|
أي
القلــوب
لهـذا
الحـادث
الجلـل
|
اطـواده
الشـم
لـم
تنسـف
ولـم
تزل
|
|
وأي
نازلــة
فـي
الهنـد
قـد
نزلـت
|
بلفحهـا
كـل
حـبر
فـي
الحجـاز
صلي
|
|
اعظـم
بنازلـة
فـي
الكـون
طار
بها
|
بــراً
وبحـراً
مسـير
السـفن
والابـل
|
|
أخبارهــا
طرقــت
ســمعي
فحملنــي
|
طروقهــا
عبــء
رزء
غيــر
محتمــل
|
|
أهـدت
لأهـل
الحجـاز
البـأس
بعدرجا
|
واليـأس
بعـد
الرجـا
كالظـل
بالأسل
|
|
فأصـبح
النـاس
فـي
وهـج
وفـي
فكـر
|
كـــثيرة
ومـــزاج
غيـــر
معتــدل
|
|
خطــب
علــى
كــل
معــروف
ومكرمـة
|
ونعمــة
قلــدت
جيـد
الزمـان
حلـى
|
|
أصــم
أذنـى
بـه
النـاعي
واسـمعني
|
أمـراً
بـه
صـرت
مثـل
الشارب
الثمل
|
|
وهــو
البشــير
بضـد
الأمـر
ربتمـا
|
أصـبب
مـن
هـول
هـذا
الخطب
بالخطل
|
|
عمـري
لقـد
جمـع
الضـدين
فـي
نسـق
|
وقـرب
البعـد
بيـن
الحـزن
والجـذل
|
|
فـي
حـال
اشراق
شمس
البشر
قد
غربت
|
فصــار
وقـت
طلـوع
الشـمس
كالطفـل
|
|
يـا
صـاح
سل
عن
فوأدي
بالحديث
وعن
|
ســكري
بطافــح
هــم
فيــه
لا
تسـل
|
|
علــى
اصــفخان
وجــدي
لا
يفـارقني
|
أو
تبلـغ
الـروح
منـي
منتهـى
الأجل
|
|
لهفــي
ولهـف
رجـال
العلـم
فاطبـة
|
علــى
إمـام
بتحقيـق
العلـوم
ملـي
|
|
علـى
الجـواد
الـذي
فاضـت
مكـارمه
|
للآمليــن
بمــا
أربــى
علـى
الأمـل
|
|
مضـى
شـهيداً
إلـى
دار
البقـا
ليرى
|
مــا
قـدمت
يـده
مـن
صـالح
العمـل
|
|
لقــد
اعـد
لـه
عنـد
النـزول
بهـا
|
رب
غفـــور
رحيــم
أكــرم
النــزل
|
|
بكـت
عليـه
السـما
والأرض
إذ
فقـدت
|
تهجـداً
عنـد
طـول
الـدهر
لـم
يحـل
|
|
وورد
صـــوم
ظمــاه
فيــه
ادخلــه
|
جنــات
عـدن
مـن
الربـان
فـي
عجـل
|
|
وفعــل
خيــر
وإحســان
ينيـل
غـداًُ
|
قــرار
سجســاج
ظــل
غيــر
منتقـل
|
|
لهـا
بهـاتيكم
الطاعـات
قـد
شـهدت
|
بطــاح
مســجد
طــه
خــاتم
الرسـل
|
|
ومســجد
القــدس
والمكــي
لا
برحـت
|
ارجـاؤهم
مـن
غمـام
الأمـن
فـي
ظلل
|
|
وكــم
طـواف
بـبيت
اللـه
كـان
لـه
|
وكــم
وقـوف
ببـاب
اللـه
فـي
وجـل
|
|
وبـــالمعروف
أعوامـــاً
متابعـــة
|
بهـا
اسـتتم
فـروض
الحـج
عـن
كمـل
|
|
ســلوا
مشــاعر
جمـع
كيـف
ليلتهـا
|
كــانت
تضــيء
ببــدر
منـه
مكتمـل
|
|
وكــان
شمسـاً
بهـا
لمـا
يحـل
منـى
|
أيــام
تشــريقها
أشــراقهن
جلــى
|
|
ســقياً
ورعيــاً
لأيــام
سـلفن
بهـا
|
ونحــن
فـي
مجلـس
سـام
لـديه
علـي
|
|
اذ
الزمـــان
عزيــز
وجهــه
خضــل
|
بغــرة
مــن
محيــا
وجهــه
الخضـل
|
|
والعيـش
غـض
بمـا
يـوليه
مـن
نعـم
|
لــدن
الحواشـي
بـانس
منـه
مقتبـل
|
|
والــدهر
يلحظنــا
شـزراً
ويوهمنـا
|
خديعـــة
انــه
عنــا
لفــي
شــغل
|
|
فحيــن
رد
إلينــا
طرفــه
أرتجعـت
|
يــداه
منــا
الـذي
اولاه
مـن
نحـل
|
|
فشــتت
الشــمل
بعـد
الـتئام
ولـم
|
يقنــع
بنــوح
مقيــم
أثـر
مرتحـل
|
|
حــتى
رمانــا
فاصــمتنا
رمــايته
|
عمــداً
باسـم
هـذا
الحـادث
الجلـل
|
|
أيــا
أصــفخان
لا
يحصــى
تأســفنا
|
عليـــك
ضـــبط
بتفصــيل
ولا
جمــل
|
|
لقـد
فقـدناك
فقـدان
الربيـع
ولـم
|
نجـد
لنـا
عنـك
بعـد
الفقد
من
بدل
|
|
نفـديك
منـا
ألـوف
لـو
فـديت
بهـا
|
مـن
خيرنـا
لا
مـن
الـدهماء
والسفل
|
|
أنــي
لأبكيــك
للجـود
الـذي
فضـحت
|
أنــواءه
كــل
وســمي
وكــل
ولــي
|
|
أبكيـك
للعلـم
والعقـل
اللـذين
ها
|
عمـاد
دنبـا
وديـن
الحـازم
الرجـل
|
|
وللحجـــاز
وأهليـــه
إذا
فقــدوا
|
مــألوف
بــر
إليهــم
منــك
متصـل
|
|
وللصـــيام
وأحيـــاء
الظلام
إلــى
|
حيــن
الممــات
بلا
وهــن
ولا
ملــل
|
|
مســافراً
ومقيمــاً
مــا
كسـلت
ولا
|
عجــزت
حوشـيك
مـن
عجـز
ومـن
كسـل
|
|
قـد
كنـت
بحـر
علـوم
زاخـراً
ونـدا
|
مـن
فيضـه
كـل
بحـر
كـان
فـي
خجـل
|
|
ففـاض
مـا
فـاض
مـن
أمـواجه
وطغـا
|
منهــا
وروى
الــورى
علا
علـى
نهـل
|
|
بمـوته
مـات
ذكـر
الجـود
واندرسـت
|
منـه
الربـوع
ورسـم
المكرمـات
بلى
|
|
عـذلت
فـي
قتلـه
دهـري
فقـال
أمـا
|
أحطــت
علمـا
بسـبق
السـيف
للعـذل
|
|
لـبى
نـداء
المنايـا
عنـدما
هتفـت
|
بــه
وســار
بهـا
يمشـي
علـى
مهـل
|
|
لا
قتــه
وهـي
كميـن
فاسـتكان
ولـو
|
بــدت
لـه
لـم
تجـده
كـان
ذا
فشـل
|
|
فــإنه
كــان
ثبتــاً
حازمـاً
حـذراً
|
ولـم
يكـن
راميـه
يـؤتى
مـن
الزلل
|
|
أبــاد
أحمــد
أبــاد
هـول
مصـرعه
|
وبـاء
بعـد
الآبـاء
مـن
فيه
بالوجل
|
|
فـذم
محمـود
أبـاد
النـاس
حين
بدا
|
منهـا
عنـاًُ
مـا
بـه
للنـاس
من
قبل
|
|
وريــح
نكبــة
كنبــايت
عواصــفها
|
نكبــآء
هبــت
خلال
الـدور
والحلـل
|
|
والنــار
شـبت
بشـنبانير
مـن
فتـن
|
تمـوج
كـالبحر
ملـء
السـهل
والجبل
|
|
والـدير
أودت
بهـا
أدواؤهـا
وبـدت
|
فيهـا
أراجيـف
أهـل
العـل
والنقـل
|
|
فلا
ملام
علـــى
ســـرات
أن
لبســـت
|
ملابـس
الحـزن
بعـد
الحلـي
والحلـل
|
|
اوفـي
وسـلطانه
السامي
المقام
معا
|
علـى
انتهاء
الأجل
المحتوم
في
الازل
|
|
كـذا
الخليفـة
والفتـح
الـوزير
له
|
كــانت
وفاتهمــا
فــي
اعصــر
أول
|
|
عــز
العــزا
وأزمـان
المسـرة
قـد
|
ولــت
وكــل
خلــي
بــالهموم
ملـي
|
|
عبـد
العزيـز
عزيـز
مـا
أصـبت
بـه
|
علــى
الممالــك
والأديـان
والملـل
|
|
عبـد
العزيـز
عزيـز
مـا
أصـبت
بـه
|
علــى
شـهامة
أهـل
الملـك
والـدول
|
|
عبـد
العزيـز
عزيـز
مـا
أصـبت
بـه
|
علـــى
المشــايخ
والطلاب
والملــل
|
|
عبـد
العزيـز
عزيـز
مـا
أصـبت
بـه
|
علــى
مجـالس
أهـل
البحـث
والجـدل
|
|
كــانت
تتــوق
لأرض
الهنـد
أنفسـنا
|
كيمــا
تحقـق
أن
العـز
فـي
النقـل
|
|
فمـذ
نعيـت
نـأت
عنهـا
المنى
وغدت
|
أبـواب
نيـل
الغنـى
مسـدودة
السبل
|
|
يلــومني
فيـك
أقـوام
ولـو
علمـوا
|
عـذري
لمـا
أكـثروا
لـومي
ولا
عذلي
|
|
محبـب
كـل
مـن
يـولي
الجميـل
وقـد
|
أوليتنــي
جملا
منهــا
علــي
جمــل
|
|
إن
سـاء
مصـرعه
أهـل
الحجـاز
فكـم
|
قـد
سـرهم
بالعطايـا
الغـر
والنجل
|
|
يعطيـك
والبشـر
يكسـو
صـفحتيه
فقل
|
بعـداً
لتقطيـب
وجـه
العـارض
الهطل
|
|
أفعــاله
صــدقت
مــا
قــد
تكـذبه
|
أسـماعنا
مـن
حـديث
الجود
في
الأول
|
|
فـانظر
إلـى
فعلـه
واتـرك
حـديثهم
|
فـي
طلعـة
الشـمس
ما
يغنيك
عن
زحل
|
|
يلقــاك
لابــس
بــرد
مــن
تواضـعه
|
مــا
قــط
دنســه
بالــذل
والفشـل
|
|
فـي
عـزه
لـم
يشـبها
كـبر
ذي
حمـق
|
يظــن
بـالكبر
تعلـو
رتبـة
السـفل
|
|
بـالعلم
كـان
وفعـل
الخيـر
مشتغلا
|
ولـم
يكـن
عنهمـا
بـاللهو
فـي
شغل
|
|
ولــم
يــزل
برجـال
العلـم
محتفلا
|
لمنـــه
بســـواهم
غيـــر
محتفــل
|
|
تــأثلوا
المــال
فـي
أيـامه
وبـه
|
نـالوا
مكانـاً
مـن
العلياء
لم
ينل
|
|
فــي
حضــرة
ومغيــب
كـان
يمنحهـم
|
مــالم
يكـن
لهـم
واللـه
فـي
أمـل
|
|
منــه
اتتنـي
سـنيات
الهبـات
ومـن
|
تمامهــا
أنهــا
جــاءت
ولـم
أسـل
|
|
مــدحته
كــي
أوفــي
شـكرها
فـأبى
|
مزيــد
فــايض
احســان
لــه
هطــل
|
|
والآن
علــي
أوفــى
بالرثــاء
لــه
|
حقــاً
فــاني
وفــي
بـالحقوق
ملـي
|
|
قـد
كنـت
آمـل
هـذا
الـدهر
يمتعنا
|
بــه
ويبقيـه
غوثـاً
للمعفـاة
ولـي
|
|
ومــا
تــوهمت
أن
الــدهر
ينزعــه
|
نزعــاً
ويجفــؤه
بالقتــل
والغيـل
|
|
شــلت
يمسـن
الـذي
بالقتـل
فاجـأه
|
عمــداً
وشــين
كـف
المجـد
بالشـلل
|
|
ملاحــم
حكــم
المــولى
بهـا
وقضـى
|
وجودهــا
ســابق
فــي
علمــه
الأزل
|
|
يـا
مـن
يسـائل
عـن
تاريـخ
مصـرعه
|
عنـه
الجـواب
انقضـى
فاكفف
ولا
تسل
|
|
عليــه
واللــه
لا
أنفــك
ذا
أســف
|
أهدى
إليه
الدعاء
ما
امتد
في
اجلي
|
|
همــت
علــى
روض
قــبر
حلــه
ديـم
|
مـن
الرضـى
مـا
همـا
دمع
من
المقل
|
|
ثـم
الصـلاة
علـى
المختـار
مـن
مضر
|
خيــر
البريــة
طــه
خـاتم
الرسـل
|
|
والآل
والصـحب
مـا
أوفى
الحجيج
على
|
بيــت
الآلــه
وحـي
الركـن
بالقتـل
|