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علام
زمــــاني
ظالمــــاً
يتعســـف
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وحتــام
فــي
قيــد
المذلـة
أرسـف
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أمـا
تسـمح
الأيـام
يـا
بـن
نجيبـة
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يقومهـــا
مـــن
زيغهـــا
ويثقــف
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فويـح
القـوافي
كم
تحوم
على
المنى
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ظمــاءً
وكــم
عنــا
تصــدّ
وتصــدف
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ألا
صــاحب
كالسـيف
يمضـي
إذا
نبـا
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زمــان
فيســعى
فـي
مرامـي
ويسـعف
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ومســتخبر
مــن
لليــالي
إذا
طغـا
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أذاهــا
وخيــف
الحـادث
المتغطـرف
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وإن
نكبــات
الـدهر
يومـاً
تتـابعت
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ينكســها
والخطــب
داجيــه
مغــدف
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ومـن
ذا
الـذي
مـن
بعـد
غـازي
بـن
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يوسـف
يلاذ
بـه
قلـت
المبـارز
يوسف
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جـــواد
يعــز
المحتمــي
بجنــابه
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ويــــأمن
فـــي
لأوائه
المتخـــوف
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لــه
مــاء
بشــر
فـي
أسـرة
وجهـه
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يكـــاد
بــأفواه
الأمــاني
يرشــف
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إذا
شــرف
المــدح
امـرأً
فمـدائحي
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بأوصــافه
تعلــو
وتســمو
وتشــرف
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فللــه
طــود
فــي
الكريهـة
ثـابت
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وفـي
السـلم
يثنيـه
الثنـاء
ويعطف
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يجــود
ســماحاً
والغــوادي
بخيلـة
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ويخشــى
كفاحــاً
والــذوابل
ترعـف
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تجمــع
فيـه
مـا
تفـرق
فـي
الـورى
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فكــل
امــرئ
عــن
شــأوه
متخلــف
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ففـي
رأيـه
قيـس
وفـي
الجـود
حاتم
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وفـي
لفظـه
قـسّ
وفـي
الحلـم
أحنـف
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يــــتيمه
للســـيف
خـــدٌّ
مضـــرج
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ويطربـــه
للرمـــح
قـــدٌّ
مهفهــف
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فمــا
روضــة
غنــاء
غنـى
حمامهـا
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وبــاتت
لهـا
كـفُّ
الغـوادي
تزخـرف
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إذا
مَجَّــتِ
الأنــواء
فيهـا
رضـابها
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فثغـــر
أقاحيهـــا
لـــه
يترشــف
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وأصــبحت
الأغصــان
فيهــا
تمايــل
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لِــوُرْق
علــى
الأوراق
تشـدو
وتهتـف
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بأحســن
مــن
وجـه
المبـارز
يوسـف
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وقـد
قـرئت
فيـه
مـن
النجـح
أحـرف
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أغــرّ
يهــزُّ
المـدح
عطفيـه
مثلمـا
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تهــزّ
قــدودَ
الشـَّرْبِ
صـهباءُ
قرقـف
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كفــاه
مـن
المـال
الثنـاء
وسـابح
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جــــواد
وخطّــــيّ
ودرع
ومرهــــف
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لــه
عنــد
بــذل
المكرمـات
تسـرع
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وفيــه
عـن
الجـاني
المسـيء
توقـف
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فمــن
حــاد
عـن
حـقّ
وأبقـى
مذمـة
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فمــا
ذم
يومــاً
لابـن
أحمـد
موقـف
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تصــدق
فـي
عليـاه
مـا
أنـا
قـائل
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كـأن
الـذي
أتلـو
مـن
المـدح
مصحف
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أمخـــترع
المعـــروف
دون
معاشــر
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لهـم
أعيـن
مـن
منظـر
الحـق
تطـرف
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دعوتـــك
والأيــام
خُــزْرٌ
عيونهــا
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إلــــيَّ
وطلاب
الحــــوادث
تزحـــف
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فكــن
عنـد
ظـنّ
مـا
عـداك
ولا
تـدع
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طــوارق
هــذا
الــدهر
بـي
تَتَحَيَّـف
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فعــار
عليكــم
أن
أضــام
وأنتــمُ
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حمــاة
المعــالي
والعـوالي
تقصـف
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فقـم
يـا
كريـم
الأصـل
دوني
مقارعاً
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صـــروف
الليــالي
علهــا
تتصــرف
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فـــوالله
لـــولا
حبكــم
وولاؤكــم
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خــدمت
ملوكــاً
ظلّهــم
لــي
يكنـف
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أقيلوا
أنيلوا
أفضلوا
أجهلوا
حلوا
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أفيـدوا
أعيـدوا
مـا
بدأتم
تعطفوا
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فـأي
امـرئ
لـم
تكفـه
يا
ابن
خطلخ
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حـــوادث
أيـــام
تجـــور
وتعســف
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فــدم
لا
خلا
معنـاك
مـن
طـالب
غنـى
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ومــن
آمــل
يســري
إليــك
ويوجـف
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