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مـا
مـن
خصـال
يبـذ
الشـم
أدناهـا
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الا
وحــاز
ذوو
ذي
الــبير
أقصـاها
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جـابوا
إليهـا
العلا
بيـدا
وعـامرة
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ورحلــوا
العيــس
وجناهـا
وفتلاهـا
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حتى
اذا
اكتسبوا
المكسوب
واقتحموا
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منهــا
الاوابــد
جيـداها
وخنسـاها
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وعشــروها
مــع
الاجنـاس
واقتطفـوا
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مــن
القـداح
الرقيبـة
مـع
معلاهـا
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فحـاز
اسـودهم
سود
المكارم
واستقل
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امرهـــــم
عنـــــه
بحمراهـــــا
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همــوا
بباقيــة
الاخــرى
وعقباهـا
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راميــن
فانيــة
الــدنيا
وعجلاهـا
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فهـذبوا
انفسـا
قـد
طـال
مـا
جمحت
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الــى
هواهـا
فردوهـا
عـن
اهواهـا
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مـن
كـل
ابلـج
يغشى
الصعب
مستقبلا
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صمصـام
عـزم
سـيوف
الهنـد
اخزاهـا
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بــه
يقطــع
اعنــاق
الصــعاب
ولا
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تغنيـه
اعناقهـا
عـن
قطـع
احشـاها
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تخـالهم
عنـد
حفـر
البير
حين
ونوا
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ودومــت
مــن
شـموس
الحـر
حيراهـا
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صـحابة
المصـطفى
فـي
حفـر
خنـدفهم
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ايــام
حــان
مـن
الاحـزاب
لقياهـا
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فالجـــد
جــدهم
والخلــق
خلقهــم
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والطـرق
قـد
سـلكوا
كالصـحب
مثلاها
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نــالتهم
عنــد
حفـر
الـبير
مغبـة
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والصـــحب
نــالهم
اذ
ذاك
مثلاهــا
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حــتى
طـوى
خيـر
عـدنان
علـى
ججـر
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كشـحا
ولـو
شاء
دنياها
فاق
كسراها
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فلـم
تجـد
جـزع
الضـراء
بـل
صـبرا
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عنــد
انتيــاب
خطـوب
قـل
اكفاهـا
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كـذاك
مـن
رام
ان
يسـمو
ومـا
وجدت
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فضــلا
علــى
ضـمر
الامعـاء
شـبعاها
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وفيهــم
ســيد
ايضـا
وهـو
مـاهرهم
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كخيـــر
فـــارس
ســلمان
واعلاهــا
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فـالله
يجزيهـم
خيـر
الجـزا
ولهـم
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يعفــو
الجـرائر
صـغراها
وكبراهـا
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واللــه
يكفيهـم
شـر
العـدا
ولهـم
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يــولى
الحـوائج
اقصـاها
وادناهـا
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واللـه
يقضـى
لنـا
الحوجـا
بجاههم
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مـا
كـان
فـي
هـذه
مقيهـا
واخراها
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