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مــا
حــل
عقــد
عزمـي
سـحر
حـوراء
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ولا
ازدهــى
طـود
حلمـي
بـرق
زهـراء
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عصـر
الصـباء
انتقتنـي
فاقتديت
بها
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ســــبل
الهـــداة
واخلاق
الاعفـــاء
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حبســت
نفسـي
بسـجن
الصـبى
منتضـيا
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عزمـــي
وقيــدت
الحــاظي
باغضــاء
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حــذار
المامهــا
مــن
وجـه
غانيـة
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بروضــة
مــن
ريــاض
الحســن
غنـاء
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مــاء
الملاحــة
جــار
فـي
مسـائلها
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الـــى
منيــر
اقــاح
وســط
حــواء
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فتنثنــــي
لفـــؤادي
وهـــي
رائدة
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لـــه
فتخـــبره
بــالرعي
والمــاء
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حــتى
اذا
القيهـل
التـاثت
حـديقته
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بـــه
وهمـــت
بازهـــاء
قازهـــاء
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وكــاد
يصــبح
ليلــي
بعــد
دهمتـه
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وان
وقــت
انتبــاه
بعــد
اغفــائي
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ســرحتها
مـن
وثـاقي
اذ
وثقـت
بهـا
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والعجـب
اصـل
لمـا
في
النفس
من
داء
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فآنســت
فــي
صــوار
العيــن
آنسـة
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وفــي
الســحائب
منهــا
بـرق
غـراء
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فانهـد
اذ
ذاك
طـود
الحلـم
وانتكثت
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منـى
عـرا
العـزم
لصح
الطرف
من
راء
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حــتى
هممــت
بشــيء
مـا
هممـت
بـه
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ازمـــان
لاق
باشـــكالي
واكفـــائي
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حســناء
هــام
بهــا
قلـبي
ولا
عجـب
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كـم
هيـام
قلـب
فـتى
قبلـي
بحسـناء
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هن
اللواتي
اذقن
الصوت
عروة
النهدى
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عــــن
مقلــــتي
هنـــد
وعفـــراء
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وايــن
الملــوح
قيســا
فـي
فتـوته
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اصـــمين
وابــن
ذريــح
أي
اصــماء
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كــم
ذا
هممــت
بوصــليها
فـتردعني
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عنهــــا
روادع
مـــن
آي
وانبـــاء
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فــانثنى
واقــول
اللــه
ارحــم
ان
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يــولي
انتقاصـا
علـى
وصـل
الاحبـاء
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ولـــم
ازل
هكــذا
حــتى
تنهنهنــي
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عـــــــداوة
وردت
بيــــــن
الاخلاء
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هنــاك
ازور
كرهــا
عــن
زيارتهــا
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كــي
لا
يجــر
لهـا
المكـروه
جـرائي
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واي
شــيء
علــى
الاحـرار
اشـنع
مـن
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تســــبب
فــــي
معــــاداة
الاوداء
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هــذا
وليســت
يـدلي
ان
اعـادي
مـن
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شــدت
يــديها
بقلـبي
بعـد
ايـدائي
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ومــا
ودتنـي
ولا
انقـادت
الـى
قـود
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ولـــم
تـــرق
كاربـــاب
الارقـــاء
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واقبلـــت
تتشـــكى
وهـــي
مشــكية
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كــالقوس
رنــت
وقــد
شـاكت
بحـراء
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وشـــافع
فـــي
محياهـــا
شــفاعته
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يمحــو
بهـا
حربهـا
مـن
كـل
حوبـاء
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وهكــذا
فعلهــا
بــي
فـي
صـداقتها
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فكيــف
تفعـل
ان
عـادت
مـن
اعـدائي
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امــا
وعــزة
مــن
اهـوى
علـى
علـى
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هــوني
عليهــا
وابعــادي
واقصـائي
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لــولا
خشــاتي
عليهــا
سـوء
عاقبـة
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لمـــا
يعقــب
تصــاديها
بانهــائي
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لصــلت
للوصــل
جهــرا
لا
تنهنهنــي
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زرق
الاســـنة
فــي
ايــدي
الاشــداء
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حـــتى
امـــر
حبـــالا
لا
يغيرهـــا
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طــول
التنــائي
ولا
مشــى
الانصــاء
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فـــامزجن
بروحـــي
روحهــا
فنــرى
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روحـا
بشخصـين
مـزح
الـراح
بالمـاء
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وحيثمــا
شــئت
بتنــا
فـي
مسـرتنا
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ســـرين
يكتمنـــا
حيــزوم
ظلمــاء
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لا
عيــن
الا
عيــون
الشــهب
ترقبنـا
|
ولا
لســـان
ســـوى
صـــبح
لا
فشــاء
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اف
علـى
الصـبح
مـا
دام
الوصال
فإن
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كـــان
التقــاطع
فلينعــم
بســراء
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وليهنــه
إنمــا
انــواره
اقتبســت
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مـن
نـور
مـن
فيـه
إنشـادي
وإنشائي
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