|
علامَ
الهمــوم
وفيــم
العنـا
|
فغايـة
هـذى
الشـخوص
الفنـا
|
|
يمــر
ســريعاً
كطيـفِ
المنـا
|
مِ
جميـع
الانـام
وتفنى
الدنا
|
|
و
تمضـي
الحـوادث
مثل
الخيا
|
لِ
وشـبه
الظلال
إذا
ما
انثنى
|
|
فهــذا
يقــول
وهــذا
يصــو
|
لُ
وكـلٌّ
مـع
العجـز
فيما
عنا
|
|
وكـم
تحـت
اذيـالِ
هذا
الترا
|
بِ
نفـوسٌ
قضـت
قبل
نيل
المنى
|
|
وقـد
يـدعي
العقـل
كل
الصنو
|
فِ
وكـم
مـدَّعٍ
هـادمٍ
مـا
بنـى
|
|
ونحـن
علـى
رأينـا
العـاقلو
|
نَ
تركنـا
الجميـعَ
إلـى
ربنا
|
|
نعـم
إننـا
فـي
جميـع
الأمـو
|
رِ
رضـينا
بما
الله
يرضى
لنا
|
|
فـإِن
شـاء
نمنـا
بمرط
الخمو
|
لِ
وإن
شاء
َ
قمنا
ببرد
السنا
|
|
وحـق
علينـا
اجتـذاب
القلـو
|
بِ
إليــه
وإشـغالها
بالثنـا
|
|
وتعليمهــا
علـم
طـه
الحـبي
|
بِ
ويسـعدُ
عبـدٌ
بَهـذا
اعتنـى
|
|
نميــل
الرجــال
إلـى
ربهـا
|
ليحيـى
العبـادُ
ويجلـى
الها
|
|
ونطــوي
بـذيل
جنـاب
الرسـو
|
لِ
ونطـوي
الزمان
وما
قد
جنا
|
|
علــى
الفقـر
فمنـا
لخلاقنـا
|
وبــالفقر
للــه
كـل
الغنـى
|
|
أخـذنا
بـاثر
النـبي
الكـري
|
مِ
فطبنــا
وطــابَ
بـه
سـرنا
|
|
وقــدماً
تـولى
بعـزم
العـرو
|
جِ
إلـى
قـاب
قوسـين
لما
دنى
|
|
وجئنـا
بنظـم
الـذين
اقتدوا
|
بــه
فجعلنـا
العلـى
رحبنـا
|
|
كشــفنا
عجــاج
خيـول
الشـؤ
|
نِ
فقـام
الزمـان
لنا
وانحنى
|
|
ونحــن
أسـاتيذ
اهـل
الكمـا
|
لِ
تسـير
لصـدر
المعـالي
بنا
|
|
ومـا
خـاب
قـط
بقصـد
السـبي
|
لِ
فـتى
ضمهث
السير
في
ركبنا
|
|
ونحــن
قلــوب
رجـال
القلـو
|
بِ
يؤيـدها
الفيـضُ
مـن
وهبنا
|
|
بنـا
اللـه
أفـرغ
سـر
الغيو
|
بِ
وايَّــدَ
فــي
غَيبـهِ
حزبنـا
|
|
فجلجلــة
الـوحي
فـي
بيتنـا
|
وأخــذ
الشــريعة
عـن
جـدنا
|
|
ونحــن
شــموس
فجـاج
البطـا
|
حـش
بـدور
المشاعر
والمنحنى
|
|
فكــل
المــآثر
فــي
فرعنـا
|
وكــل
المفــاخر
عـن
أصـلنا
|
|
وحكــم
الخـوارق
فـي
قومنـا
|
ونشــر
احقــائق
مـن
علمنـا
|
|
فـإن
كنـت
مـن
أهل
زيِّ
القبو
|
لِ
توسـَّل
بنـا
واغتنـم
عهدنا
|
|
لإن
نحنــث
متنــا
فآياتنــا
|
تقـوم
مـدى
الـدهر
من
بعدنا
|
|
فمـا
خَيَّـبَ
اللـهُ
مـن
زارنـا
|
بصـــدقٍ
ولا
رَدَّ
مـــن
أمَّنــا
|
|
أبونـا
إمـامُ
الهدى
المرتضى
|
وبضــعةٌ
نــور
الهـدى
أُمُّنـا
|
|
وحــال
نــبيِّ
الـورى
حالنـا
|
وجفــرُ
علــى
الـذرى
جفرنـا
|
|
تخيَّرنـــا
اللـــه
مــن
آدم
|
وأعلــى
بطـى
العمـا
عرقنـا
|
|
وعلَّمنــا
علــم
حكـم
الخفـا
|
وقـد
نسـج
السـر
فـي
طورنـا
|
|
فقمنـا
علـى
سـيرةِ
المصـطفى
|
وايــدنا
اللهـث
فـي
سـيرنا
|
|
فلا
ترتجــى
فـي
الـورى
أُمَّـةٌ
|
لنيـل
معـاني
الهـدى
غيرنـا
|
|
وعــول
علينـا
بعلـم
الطـري
|
قِ
وذق
مشـرب
الصدق
من
خمرنا
|
|
ففـي
خمرنـا
سـرُّ
حـالِ
الرسو
|
لِ
بحكـم
البقـاءِ
وطورِ
الفنا
|
|
وإِيـاكَ
تلـوى
إلـى
الكائنـا
|
تِ
اذا
كنـــت
ممتثلا
امرنــا
|
|
فكــم
قطعــت
واسصـلا
زلَّ
عـن
|
طريـق
الرسـوخ
فنـال
الضـنا
|
|
وسـر
وفـق
سـير
الكرام
الألى
|
لتعلـو
وتـدنو
كمـن
قـد
دنى
|
|
بُنَــيَّ
نصـحناك
خـذ
و
انتفـع
|
فتلــك
النصــيحة
منـا
لنـا
|