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رفقــاً
بقلــب
المسـتهامْ
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يـا
حُـورَ
هاتيـك
الخيـامْ
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ولقــد
رميـن
القلـب
مـن
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قــوس
اللـواحظ
بالسـهامْ
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ولقـــد
بـــرزن
بموقــف
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للعاشـــقين
بــه
زحــامْ
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لــم
تلـق
غيـر
ظبـاء
وَجْ
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رةَ
تَقْنُــصُ
الأسـد
العظـامْ
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أو
غيــر
أقمــار
السـما
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ســجدت
لأقمــار
الرَّغــامْ
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أو
غيـــر
أغصــان
الفلا
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خضــعت
لربّــات
القَــوامْ
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فهنــاك
للمُهُجـات
واللَـحَ
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ظـــاتِ
معــترك
الصــدامْ
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كيـف
الفـرار
وقـد
أحـاط
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بـذي
الهـوى
جيـش
الغرامْ
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للّـــه
وقفتنـــا
بـــوا
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دي
المنحنـى
تحـت
البشامْ
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والــبيض
تفعــل
بـالنُّهى
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كـــالبِيض
تفعــل
والملامْ
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والحســن
معقــود
اللِـوا
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يــدعو
لطــاعته
الأنــامْ
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وبمنيــر
الخــدّين
كالـدّ
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اعــي
بلالُ
الخــالِ
قــامْ
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لــم
يبــق
دمـع
أو
حشـى
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إلا
أجـــاب
هــوىً
وســامْ
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للّــــه
أيَّــــام
مضـــت
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ســقيت
بمُنْهَــلّ
الغمــامْ
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أحبابَنــا
طــال
الجفــا
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أيـن
الوفـا
أيـن
الذمامْ
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وأخـو
الوفا
في
ذا
الزما
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ن
أعـز
مـن
بَيـض
النعـامْ
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مضــت
الـدهور
ولـم
يكـن
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منكــم
لنــا
إلا
انصـرامْ
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أوَ
ليــس
للــود
القــدي
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م
لــديكم
أثــر
احـترامْ
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عطفـــاً
علـــى
مضــناكم
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فوصــالكم
عيــن
المـرامْ
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وتــداركوا
رمقـاً
تـرائى
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مــن
خيــال
مــن
ســَقامْ
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وتـــذكّروا
مــا
بيننــا
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مــن
حســن
ذاك
الالـتئامْ
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لا
تشــمتوا
الأعــدا
فحـز
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نُ
أُولي
التقى
فرح
اللئامْ
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زورُوا
دوامـــاً
أو
لِمــا
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مـــاً
أو
منامــاً
أَو
كلامْ
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فالكــل
مـن
أهـل
الصـفا
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حَســَن
إذا
صــح
الــتزامْ
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مــالي
ومــا
للـدهر
يَـرْ
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مينــي
بســهم
الاغتمــامْ
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|
أوَ
كلمـــا
جــردت
ســيْفَ
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العـــز
عــنَّ
بــه
انثلامْ
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يـــا
دهـــر
مهلاً
إننــي
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أشــكوك
للشــيخ
الهمـامْ
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الناصــر
الــدين
المفـدّ
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ى
المرتجــى
صـنو
الامـام
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فــإذا
التجــى
بفنــائه
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المخضـــر
راجٍ
لا
يضـــامْ
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كشـــاف
غُمَّــى
كــل
نــا
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زلـــةٍ
وجُلّـــى
كــل
رامْ
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إنســان
عيـن
الـدهر
لـج
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البحــر
إفرنــد
الحسـامْ
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غيـث
الـورى
ليـث
الشـرى
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سـهم
العِدا
الموت
الزؤامْ
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زَنْـــد
الامـــام
وســيفه
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ويـداه
فـي
النُوَب
الجسامْ
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هــان
النضــار
لـه
وعـزّ
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نظيـــره
بيـــن
الأنــامْ
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فـي
مفـرق
الـدهر
الأنـوف
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بنــود
عــدل
قــد
أقـامْ
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غمـر
العـدا
وأبـان
سـُبْل
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الرشـــد
وانكشــف
الظلامْ
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حمّـــال
أعبــاء
الحكــو
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مـة
قاطعـاً
دعـوى
الخصامْ
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فلقـد
تحمَّـل
مـا
يقصر
عن
|
ه
رضـــــوى
أو
شــــمامْ
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يـا
أيُّهـا
الشـيخ
المؤيَّد
|
دمــت
فــي
أعلــى
مقـامْ
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فلــك
الهنـا
صـرِفاً
بيـو
|
مِ
النحـر
والشـهر
الحرامْ
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