|
يـا
سـيدي
إنـي
فـداك
اللـه
بي
|
جـار
الحمـى
ما
عند
لي
في
مذهب
|
|
اطنــــابكم
موصـــولة
بطنـــي
|
لـي
حـق
ذي
القربـى
وحـق
الجنب
|
|
واننــي
قــن
لكــم
لــم
اشــب
|
وذو
انتســاب
لســت
بالمؤتشــب
|
|
وذو
تعلــــــق
وذي
تحبــــــب
|
وذو
تملــــــق
وذو
تربــــــب
|
|
ومستضـــيف
حرمــل
لــم
ارغــب
|
فـــي
غيركـــم
لظمئى
والســغب
|
|
وســـائل
وذاك
غيـــر
مشـــعبي
|
لكننـــي
فــي
نيلكــم
كاشــعب
|
|
وكــم
حقــوق
لــي
لــم
أؤنــب
|
ان
قلـت
اهلهـا
بهم
اوصى
النبي
|
|
لا
ان
النــبي
منكــم
لـم
يرقـب
|
غمصـا
لمـا
مـن
فضـلكم
علـق
بي
|
|
لكـن
عـدا
بـي
الطـور
توق
رقبى
|
مــن
نســبتي
لكـم
لاعلـى
مرقـب
|
|
واحــد
اللــه
فلــو
لـم
انسـب
|
الـى
حمـاكم
فـي
الورى
لم
احسب
|
|
ولــم
تجــد
ركـائبي
مـن
مضـرب
|
في
مشرق
الارض
في
الورى
لم
احسب
|
|
نعـــم
كفـــاني
لامتلاء
جربـــي
|
علمــي
بكــم
ورؤيــتي
وقربــي
|
|
فـي
جنـب
ذلـك
مهبـا
عنـدي
هـب
|
ملــء
الــبرى
مــن
فضـة
وذهـب
|
|
امـي
فـداكم
بعـد
ان
يبـدأ
بـي
|
وبــابي
لــو
ان
غيركــم
ابــى
|
|
ووجنــتي
لنعلكــم
فـي
الـتيرب
|
وقايـــة
مـــن
شــوكة
وعقــرب
|
|
مـن
ادعـى
عنكـم
غنـى
فـي
مذهب
|
انــي
الــى
مــذهبه
لـم
اذهـب
|
|
امــا
درى
مــن
جهلــه
المركـب
|
بــان
ســوى
الحمــى
لـم
يركـب
|
|
فـــانه
لـــولاكم
لـــم
يضــرب
|
لــه
بســهم
مــن
اقــل
مضــرب
|
|
ولــم
يــزل
حيــاته
فــي
تغـب
|
ولـم
يلـزم
بيـن
الـورى
من
زغب
|
|
وعــذره
الجهــل
وعلــم
الحـدب
|
منكـــم
لـــه
ادى
لســوء
الادب
|
|
ومـا
علـى
عـالي
الـذرا
من
نصب
|
فـي
هبـة
الصـبا
ورميـة
الصـبى
|
|
وكيـــف
اغنــى
عنكــم
ونســبي
|
ونشــبي
منكــم
ومنكــم
حســبي
|
|
ومنكــم
دفعــي
ومنكــم
جلــبي
|
وه
منكــم
درعــي
ومنــك
يلـبي
|
|
واســــلى
وقضــــبي
وموكـــبي
|
وجفلــــى
وعضــــدي
ومنكـــبي
|
|
ومعقلـــــي
وملجئي
ومهربــــي
|
وملبــــس
ومـــأكلي
ومشـــربي
|
|
ومركــــبي
وقربــــي
وقربـــي
|
وطــــاعتي
وزلفــــي
وقربـــي
|
|
ومنكــم
راحــي
ومنكــم
ضــربي
|
وراحــتي
منكــم
ومنكــم
ظــبي
|
|
وجـــبر
كســـرى
وجـــبر
ربــي
|
وبــــرء
دائي
وبـــرء
جربـــي
|
|
وانتــــم
وســــيلتي
وســـببي
|
لمـــا
اليــه
وجهــتي
وخبــبي
|
|
وانتـــم
دريئتـــي
مــن
لهــب
|
نـار
لظـى
يـوم
اشـتداد
الصيهب
|
|
ام
كيــف
يغنــى
عنكــم
ذو
ارب
|
لربــــه
مـــن
عجـــم
وعـــرب
|
|
ومالـك
الملـك
الـذي
لـم
يعلـب
|
وفضـــله
ان
يعطـــه
لا
يســـلب
|
|
والفعــل
منــه
عنـه
لـم
ينقـب
|
وحكمــه
فــي
الكـون
لـم
يعقـب
|
|
ولاكــم
مـن
اجـل
ميـراث
النـبي
|
امـر
الـورى
مـن
اقـرب
واجنـبي
|
|
رحــب
الفضـا
لـولاكم
لـم
يرحـب
|
ولــم
تجــد
جــرز
بغـر
السـحب
|
|
وان
يصــب
صــوب
الحيـاء
ويصـب
|
لــم
يحـي
ميتـا
دونكـم
ويخصـب
|
|
والــدر
لـولا
رغسـكم
لـم
يحلـب
|
وامــدر
لــو
سـعركم
لـم
يجلـب
|
|
اذ
لرحــى
الاكــوان
حـق
القطـب
|
انتـم
وهـل
تغنـى
الرحى
عن
قطب
|
|
فليـــومن
الحســـود
او
يكــذب
|
مــا
طــرق
الحـق
كطـرق
الكـذب
|
|
فـــانتم
غيــث
وغــوث
المجــد
|
والنــادب
الملهــوف
والمنتـدب
|
|
الفيتــم
الـدين
بقطـر
المغـرب
|
طــارت
بــه
للجـو
عنقـا
مغـرب
|
|
ورســـمه
عفتــه
هــوج
النكــب
|
ولــم
تعــج
لــه
صـدور
الركـب
|
|
فشــــدتم
دعـــم
كـــل
خـــرب
|
منــه
فلــم
يهـدم
ولـم
يضـطرب
|
|
وعنــه
ذدتــم
بشــبا
ذي
شــطب
|
يجــرع
البغــاة
كــأس
العطــب
|
|
مهمـا
يسـمه
الخسـف
ضخم
القبقب
|
قـالت
سـيوف
الحـق
فيـه
قـب
قب
|
|
فـبزغت
شـمس
الهـدى
فـي
الغيهب
|
فـــابيض
كـــل
اســود
واكهــب
|
|
مشــرقة
فــي
نورهــا
المحتجـب
|
تبــارك
اللــه
كــان
لـم
تجـب
|
|
مـن
نورهـا
اسـتمد
نـور
الشـهب
|
فلاحــت
اســعد
الســنين
الشـهب
|
|
فطــابت
الحـال
الـتي
لـم
تطـب
|
وارطـب
العيـش
الـذي
لـم
يرطـب
|
|
واض
صــاب
الــدهر
بنـت
العنـب
|
وعـــاض
نــابه
بــبرد
الشــنب
|
|
بـــورك
فليكـــم
وفــي
مطيــب
|
مــا
حزتــم
بــاديه
والصــغيب
|
|
واللــه
يبقيكــم
لنفـي
الريـب
|
ونفعنـــا
مـــن
حاضــر
وغيــب
|
|
وعــن
ســبيل
الابطحـي
اليـثربي
|
جزاكــم
خيــر
الجــزا
خيـر
رب
|
|
ادعــوه
فــي
كمـاله
المسـتوجب
|
انــا
مــتى
مــا
نـدعه
يسـتجب
|
|
موقنـــا
ان
غيــره
لــم
يهــل
|
ولا
يقـــي
فـــي
رغـــب
ورهــب
|
|
بالاسـم
الاعظـم
ومـا
لـه
اجتـبى
|
مــن
صــفة
واســم
وأي
الكتــب
|
|
والانبيـــاء
كلهـــم
والنخـــب
|
مـن
رسـلهم
والمصـطفى
المنتخـب
|
|
والال
والاصــــحاب
والمنتســــب
|
والــد
وليلا
المــومن
المحتسـب
|
|
وبالملائكـــــــة
والصــــــقر
|
ورســـلهم
مــن
اقــرب
فــاقرب
|
|
ان
يـولي
الرضـى
الـذي
لم
يعقب
|
بســـخط
لكـــم
وطــول
الحقــب
|
|
وان
يزيــد
مــن
عـوالي
الرتـب
|
مقــــامكم
دون
عنـــا
ورتـــب
|
|
وان
يقــي
نعمتكــم
مــن
ســلب
|
وان
يقيكـــم
شــر
كــل
مخلــب
|
|
وحاســــد
وراصــــد
مرتقــــب
|
ونــــافث
وغاســــق
ان
يقـــب
|
|
وعــــائن
وخــــائن
مختلــــب
|
وهاتــــك
وفاتــــك
مســــتلب
|
|
وان
يبــارك
لكــم
فــي
العقـب
|
منكــم
فيحظــى
بثبــات
العقـب
|
|
ومنــه
جــل
وهـو
مـولى
الرغـب
|
وفـــاطر
الســـبعين
دون
لغــب
|
|
ارجــو
بكــم
نيــل
جميـع
الارب
|
ودرك
هملاجــي
هــو
ادى
الربـرب
|
|
وفـــوز
ســهماني
بكــل
مطلــب
|
قصـــر
عنــه
كــل
مــاض
قلــب
|
|
وحملـــي
العـــب
بحلــب
صــلب
|
وكــون
برقــي
غيــر
بـرق
خلـب
|
|
ومــد
غمركــم
معيــن
المســكب
|
برضـى
ونـور
الشـمس
منكم
كوكبي
|
|
ومنحــي
الغــرب
بــاقوى
كــرب
|
وان
يفــــرج
تعــــالى
كـــرب
|
|
وان
افــــوت
درك
كـــل
طلـــب
|
وادرك
المطلــــوب
دون
طلــــب
|
|
واحـــرز
الخصــل
بغيــر
تعــب
|
واخــرز
الخــرق
بخيــر
مشــعب
|
|
وان
ابــاغ
المنــى
لــم
تجــب
|
فيـح
المـوامي
النائيـات
نجـبي
|
|
ويســــتقيم
عرجــــى
ونكـــبي
|
واركــب
النجــاة
غيــر
مركــب
|
|
وتـــبردوا
مــن
غلــتي
بنغــب
|
مـن
ثلجكـم
تـزرى
بـبرد
الشـغب
|
|
وتســـمحوا
بنظــرة
مــن
حــدب
|
بهـــا
يقـــام
اود
المحــدودب
|
|
وتنفحـــوا
بنفحــة
مــن
طيــب
|
طيبكــــم
المطيـــب
المطيـــب
|
|
وتنشــلوا
بجذبــة
مــن
يجــذب
|
بهــا
يصــل
بهــا
فلـم
يذبـذب
|
|
حــتى
أرى
بالنــائل
المكتســب
|
منكــم
اليكــم
صـادق
المنتسـب
|
|
فيتـــولاني
الـــذي
ان
اكســـب
|
ولايـــة
منـــه
فــذاك
محســبي
|
|
لا
زلتــم
فــي
الحــرم
المحجـب
|
والنــاس
مــن
حرمتـه
فـي
عجـب
|
|
وانتـــم
مــن
قطــره
المرجــب
|
وعصـــره
فـــي
مكـــة
ورجـــب
|
|
يــــأتيه
فــــل
ارب
وهــــرب
|
كــــــل
مخافـــــة
وتـــــرب
|
|
فئامــل
ســيح
جمــام
القاســب
|
ومشــتك
هضــم
اللصــوص
الغلـب
|
|
ومســــترق
رام
فـــك
الرقـــب
|
وســـالك
رام
جـــواز
العقـــب
|
|
وســـائل
عــن
مشــكل
مستصــعب
|
وجاهــل
يصــفى
كمشــي
المصـعب
|
|
فيلتقــــي
جميعهـــم
بمرحـــب
|
وتبســط
البســط
لهــم
بـالرحب
|
|
وآدب
بـــالنقرى
لـــم
يـــدرب
|
والجفلــى
مهمــا
دعاهـا
يطـرب
|
|
تراهــم
لــدى
الجنـاب
المخصـب
|
علـى
القـرى
كـالعكر
المعصوصـب
|
|
فمــن
يقــم
يـزد
علـى
المطلـب
|
ومــن
يــؤب
فحامــد
المنقلــب
|
|
ولا
يــزل
بــرق
نــداكم
يطــبى
|
اهــل
القريــض
نحـوكم
والخطـب
|
|
ركـــابهم
ينهجــن
كــل
نيســب
|
مـــن
سبســب
خوارجــا
لسبســب
|
|
لمـا
رأوا
مهـدى
الثنـافي
نصـب
|
الا
لكــم
لــم
يــذبحوا
للنصـب
|
|
والكــل
عــد
نفســه
كالمــذنب
|
لعجــزه
اطنــب
او
لــم
يطنــب
|
|
وكــل
مــن
اصــاب
او
لـم
يصـب
|
تغضــون
عنـه
مـن
علـو
المنصـب
|
|
فتتحفـــــــونه
بكــــــل
ارب
|
تأســــيا
بـــالخفي
العربـــي
|
|
اتحفـــه
اللـــه
بغيــث
صــيب
|
مــن
الصــلاة
والســلام
الطيــب
|
|
والال
والصـــحب
وكـــل
مجتـــب
|
ديـن
النـبي
المجتـبى
لـم
يرتب
|
|
مـا
فـاز
بالشـرب
قصـير
الكـرب
|
مــن
ازرق
الجـم
قريـب
المشـرب
|
|
ولــم
يــؤب
فــوق
ركــاب
خيـب
|
مــن
انتهــوا
لولــد
المســيب
|
|
جــاءت
بقصــد
الـزور
والتقـرب
|
تســحب
ذلا
خــدها
فــي
الــترب
|
|
هـــذبها
مــن
ليــس
بالمهــذب
|
لكنــه
فــي
ضــمنها
لـم
يكـذب
|
|
تمـرى
النـدى
الـذي
بـدره
حـبى
|
مهـدي
الثنـا
مـرى
الصبا
للسحب
|
|
ترجـو
النجـاة
مـن
دواهي
الحقب
|
والفــوز
بالنجـح
وحسـن
الققـب
|