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لا
تلـومي
فـي
ولوعي
بالحبش
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إن
عقلـي
حـار
فيهم
واندهش
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كيـف
لا
أصـبو
إليهـم
ولهـم
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مــدخل
فـي
كـل
قلـب
ومحـش
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ملكــوا
رقـى
بملكـى
رقهـم
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فأنا
الموقع
نفسي
في
البلش
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وبروحـــي
منهـــم
انســية
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سـلبت
بالـدل
عقلـي
والورش
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ذات
خــد
مــذهب
ليـس
يـرى
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فـي
صـفا
مـرآة
مـرآه
نمـش
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وفـــم
عـــذب
حلا
مرشـــفه
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لـو
سقى
المنعوش
منه
لانتعش
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مـا
إلـى
الـورد
سـبل
وارى
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عندي
الماء
وبي
أقوي
العطش
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إن
تحـرم
قربهـا
بنت
أختها
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ربمـا
حلـت
إذا
المفتى
فتش
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نلـت
منهـا
فـي
خفـاء
قبلة
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عنـد
مـا
زاد
هيـامي
وطفـش
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فجــرت
أدمعهــا
فـي
خـدها
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فـأرتني
الـروض
مخضـلاًّ
بـرش
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ثـم
قـالت
هكـذا
يـا
سـيدي
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جـال
فـي
صـدرك
بيعي
وانقش
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فـاعتراني
لاعـج
مـن
قولهـا
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لســع
الأحشــاء
منـى
ونهـش
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طالمـا
بـت
بهـا
فـي
غبطـة
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آمنـاً
مـن
كاشـح
عنـا
نبـش
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وإلـى
يسـراي
أخـرى
مثلهـا
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طفلـة
بظلـم
مـن
فيهـا
خدش
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كــاعب
هيفـاء
راقـت
خضـرة
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جـال
فـي
ريحانها
طل
الغبش
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سـمة
الظـبي
حوتهـا
واسـمه
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فاحتواها
الشبه
منه
واحتوش
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بعتهـا
لا
عن
رضي
والدمع
في
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صـحن
خـديها
وخـدى
قـد
طرش
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فتنــة
الأولاد
والزوجـة
مـا
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برحـت
تمـزج
بالنصـح
الغشش
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ذهبــت
تلــك
وأمــا
هــذه
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دملـي
منهـا
لأنـي
ما
انتكش
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رب
دبرنــي
ولاطفنــي
عســى
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هـذه
الكربـة
عـن
قلبي
تنش
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