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هـل
أهنيـك
أم
أُهنِّـي
المعالي
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أم
أُهنِّــي
أيامنـا
والليـالي
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أم
أهنـي
الأكـوان
فهـي
جميعاً
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فــي
ســرور
ولــذة
واختيـال
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شـمس
نصر
قد
أطلع
اللّه
في
أف
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ق
المعــالي
فنورهــا
مُتلاَلِـي
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للإِمام
العظيم
ذي
الأمر
والنهي
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قريـــن
الإِســـعاد
والإِقبــال
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مــن
بَنَـى
حصـن
مجـده
بسـيوف
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وخيــول
بالرمــاح
العــوالي
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وتسـامى
لنيـل
مـا
لـم
ينلـه
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غيـره
قـط
في
القرون
الخوالي
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بـرط
مـا
أتـى
بهـا
مـن
قتيل
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أو
أسـير
فـي
عمرنا
المتوالي
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حسـبوا
أن
مجـدهم
سـور
يـأجو
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ج
ومــأجوج
مـا
لـه
مـن
زوال
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فأتــاه
الإِمـام
بالمـاس
حـتى
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خـرق
السـور
فهـو
مثل
الرمال
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إنمـا
الماس
خاتم
في
يد
المل
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ك
وسـيف
عنـد
التحـام
القتال
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ســخر
اللّــه
للإِمــام
أناسـاً
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يصــدمون
الأبطــال
بالأبطــال
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وإذا
ســـخر
الإِلـــه
أناســاً
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لســعيد
ينــال
أعلــى
منـال
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هكــذا
هكـذا
السـعادة
تـأتي
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بالــذي
لا
يمــر
يومـاً
ببـال
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مـن
يظـن
الأسـود
مـن
بـرط
يأ
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تـون
أسـرى
يمشـون
فـي
الأغلال
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ورؤوس
الــرؤوس
بطــن
شــبيك
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حملوهــا
علـى
ظهـور
الجمـال
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رفعوهــا
وذلــك
الرفـع
خفـض
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حيـن
عـادت
أبـدانهن
العوالي
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كم
أباحوا
من
كل
ما
حرم
اللّه
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وكــم
أيتمــوا
مــن
الأطفـال
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كـم
وكـم
مـن
محـارم
هتكوهـا
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واسـتباحوا
النفـوس
بـالأموال
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ولكـم
يعبثـون
بالنـاس
دهـراً
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بقبيـــح
الأفعــال
والأقــوال
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هـي
عنـدي
سـتون
عامـاً
تِبَاعاً
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ولهـــم
جنــة
مــن
الإِمهــال
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هتـك
اللّـه
بعـد
ذا
جنـة
الإِم
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هال
عنهم
لما
طغوا
في
الفعال
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هكـذا
عـادة
الإِلـه
علـى
الخل
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ق
بطــول
الإِمهــال
لا
الإِهمـال
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فــإذا
لـم
يكـن
رجـوع
إليـه
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بخضــــوع
وذلــــة
ووبـــال
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فـأرى
الـذل
قـد
تـولى
عليهم
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مـن
إلهـي
ذي
العـزة
المتعال
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ولـك
النصر
قد
توالى
من
اللّه
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تعـالى
فاشـكره
فـي
كـل
حـال
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فـأذقهم
كـأس
المنـون
وزدهـم
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ذلــة
بعــد
هــذه
فـي
نكـال
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وعلــى
المصــطفى
تـدوم
صـلاة
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وســــلام
وآلــــه
خيـــر
آل
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