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ذَكَــرَ
الحمــى
وهـديلَ
وُرْق
حمـامه
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دَنِــفٌ
لــه
كَلَــف
بعشــق
غرامــه
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وصـــبا
لــبرق
بــالأبيرق
شــامه
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فوشــى
بســرِّ
الـدمع
لمـع
ضـرامه
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لطفــت
إشــارته
فحيــن
فهمتهــا
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مــلَّ
الســفور
فــرد
فضـل
لثـامه
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فسـقى
الحيـاة
حيـا
بمدرجة
اللوى
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أبــداً
يشــب
الوجـد
بيـن
خيـامه
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ودُوَيْـــن
ملتـــفّ
الأراك
برامـــة
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ســرب
تــذود
الأســد
عــن
آرامـه
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فــالبيض
تشــهر
دون
خضـر
رياضـه
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والســمر
تهصــر
دون
زرق
جَمــامه
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صـاح
اغتنـم
خلـس
الزمـان
ولا
تدع
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فرصــاً
تمــرُّ
عليــك
مــن
أيـامه
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فــأخو
الخلاعـة
مـن
إذا
مـا
لـذة
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جـــذبته
ملكهـــا
أبــيَّ
زمــامه
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فلــربَّ
ليــل
بــات
فيـه
منـادمي
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مــن
كــان
غيــر
معــرض
بكلامــه
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صـــَعُبَتْ
رياضـــُتهُ
علــيَّ
فســُهِّلت
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بيــدي
كميـت
الـراح
صـعبَ
لجـامه
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غمـــدت
محيّاهـــا
مهنــد
جفنــه
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فطمعــت
فــي
ضــمي
لرمـح
قـوامه
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وعففـت
عنـه
مـع
الغـرام
ولم
أَشُب
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فــي
الحــبّ
صــفو
حلالـه
بحرامـه
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ومــن
الســفاهة
أن
يهــم
بريبـة
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مــن
بــات
معتصـماً
بحبـل
إمـامه
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القــائم
المستنصــر
الراقـي
ذُرا
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شــرف
يــؤمّ
الشــهب
بعـد
مرامـه
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ربّ
المشــاعر
والأباطــح
والصــفا
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والـــبيت
وارث
ركنـــه
ومقــامه
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حِبْــر
يخــبر
عنـه
بـرد
المصـطفى
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وقضــيبه
بالعــدل
فــي
أحكــامه
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مـن
لـم
يطـع
مفـروض
مـا
يأتي
به
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لـــم
ينتفـــع
بصــلاته
وصــيامه
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مــن
لـم
يسـلم
أنـه
خيـر
الـورى
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فقــد
افــترى
ووهـت
عـرى
إسـلامه
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إن
كنــت
تخشـى
فـي
معـادك
نبـوة
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فــاعلق
بمحكــم
عــدله
وذمــامه
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فكفــى
الـذي
يعطيـه
بيعـةَ
مخلـص
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فـي
الحشـر
مـا
ينحـط
مـن
آثـامه
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ذو
الجيــش
إمـا
جـاش
زاخـر
يمـه
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ملأ
الفضــــاء
ببيضـــه
وبلامـــه
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فغــدت
ملائكــة
الســماوات
العلا
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فــي
حشــدها
مــن
خلفـه
وأمـامه
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يتقيـــل
الملهــوف
تحــت
ظلالــه
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ويخيــم
المعــروف
بيــن
خيــامه
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فاســتجل
أنـوار
الهـدى
فسـكونها
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فـي
الخافقـات
السـود
مـن
أعلامـه
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اللـــه
أكـــبر
أي
نــور
نبــوة
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صــدع
الـدجى
فانجـاب
صـبح
ظلامـه
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هـذا
الـذي
انتبـه
الزمـان
لأهلـه
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بظهــوره
مــن
بعــد
طـول
منـامه
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إن
لـــم
يكــن
مهــديّ
آل
محمــد
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فقيـــامه
فـــي
عــدله
كقيــامه
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فالــدهر
بعــد
قطــوبه
وجــدوبه
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متهلــل
فــي
وجــه
مخضــب
عـامه
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جلــت
خلافــة
يوســف
بــن
محمــد
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مــا
كــان
قــد
غشـاه
مـن
آلامـه
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فاجعــل
سـلامك
بالسـجود
إذا
بـدا
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نــور
الهــدى
تلقــاء
دار
سـلامه
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ملــك
تــرى
الأملاكُ
أعظــم
فخرهـا
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تعفيــر
أوجههــا
علــى
أقــدامه
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فشــفيعها
عنــد
ازدحـام
جموعهـا
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فــي
بــابه
النبـويّ
لثـم
رَغـامه
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نســبٌ
إذا
مــا
عُــدَّ
كـان
لهاشـم
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منــه
اللبـاب
المحـض
دون
هشـامه
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يا
ابن
الذي
استسقى
الحيا
بجبينه
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عمــر
فــدر
عليــه
خلــف
غمـامه
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غاضـــت
ينــابعه
ففجــر
ماءهــا
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بعــد
النـبيّ
الحَبْـرُ
مـن
أعمـامه
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خــذ
مـن
حنيـن
مـن
حـديث
جهـاده
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مــا
أوطــن
الإســلام
دار
مقــامه
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غشـى
الـردى
فـي
سـبعة
مـن
هاشـم
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والجــوّ
قــد
غشــاه
ليـل
قَتـامه
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شـرفاً
بنـي
العبـاس
بـالبيت
الذي
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جبريــل
مهـدي
الـوحي
مـن
خـدامه
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لا
روع
الملـــك
الـــذي
ترعــونه
|
مــن
رام
أســباب
الهـدى
بـدوامه
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