|
فلـن
ينسـى
النـبي
لـه
صـنيعاً
|
عشــية
ودع
الــبيت
الحرامــا
|
|
عشــية
سـامه
فـي
اللَـه
نفسـاً
|
لغيــر
اللَـه
تكـبر
أن
تسـاما
|
|
فأرخصــها
فــدىً
لأخيــه
لمــا
|
تســجى
فــي
حظيرتــه
ونامــا
|
|
وأقبلــت
الصــوارم
والمنايـا
|
لحــرب
اللَـه
تنتحـم
انتحامـا
|
|
فلــم
يــأبه
لهـا
أنفـاً
علـيٌّ
|
ولــم
تقلــق
بجفنيــه
منامـا
|
|
ومـا
زأمـوا
الفـتى
ولـرب
بأس
|
لهـم
يقضـي
بـه
الليث
ازدئاما
|
|
وأغشـى
اللضـه
أعينهـم
فراحـت
|
ولـم
تـر
ذلـك
البـدر
التماما
|
|
عمـوا
علـى
أحمـدٍ
ومضـى
نجيـاً
|
مــع
الصــديق
يــدرع
الظلامـا
|
|
وغــادرت
البطــاح
بــه
ركـابٌ
|
إلـى
الـزوراء
تعـتزم
اعتزاما
|
|
وفــي
أم
القــرى
خلــى
أخـاه
|
علـى
وجـدٍ
بـه
يشـكوا
الأوامـا
|
|
أقــام
بهــا
ليقضـيها
حقوقـاً
|
علــى
طــه
بهـا
كـانت
لزامـا
|
|
فــإن
يـك
عهـده
فيهـا
وبـالا
|
علـى
الطـاغوت
أو
داءا
عقامـا
|
|
فكــم
طــابت
بــه
للحـق
نفـس
|
بطيبــة
حيــن
أوطنهـا
مقامـا
|
|
وكـم
شـهدت
لـه
الـزوراء
يوماً
|
وكـم
حمـد
الحنيـف
لـه
مقامـا
|
|
فسـائل
فـي
المـواطن
عن
فتاها
|
إذا
حبكــت
عواصـفها
القتامـا
|
|
وخيـل
اللَـه
فـي
الجلبـات
شعثٌ
|
تـدك
السـهل
أو
تطـس
الرضـاما
|
|
ســل
الرايـات
كـم
راءت
عليـاً
|
يصـرف
تحتهـا
الجيـش
اللهامـا
|
|
كــأني
بـابن
عتبـة
يـوم
بـدر
|
يعــاني
تحــت
مجثمــه
جثامـا
|
|
ولـو
علـم
الوليـد
بمـن
سيلقي
|
لألقــى
قبــل
مصــرعه
السـلاما
|
|
رويـد
بنـي
ربيعـة
قـد
ظلمتـم
|
بنـي
الأعمـام
والرحـم
الحراما
|
|
وصـــلناكم
بهــا
وقطعتموهــا
|
فكـان
الحزم
أن
تردوا
الحماما
|
|
فهــل
ينســون
للفرقـان
يومـاً
|
ســقاهم
مــن
صـوارمنا
سـماما
|
|
لقـد
ظنوا
النظنون
بنا
فخابوا
|
وكــان
عليهــم
يومــاً
عقامـا
|
|
وهــل
وجــدوا
كفِـتيَتِهِم
عليّـاً
|
إذا
لبسـوا
القـوانس
والعماما
|
|
ومـا
صـهر
النـبي
إذا
تنـادوا
|
كمــن
يـدعو
ربيعـة
أو
هشـاما
|
|
ومـن
تهـدى
البتـول
لـه
عروساً
|
بنـى
فـي
النجـم
بيتاً
لا
يسامى
|
|
بــأمر
اللَــه
زفوهــا
إليــه
|
عشـــية
راح
يخطبهــا
وســاما
|
|
كـــأني
بـــالملائك
إذ
تــدلت
|
بصـحن
الـبيت
تزدحـم
ازدحامـا
|
|
فلـو
كشـف
الحجـاب
رأيـت
فيـه
|
جنــود
اللَـه
تنتظـم
انتظامـا
|
|
أطــافوا
بــالحظيرة
فــي
جلال
|
صــفوفاً
حــول
فاطمــةٍ
قيامـا
|
|
تفيــض
علــى
منصــتها
وقـاراً
|
وتكســو
حســن
طلعتهـا
وسـاما
|
|
فلا
يحـــزن
خديجــة
أن
تــولت
|
ولــم
تبلــغ
بجلوتهـا
مرامـا
|
|
تولاهــا
الــذي
ولــى
أباهــا
|
رســـالته
وزوجهـــا
الإمامــا
|
|
قـــران
زاده
الإســـلام
يمنــاً
|
وشــملٌ
زاده
الحــب
التئامــا
|
|
فمـا
تبعـا
الفتـوة
وهـي
عـذر
|
بمـا
اعتـادا
من
التقوى
لزاما
|
|
ولـــم
يشــغلهما
حــل
ولكــن
|
بركــن
الـبيت
للصـلوات
قامـا
|
|
فـإن
تـك
خيـر
مـن
عقدت
إزاراً
|
وأكــرم
مــن
تلثمـت
اللثامـا
|
|
فمـا
شـغلته
عـن
خـوض
المنايا
|
إذا
التطمـت
زواخرهـا
التطاما
|
|
فسـائل
عنـه
فـي
أحـد
العوالي
|
وقـد
حـاك
العجـاج
بهـا
وآمـا
|
|
وجــاءت
فــي
زمازمهــا
قريـش
|
يهـــزون
المثقــف
والهــذاما
|
|
فقطــر
كبشــها
وهــوى
صـريعاً
|
علـى
الـدقعاء
يلتهـم
الرغاما
|
|
هــوى
مـن
تحـت
رايتهـم
فخـرت
|
بــأم
الأرض
ترتطــم
ارتطامــا
|
|
فويــح
المسـلمين
هنـاك
ولّـوا
|
فـــراراً
لا
أســميه
انهزامــا
|
|
كــآدم
إذا
عصــى
والأمـر
حتـم
|
جـــرى
أزلاً
فأخطــأ
واســتلاما
|
|
كلا
الفعليـــن
صــاحبه
كريــم
|
وإن
قضـــت
الخطيئة
أن
يلامــا
|
|
فــأرجف
بــالنبي
هنــاك
قـوم
|
تعــادوا
حــول
مـوقفه
حيامـا
|
|
تــداعوا
حــوله
ولهــم
عـواء
|
كمــا
نبهــت
مـن
سـنة
فـداما
|
|
فلمــا
غــاب
عــن
عينـي
علـى
|
وعــاد
بيــاض
نورهمـا
سـحاما
|
|
أتــى
الشـهداء
مفتقـداً
أخـاه
|
لعــل
المـوت
عـاجله
اخترامـا
|
|
أخــي
بـأبي
يخبـم
يفـر
حاشـى
|
أخـي
فـي
الخطب
جبناً
أو
خياما
|
|
أم
اجـترأت
عليـه
يـد
العوادي
|
فغــالته
اجــتراء
واجترامــا
|
|
كــأني
بالرجــام
تقـول
وحيـاً
|
رسـول
اللَـه
لـم
يـرد
الرجاما
|
|
لعـــل
اللَــه
أصــعده
إليــه
|
ليبعثـــه
بحضـــرته
مقامـــا
|
|
إذا
رفــع
الإلــه
نــبي
قــومٍ
|
فأنـــــذرهم
بلاءً
واصــــطلاما
|
|
فـبئس
العيـش
بعـدك
يـابن
أمي
|
ســئمت
العيـش
والـدنيا
سـآما
|
|
وحطــم
غمــده
وهــوى
إليهــم
|
هــوى
البـاز
يعتبـط
الحمامـا
|
|
فطــاروا
عـن
مـواقفهم
شـعاعاً
|
وطــاحوا
فـي
مصـارعهم
حطامـا
|
|
وألفــى
ثـم
أحمـد
فـي
رحاهـا
|
بجنـد
الكفـر
يصـطدم
اصـطداما
|
|
فـذاك
ولـو
تـرى
إذ
جـاب
قـوم
|
علــى
الإسـلام
خنـدقه
اقتحامـا
|
|
وأقبـل
فـي
لبـاس
البـأس
عمرو
|
يزيــد
علــى
مخيلتــه
عرامـا
|
|
يــدافع
نفســه
ولهــا
غطيــط
|
حـذار
المـوت
تنتهـم
انتهامـا
|
|
ردى
حســبي
هنــاةٌ
يــوم
بـدر
|
بهــا
ألبســتني
ذمّــاً
وذامـا
|
|
لقـد
أكلـت
نسـاء
الحـي
عرضـي
|
فلا
لحمـــاً
تركــن
ولا
عظامــا
|
|
ملــن
بطــاح
مكـة
بـي
حـديثا
|
مســخن
بــه
منـاقبي
القـداما
|
|
يقلـن
ومـا
دريـن
مكـان
عمـرو
|
وشـهب
المـوت
ترجمـه
ارتجامـا
|
|
قضــى
تسـعين
يختـدم
المنايـا
|
فتســعى
تحـت
صـارمه
اختـداما
|
|
يطيـح
المجـر
إن
قيـل
ابـن
ود
|
وتســتن
الضــراغمة
انهزامــا
|
|
فلمــا
شــام
بارقـة
المواضـي
|
ببــدرٍ
خــار
مـن
فـرق
وخامـا
|
|
ستنســـيهن
ماضــية
المخــازي
|
وتبهرهـــن
أحــداثي
إذا
مــا
|
|
فويحــك
أقـدمي
يـا
نفـس
إنـي
|
خلقــت
لكــل
مقدمــة
قــدامى
|
|
أمــام
وهـل
أمـامي
غيـر
كـأس
|
تـدور
بهـا
الندامة
لا
الندامى
|
|
ويــا
مهــري
مجالـك
دون
سـلع
|
هلاً
فالمجــد
إن
تمضــي
أمامـا
|
|
فجــال
منــازلاً
ودعــا
مــدلّاً
|
فغـم
الهـول
حيـن
دعـا
وغامـا
|
|
يشــول
بــأنفه
أنفــا
ومحكـا
|
كمــا
تشــكوا
مزنمــة
صـداما
|
|
نـزال
بنـي
الهـدى
هـل
من
كميٍّ
|
يسـوم
الخلـد
بـالنفس
استياما
|
|
يرددهــا
فيحجــم
عنــه
قــوم
|
وإن
كـانوا
القسـاورة
الكراما
|
|
هنالـك
لـو
تـرى
الكـرار
لمـا
|
تصـــبب
فــي
حميتــه
جمامــا
|
|
إذا
مــا
هــم
أقعــده
أخــوه
|
وزاد
إلـى
اللقـاء
جـوى
فقاما
|
|
مكانــك
يـا
علـي
فـذاك
عمـرو
|
وإن
لكـــل
ذات
جنــىً
جرامــا
|
|
فقــال
وإن
يكـن
عمـراً
فـدعني
|
رســول
اللَـه
أجلمـه
الحسـاما
|
|
تقلـد
ذا
الفقـار
وقـام
يرغـو
|
رغـاء
الفحـل
يعتلـك
اللغامـا
|
|
يحـــدث
نفســه
ولهــا
أجيــج
|
ببــأس
اللَـه
يضـطرم
اضـطراما
|
|
ومـا
عمـروا
ومن
أنا
ما
غنائي
|
إذا
لـم
أرو
منـه
صـدىً
وهامـا
|
|
فلـم
يـك
غيـر
أن
فلـق
ابن
ود
|
وخـاض
السـيف
فـي
دمـه
وعامـا
|
|
وعـاد
إلـى
النـبي
يفيـض
بأسا
|
ويزخــر
فــي
حميتــه
جمامــا
|
|
وراح
الكفــر
يرجــف
جانبــاه
|
وأمســى
عضــب
عزتــه
كهامــا
|
|
وســائل
يــوم
خيـبر
عـن
علـى
|
تجــد
فيهــا
مــآثره
جســاما
|
|
إذ
الرايــات
فـي
جهـد
عليهـا
|
تعاصـي
الفتـح
وانبهم
انبهاما
|
|
وقــامت
للهيــود
بهــا
جنـود
|
رزمــن
علــى
معاقلهـا
رزامـا
|
|
وظنـوا
فـي
الحصـون
ظنـون
صادٍ
|
يشـيم
علـى
الصـدى
سحبا
جهاما
|
|
فأقيــل
بالعقــاب
علـى
خميـس
|
يــدق
بـه
المراجـم
والرجامـا
|
|
فشــد
علــى
مناكبهــا
وثاقـا
|
ولــف
علــى
معاطســها
خطامـا
|
|
ولـم
تغـن
الحصـون
ولا
الصياصي
|
وإن
قـام
الحديـد
لهـا
دعامـا
|
|
فثـــاروا
للأســنة
والمواضــي
|
ودوى
الهــول
بينهــم
ودامــا
|
|
وأقبـل
مرحـبٌ
فـي
البـأس
يحبو
|
وكــان
البـأس
صـاحبه
الأزامـا
|
|
يميـل
إذا
انتمـى
صـلفاً
وكبرا
|
كراكــب
لجــةٍ
يشـكو
الهـداما
|
|
ألـم
أك
مرحبـاً
يـوم
التنـادي
|
إذا
مـا
الليـث
مـن
فـزع
ألاما
|
|
ألســـت
لآل
إســـرائيل
غوثــا
|
إذا
نشـدوا
بـي
البطل
الهذاما
|
|
ومـا
علـم
الفـتى
أن
المنايـا
|
خططـن
بـذي
الفقـار
لـه
مناما
|
|
وأن
لــه
مــن
الكــرار
يومـاً
|
عبــوس
الجــو
يحتبـك
الإيامـا
|
|
سـلا
ابـن
الخيبريـة
يـوم
وافى
|
وليــث
اللَــه
يرقبــه
رعامـا
|
|
ضـفا
حلـق
الحديـد
عليـه
مثنى
|
وظــاهر
فـوق
بيضـته
الرخامـا
|
|
ولـم
أرى
قبـل
مرحـب
مـن
كمـي
|
يثنـي
فـي
الـوغى
سـيفاً
ولامـا
|
|
فشــد
علـى
الإمـام
بـذي
سـطام
|
نضــاه
لكــل
جامحــة
ســطاما
|
|
فــزال
مجــن
حيــدر
لا
لــوهن
|
ولا
ضـــعفت
لمحملـــه
ســـلامي
|
|
ومـــا
بطرفــه
فــإذا
رتــاجٌ
|
هنـــاك
تخـــاله
جبلاً
تســامى
|
|
فســل
يســراه
كيــف
تلقفتــه
|
وقــد
أعيــا
تحملـه
الفئامـا
|
|
يقلبــه
بهــا
ترســاً
ويغشــى
|
بيمنــاه
الفـتى
موتـاً
زؤامـا
|
|
علاه
بضـــربة
لـــو
أن
رضــوى
|
تلقاهــا
لعــاد
بهــا
هيامـا
|
|
فلــم
يعصــمه
مـن
حيـن
رخـامٌ
|
ولـم
يجـد
الحديـد
لـه
عصـاما
|
|
وليــس
أخـو
اللئام
وإن
تزكـى
|
لسـيف
اللَـه
فـي
الهيجا
لئاما
|
|
رأى
بـان
الخيبريـة
كيـف
لاقـى
|
بحيــدر
ذلــك
الأسـد
الرزامـا
|
|
وعـــادت
خيـــبر
للَـــه
فيئاً
|
يقســم
فــي
كتـائبه
اقتسـاما
|
|
فـدع
عنـك
المـواطن
والمغـازي
|
ومـن
سـل
الظبـا
فيهـا
وشـاما
|
|
فجبــه
للظغــاة
بهــا
وجوهـاً
|
وجـــدع
للظلال
بهـــا
حثامــا
|
|
ومـن
أجـرى
عتـاق
الخيـل
قبّـاً
|
فأوطأهــا
المتـالع
والحثامـا
|
|
يخــوض
بهـا
المـواطن
معلمـات
|
ونصــر
اللَـه
كـان
لهـا
علامـا
|
|
فمــا
وجــدت
كحيــدرةٍ
إمامـا
|
غــداه
الـروع
يقـدمها
إدامـا
|
|
وســل
أهـل
السـلام
تجـد
عليّـاً
|
أمــام
النـاس
يبتـدر
السـلاما
|
|
حــوى
علـم
النبـوة
فـي
فـؤاد
|
طمــا
بــالعلم
زخـاراً
فطامـا
|
|
ســقاه
الحـق
أفـواق
المعـاني
|
وهيمـــه
بـــه
حبّــاً
فهامــا
|
|
وزوده
اليقيـــن
بــه
فكــانت
|
أفــاويق
اليقيــن
لـه
قوامـا
|
|
رمـى
فـي
عـالم
الأنـوار
سـبحاً
|
إلــى
ســوح
الجلال
بـه
ترامـى
|
|
ونفسـاً
لـم
تـذق
طعـم
الدنايا
|
ولا
لــذت
مــن
الـدنيا
طعامـا
|
|
غـذاها
الـدين
مـذ
كـانت
فشبت
|
علـى
التقـوى
رضـاعاً
وانفطاما
|
|
ونشـــأها
علــى
كــرم
وأيــد
|
وصــاغ
مـن
الجلال
لهـا
قوامـا
|
|
زكـت
فسـمت
عـن
الـدنيا
طلابـا
|
وأضــنى
حبهــا
قومــاً
وتامـا
|
|
طـوى
عنهـا
علـى
الضـراء
كشحاً
|
وعــاف
نضــارها
تـبراً
وسـاما
|
|
ووجهــاً
فـاض
نـور
اللَـه
فيـه
|
فألبســه
المهابــة
والقسـاما
|
|
يــروع
الليــث
منظـره
عبوسـاً
|
ويخجـل
ضـاحك
الغيـث
ابتسـاما
|
|
تـــرى
فيــه
مخايــل
خنــدفيٍّ
|
يســيما
الحـق
يـزدان
اتسـاما
|
|
وفيــض
يـدٍ
مـن
الوسـمي
أنـدى
|
إذا
الحـي
اشـتكى
سـنةً
أزامـا
|
|
علــى
حــب
الطعـام
يصـد
عنـه
|
ليطعمــه
الأرامــل
واليتــامى
|
|
ســل
القـرآن
أو
جبريـل
تعلـم
|
مكـارم
لـن
تبيـد
ولـن
ترامـا
|
|
مــن
الأبــرار
يغتبقـون
كأسـاً
|
مــن
الرضــوان
مترعـةً
وجامـا
|
|
علـــي
والبتـــول
وكوكبـــاه
|
ضــياء
الأرض
إن
أفــق
أغامــا
|
|
ثنــاءٌ
فـي
الكتـاب
لـه
عـبيرٌ
|
تقصــر
عنــه
أرواح
الخزامــى
|
|
وكـم
أجـرى
علـى
المحراب
دمعاً
|
لخــوف
اللَـه
ينسـجم
انسـجاما
|
|
إذا
مـا
قـام
في
المحراب
قامت
|
لــه
زمــر
الملائكـة
احتشـاما
|
|
صــلاة
الليــل
يجعلهـا
سـحوراً
|
إذا
ما
في
الغداة
نوى
الصياما
|
|
تــرى
صـبر
القنـوع
لـه
غـذاءً
|
جـرى
دمـع
الخشـوع
لـه
إدامـا
|
|
رأينـا
فـي
الكهولـة
منه
شيخاً
|
حـوى
المجـد
اشـتمالاً
واعتماما
|
|
فمـا
للـدهر
لـم
يعـرف
حقوقـاً
|
لــه
شــيخاً
ولـم
ينكـر
ظلامـا
|
|
خليلـــي
أربعـــاً
وتنظرانــي
|
ضــللت
القـول
لا
أجـد
الكلامـا
|
|
ومـا
أنـا
بالمغلب
في
القوافي
|
ولا
حصـراً
بهـا
يشـكو
الفحامـا
|
|
ولكـــن
الزمــان
لــه
صــروف
|
يعــود
المفلقـون
بهـا
فـداما
|
|
سـحبا
ليـل
الحـوادث
بعـد
طـه
|
فعــم
الــدين
والـدنيا
ظلامـا
|
|
وحلـــت
بالخلافـــة
مـــرزئات
|
طـواحن
تحتسـي
النـاس
التهاما
|
|
اهبــن
بهـا
فمـا
أجليـن
حـتى
|
رأيــت
حبيكهـا
سـال
انثمامـا
|
|
قواصـم
علـى
ظهـر
الـدين
عنها
|
ولـولا
اللَـه
لا
نقصـم
انقصـاما
|
|
أرى
الإسـلام
يـوم
الـدار
يبكـي
|
شـهيد
الـدار
إذ
ورد
الحمامـا
|
|
وكــانت
فتنــة
فيهـا
اسـتحلت
|
ســيوف
المـارقين
دمـاً
حرامـا
|
|
أحــاطت
بالمدينــة
يـوم
نحـس
|
زعــانف
منهــم
تقفـوا
لئامـا
|
|
فلــم
يعــروا
لإمرتــه
عهـوداً
|
ولــم
يخشــوا
لغيلتـه
أثامـا
|
|
مضــى
عثمــان
والإســلام
يـذرى
|
عليـــه
الــدمع
منهلّاً
ســداما
|
|
فــزن
أبـا
الحسـين
بـه
فريـقٌ
|
ولجـوا
فـي
الظنـون
به
اتهاما
|
|
وحاشــى
أن
يريــد
أبـو
حسـين
|
بـذي
النـورين
سـوءاً
أو
ظلامـا
|
|
علـــيٌّ
كــان
أول
مــن
وقــاه
|
ومــن
ذاد
الـردى
عنـه
وحـامى
|
|
فيــا
لـك
فتنـةً
ضـرمت
فكـانت
|
نفــوس
المسـلمين
لهـا
ضـراما
|
|
رأيــت
شــرارها
ينتـاب
مصـرا
|
ومكـــة
والجزيــرة
والشــآما
|
|
رمــت
بالمســلمين
إلـى
شـتاتٍ
|
وأمســى
حبــل
وحـدتهم
رمامـا
|
|
طـــوائف
فرقتهـــن
المرامــي
|
ولـولا
الحـق
ما
افترقوا
مراما
|
|
فمنهــم
مـن
أقـام
بكسـر
بيـتٍ
|
وأخلــد
للســكينة
فاســتناما
|
|
وطائفــة
علــى
الحـق
اسـتقرت
|
فكــانت
بيــن
إخوتهـا
قوامـا
|
|
تبــايع
وهــي
راضــيةٌ
عليّــاً
|
وترعــى
فــي
خلافتـه
الـذماما
|
|
وطائفــةٌ
نضــت
للحــق
ســيفاً
|
ولمــا
تســتبن
فيــه
إمامــا
|
|
فلمــا
حصــحص
انقلبــت
إليـه
|
ونــادت
بالإمــام
لهـا
إمامـا
|
|
وقــرت
فــي
أكنتهـا
المواضـي
|
وقــال
الفيلقــان
لهـا
سـلاما
|
|
ولـولا
الحـق
لـم
تحلـل
عقـالا
|
ولــم
تشـدد
علـى
جمـل
قرامـا
|
|
وأخـرى
أوضـعت
فـي
الخلف
تغلو
|
ولــم
تحـذر
عـواقبه
الوخـامى
|
|
رضــوا
بالســيف
لمــا
حكمـوه
|
فقـام
السـيف
بـالأمر
احتكامـا
|
|
وأقبلـت
الجيـاد
الجـرد
تعـدو
|
علـى
الآكـام
تحسـبها
النعامـا
|
|
تــزوف
بهــا
كتــائب
معلمـات
|
وقـد
غـص
الفضـاء
بهـا
زحامـا
|
|
زواحــف
ثــم
مــن
شـرق
وغـرب
|
فـرادى
فـي
الأباطـح
أو
تؤامـا
|
|
إلــى
صــفين
تحشــدها
منايـا
|
تجــن
إلــى
مواردهــا
هيامـا
|
|
أقـام
المـوت
فـي
صـفين
سـوقا
|
وأرخصـــت
النفـــوس
ســـواما
|
|
تـرى
مضـراً
تـبيع
بهـا
نـزارا
|
ولخمــاً
تســتبيح
بهـا
جـذاما
|
|
ألا
صــلى
الإلــه
علــى
نفــوس
|
تـرى
فـي
الحـق
مصـرعها
لزاما
|
|
تمــوت
علــى
منازعهـا
كرامـا
|
فتحيــا
فــي
منازعهـا
كرامـا
|
|
فلمـا
كـاد
حكـم
السـيف
يمضـي
|
وولـى
الجمع
واستبقوا
الخياما
|
|
أنـاب
إلـى
الكتـاب
دهاء
عمرو
|
دهــاء
يأكـل
السـيف
الحسـاما
|
|
وأقبلـــت
المصــاحف
مشــرعاتٍ
|
يهلـل
تحتهـا
الجيـش
ارتسـاما
|
|
إلـى
حكـم
الكتـاب
دعوا
أخاهم
|
ليرتسـموا
بمـا
حكـم
ارتسـاما
|
|
ومـا
هيـم
بالكتـاب
أبـر
منـه
|
ولا
أولــى
بحكمتــه
انتمامــا
|
|
عبـاب
البحـر
تنقـص
منـه
قدرا
|
إذا
شـــبهته
قلبـــاً
ذمامــا
|
|
ولكــــن
حيلــــةٌ
جـــرت
بلاء
|
علــى
الـدنيا
وأيامـاً
وخامـا
|
|
إذ
الحكمــان
بــالأمر
اسـتقلا
|
فليتهمـا
علـى
النهـج
استقاما
|
|
لقـد
قرنـوا
أبـا
موسـى
بعمرو
|
ومـا
أدراك
مـا
عمـرٌو
إذا
مـا
|
|
أرى
فحلاً
يقـــــاس
بــــه
حلامٌ
|
وكيــف
تقيــس
بالحـل
الحلامـا
|
|
مضـى
الحكمـان
مـا
حسـما
خلافا
|
ولا
فضـــّا
لمشـــكلةٍ
ختامـــا
|
|
أميــر
المــؤمنين
أرى
زمانـا
|
لحربــك
هــز
مخــذمه
وشــاما
|
|
وأقبـل
بالوفـاء
علـى
ابن
حرب
|
يصــافيه
المــودة
والوئامــا
|
|
ولـم
يـك
بالإمامـة
منـك
أولـى
|
وإن
هــو
فــي
أرومتـه
تسـامى
|
|
ولكـن
شـيبة
الحمـد
بـن
عمـرو
|
إذا
اسـتبقوا
المكارم
لا
يسامى
|
|
فمــا
نقمــت
أميـة
منـك
حـتى
|
تناصــبك
العــداء
والانتقامـا
|
|
بلــى
إن
الزمــان
لفــى
ضـلال
|
لـوى
فـي
الحق
وانتهك
الذماما
|
|
طـوى
السـلف
الكـرام
وجاء
قومٌ
|
فكـانوا
بعـد
مـا
سلفوا
قماما
|
|
إذا
أخــذ
الإمــام
بـأمر
حـزمٍ
|
رأيـت
الخلـف
والـرأى
الكهاما
|
|
زهـاهم
زخـرف
الـدنيا
فهـاموا
|
مـع
الشـيطان
بالـدنيا
غرامـا
|
|
وليــس
لطــالب
الــدنيا
دواءٌ
|
إذا
كـانت
لـه
الـدنيا
سـقاما
|
|
رمــى
بــالخرق
أقــوامٌ
عليّـاً
|
وهـم
أولـى
بمـا
زعموا
اتصاما
|
|
فمـا
شـهد
الزمـان
لـه
سـفاهاً
|
ولا
نكــروا
لــه
رأيـاً
عقامـا
|
|
ولكــن
القريــن
السـوء
يلـوى
|
فيقتضـــب
الأزمــة
والخزامــا
|
|
أبـى
أهـل
العـراق
سـوى
لجـاج
|
أرث
الحبــل
فانجـذم
انجـذاما
|
|
ولــوَّوا
عـن
أبـي
حسـنٍ
رؤوسـاً
|
كــأن
بهـا
لمـا
كسـبت
جحامـا
|
|
تــرى
بـالكوفتين
لهـم
عديـدا
|
إذا
أمنــوا
واجرامــا
جرامـا
|
|
وإن
حربـوا
أراك
الـروع
منهـم
|
نعــام
الـدو
يعتسـف
النعامـا
|
|
قلــوبٌ
مــا
طـوين
سـوى
نفـاق
|
طــوى
مـن
تحتـه
هممـاد
مامـا
|
|
يطيـش
أخـو
السـداد
بهم
سهاما
|
وإن
كـــانت
مســـددة
لؤامــا
|
|
ولا
يغنــي
الأريــب
حجــا
ورأى
|
إذا
قــاد
الأســافل
والطغامـا
|
|
علمنــا
رأيــه
فلقــا
مبينـا
|
لـه
نهـج
علـى
الحـق
اسـتقاما
|
|
رأى
ورأوا
فســد
ومـا
أصـابوا
|
وأيقــظ
حزمــه
وجثـوا
نيامـا
|
|
فمــا
فتحــوا
لمغلقـةٍ
وصـيداً
|
ولا
ســـبؤوا
لمفدمــةٍ
فــداما
|
|
فلمـا
أمعنـوا
فـي
الخلف
عدواً
|
وألقــوا
دون
طـاعته
الكمامـا
|
|
أصـــاخ
إليهــم
ورأى
خروجــا
|
عـن
الشـورى
وإن
سـفهت
حرامـا
|
|
كـــذلك
كـــان
أدبــه
أخــوه
|
فسـار
بهـم
يـؤد
بهـم
علـى
ما
|
|
هـي
الشـورى
نظام
الملك
إن
لم
|
تقـم
سـنداً
لـه
فقـد
النظامـا
|
|
وكــانت
ســنة
الإســلام
قــدما
|
بهــا
كتـب
السـعادة
والسـلاما
|
|
فلا
تلــم
الإمــام
بهــا
تحـدى
|
وضــل
النـاس
منهجـه
القوامـا
|
|
فــأكبر
همــه
مــذ
كـان
طفلاً
|
حــدود
اللَـه
يحـرص
أن
تقامـا
|
|
يــذل
لعزهــا
نفســاً
ويرضــى
|
لـدفع
الضـيم
عنهـا
أن
يضـاما
|
|
فليتهــم
وعــوا
خطبـاً
أتتهـم
|
ضــوافي
تســمع
الصـم
السـلاما
|
|
ســـوابغ
نســـج
أروع
هاشــمي
|
سـما
ملـك
البيـان
بـه
وسـامى
|
|
إذا
ابتـدر
المقالـة
يـوم
خطب
|
وهــز
علــى
منصـتها
الحسـاما
|
|
أصـاخ
النجـم
أبرقـت
المواضـي
|
تلمســـت
الضــراغمة
الأجامــا
|
|
إذا
مــا
رن
صـوت
الحـق
فيهـا
|
تـولى
الإفـك
وانحطـم
انحطامـا
|
|
وليـت
القـوم
إذ
مردوا
أنابوا
|
لحكمتـــه
صــحاباً
والتزامــا
|
|
كأهـل
الشـام
مـا
حجمـوا
بخلفٍ
|
معاويـــة
ولا
نبــذوا
حجامــا
|
|
تراهــم
تحــت
رايتــه
خفافـاً
|
كمـا
تزجـي
الصـبا
سحباد
ماما
|
|
إذا
قـال
الـثرى
ملأوا
الموامي
|
وإن
قـال
الـذرى
علوا
النعاما
|
|
وإن
ســئلوا
الكريهـة
أرثوهـا
|
وإن
سـيموا
الردى
قالوا
نعامى
|
|
رمـى
أهـل
العـراق
بهم
فقاموا
|
بطــاعته
ومــا
سـخطوا
قيامـا
|
|
بنـى
الشـامات
ويحكـم
أفيقـوا
|
علام
تنكـــب
الحســـنى
علامــا
|
|
ظلمتــم
ســيد
الأبــرار
لمــا
|
ركبتــم
فـي
عـداوته
الثمامـا
|
|
سـلوا
الصـديق
والفـاروق
عنـه
|
كـم
اعتصـما
بحكمتـه
اعتصـاما
|
|
وكــم
وردا
لــه
رأيـاً
نجيحـاً
|
وكــم
ســلكا
بـه
سـبلاً
قوامـا
|
|
بنــى
الشـامات
ويحكـم
شـققتم
|
عصـا
الإسـلام
فانقسـم
انقسـاما
|
|
مــددتم
للخــوارج
حبــل
خلـف
|
بـه
شـدوا
إلـى
الفتن
الحزاما
|
|
فيـا
قتـل
الخـوارج
يـوم
جروا
|
علــى
الإســلام
داهيــةً
دهامـا
|
|
أثـاروا
فـي
العراق
لها
قتاما
|
سـجا
فـدجا
بـه
الكون
اقتماما
|
|
ثلاثــة
أكلــب
لبســوا
بليــل
|
ثيـاب
الغدر
واحتزموا
احتزاما
|
|
لقــد
مــردت
بفاجرهــا
مـرادٌ
|
علـى
العـدوان
لا
بلغـت
مرامـا
|
|
جـرى
طيـر
ابـن
ملجمهـا
علينا
|
غـراب
الـبين
والفـأل
اللجاما
|
|
كــأني
بــالخبيث
حمــار
سـوء
|
يعــاني
مــن
وساوســه
حمامـا
|
|
عشــية
بــات
يعســل
فـي
دروب
|
تعـــاوره
ملاعنهــا
التقامــا
|
|
تزيــن
لـه
الخنـى
نفـس
عقـام
|
غلـت
فـي
حمـأة
الشـر
اعتقاما
|
|
ألا
تبــت
يــدٌ
بالغــدر
ثـارت
|
تمــد
إلــى
أبـي
حسـن
حسـاما
|
|
لــو
أن
السـيف
يعلـم
أي
نفـسٍ
|
أراد
لمـات
فـي
الغمد
انشياما
|
|
لـو
أن
السـيف
كـان
لـه
خيـارٌ
|
لعــرد
عنــه
وانثلـم
انثلامـا
|
|
لـو
أن
السـيف
كـان
لـه
خيـارٌ
|
مضـى
فـي
قلـب
ملعـون
اليتامى
|
|
ولكــن
القضــاء
جــرى
بــرزءٍ
|
لـه
انحلـت
عرى
الصبر
انفصاما
|
|
فبعـداً
لابـن
ملجـم
يـوم
يـأتي
|
يجــر
بردغـة
الخبـل
اللجامـا
|
|
بــه
فجــع
المدينـة
والمصـلى
|
وزلــزل
بطــن
مكــة
المقامـا
|
|
ولـولا
الغـدر
لـم
يرفـع
جبيناً
|
لهيبتـــه
ولا
نظـــراً
أســاما
|
|
نعـى
النـاعي
أبـا
حسـن
فمالت
|
رواســي
الأرض
تنــدك
انهجامـا
|
|
نعـى
النـاعي
أبـا
حسـنٍ
فراحت
|
بـواكي
الـدين
تلتـدم
التداما
|
|
لقــد
سـلب
الحمـام
بنـي
لـؤيٍّ
|
أبـا
الإسـلام
والشـيخ
الحمامـا
|
|
بروحــي
غــرةٌ
يجــري
عليهــا
|
دم
أزكـى
مـن
المسـك
اشـتماما
|
|
جـــبينٌ
زاده
بــالموت
نــوراً
|
لقـاء
اللَـه
فـائتلق
ابتسـاما
|
|
بروحــي
إذ
يجــود
بخيـر
نفـسٍ
|
تخـاف
علـى
الحنيفـة
أن
تضاما
|
|
بنــي
العـدل
إن
شـئتم
قصـاما
|
كفــى
بكتــاب
ربكــم
إمامــا
|
|
كتــاب
اللَــه
لا
تغلــو
فـإني
|
أخـــاف
عليكـــم
ألا
يقامـــا
|
|
مضـى
زيـن
الصـحابة
فـي
سـبيل
|
إلـــى
ملإ
بجيرتــه
اســتهاما
|
|
إلــى
دار
الســلام
مضــى
علـي
|
وجــاور
فـي
منازلهـا
السـلاما
|