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يزينهــا
مــن
قتيرهــا
حبـب
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والنقـع
مـن
وقـع
كـل
سـلهبة
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داج
ووجــه
الســماء
محتجــب
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فجفــن
شـمس
الضـحى
بـه
رمـد
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وخــد
بــدر
الـدجا
بـه
تـرب
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يا
ابن
الذي
ضعضع
الفرنج
ومن
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أطفـأ
نـاراً
يخشـى
لهـا
لهـب
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كـم
صـَلَّت
السـمر
فـي
صـدورهم
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بعــز
نصــر
ذلـت
لـه
الصـلب
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منــاقب
تبهــر
النجـوم
فمـا
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تـبرح
خجلـى
مـن
نورها
الشهب
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لـو
أمكـن
البـدر
أن
يقابلها
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كــان
بــذيل
الغمـام
ينتقـب
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وأنـت
ذاك
السـرا
الـذي
كشفت
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عنــا
بــأنوار
وجهـه
الكـرب
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عنيــت
بالجــد
والإبـاء
معـاً
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عمــا
بنــاه
جــد
وشــاد
أب
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إذا
وطئت
الـــثرى
فأســعدنا
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عــاف
لــه
بالشــفاه
ينتهـب
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مـا
ضـرَّ
أرضـاً
نـداك
يمطرهـا
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إذا
تجـافت
عـن
سـقيها
السحب
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صــُبْتَ
فناديــك
بـالغنى
خَضـِل
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صــُلْت
فواديــك
بالقنـا
أَشـِب
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تجـد
فـي
البـذل
من
يديك
لنا
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مــواهب
بــاللُّهى
لهــا
لعـب
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يـا
من
نحاني
دهري
فلم
يك
لي
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إلا
إلـــى
ظــل
ملكــه
هــرب
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لــو
حملتنــي
إليــك
ناجيـة
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لقلــت
لا
مــس
ظهرهــا
قتــب
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وإنمــا
الفقـر
كـان
راحلـتي
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وحــــاديي
الرجــــاء
والأدب
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فــابق
لملــك
أغــر
طلعتــه
|
جـاء
يهنـي
الرجـا
بهـا
رجـب
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