|
يــا
مــن
يجيـب
دعـوة
المضـطر
|
ويكشـــف
الســوء
وكــل
الضــر
|
|
اجــب
دعانــا
اننــا
اضـطررنا
|
اليــك
فاكشــف
مـا
بـه
ضـررنا
|
|
قــد
مســنا
الضـر
وانـت
ارحـم
|
الراحميـــن
والكريــم
الاكــرم
|
|
بـــك
تحصـــنا
مـــن
الاســواء
|
جميعهـــــا
وجملـــــة
الادواء
|
|
ومـــن
صـــنوف
المكــر
والبلاء
|
ومــن
صــروف
الــدهر
والوبـاء
|
|
فســـــكنن
صــــدمت
القهــــر
|
بـاللطف
فـي
السـر
معـا
والجهر
|
|
واغننــا
عـن
نيـل
اجـر
الصـبر
|
علــى
البلا
بنيــل
اجـر
الشـكر
|
|
وانــزل
الفضــل
مكــان
العـدل
|
فـانت
ذو
العـدل
الظيـم
الفضـل
|
|
واغفـر
لموتانـا
واكـرم
وارضـا
|
ونــج
احيانــا
وطــف
المرضــا
|
|
وطيــب
الهــواء
واعمــر
ارضـا
|
بهـــا
اقمنـــا
ســنة
وفرضــا
|
|
ورزقنــا
ابسـط
قـوته
والعرضـا
|
حــتى
يعــم
طولهــا
والعرضــا
|
|
نحــــن
عيالـــك
وان
جنينـــا
|
فلا
تواخـــذنا
بمـــا
اتينـــا
|
|
واغفــر
لنــا
فـض
وتـب
علينـا
|
ولا
تكلنــــا
طرفـــة
الينـــا
|
|
بــك
اســتعذنا
وبــك
احتمينـا
|
ومــا
لغيــر
دينــك
انتمينــا
|
|
بــك
اعتصــمنا
وبــك
اكتفينـا
|
فـي
كـل
مـا
نبـدي
ومـا
اخفينا
|
|
نحــن
الضــعاف
والضـعيف
اولـى
|
بـــان
يـــولي
رأفــة
وطــولا
|
|
وقـــد
نبـــذنا
قــوة
وحــولا
|
الا
بمولانـــا
فنعـــم
المــولى
|
|
ايــــاك
نعبــــد
ونســــتعين
|
وحبـــذا
المعبـــود
والمعيــن
|
|
بــدعوك
رب
بالاســماء
الحســنى
|
ومــا
لهـا
مـن
الكمـال
الاسـنى
|
|
ومــا
حــوته
مـن
جمـال
البنـى
|
وصــحة
الفحــوى
وحسـن
المعنـى
|
|
وباســمك
اللـه
العظيـم
الاعظـم
|
تنمـى
لـه
الاسـما
وليـس
ينتمـى
|
|
علـــى
ســـواك
مــا
لــه
اطلاق
|
وغيـــره
منهــا
لــه
اشــتقاق
|
|
وكـــل
مـــا
دل
مــن
الكمــال
|
عليـــــه
والجلال
والجمـــــال
|
|
ان
تســـتجيب
كرمـــا
دعاءنــا
|
وان
تحقــــق
لنــــا
رجـــاءي
|
|
وان
تكـــون
غـــافرا
ذنوبنــا
|
وان
تكـــون
ســـاترا
عيوبنــا
|
|
وان
تكـــون
فارجـــا
كروبنــا
|
وان
تكـــون
هاديـــا
قلوبنــا
|
|
وان
تكـــون
شـــارحا
صــدورنا
|
وان
تكـــون
مصـــلحا
امورنــا
|
|
وكــن
لنــا
يــا
ربنــا
وليـا
|
واجعـل
حلـى
التقـوى
لنـا
حليا
|
|
وكــن
لنــا
يــا
ربنـا
نصـيرا
|
فلـــم
تــزل
بحالنــا
بصــيرا
|
|
وكـــن
لنـــا
موفقــا
مســددا
|
ومــــوثرا
مظفــــرا
مؤيـــدا
|
|
وافتــح
لنــا
ابـواب
كـل
خيـر
|
واســدد
بنــا
ابـواب
كـل
ضـير
|
|
وافتـح
لنا
باب
العلوم
النافعة
|
واطـور
مسـاوفة
السلوك
التاسعة
|
|
واملا
قلوبنــا
بنــور
المعرفـة
|
ورقنــا
فـي
الـدرجات
المشـرفة
|
|
وعــدنا
مـن
العبـاد
المكرميـن
|
والاوليــاء
المـؤمنين
المتقيـن
|
|
وجنـدك
جنـد
اللـى
هـم
غـالبون
|
وحربـك
الحـزب
الالـى
هم
مفلحون
|
|
واحينــــا
رب
حيـــاة
طيبـــة
|
وجــد
علينـا
بـالفيوض
الصـيبه
|
|
يــا
حــي
يـا
قيـوم
يـا
رحمـن
|
يــا
بــر
يـا
حنـان
يـا
منـان
|
|
قنــا
الــذي
يسـوء
مـن
قضـاكا
|
وقومنــا
الضــعف
فــي
رضــاكا
|
|
ولتقنـــا
يـــا
دائم
البقــاء
|
جهـــــد
البلا
ودرك
الشــــقاء
|
|
ولا
تصـــبنا
بعضـــال
الـــداء
|
رب
ولا
شــــــماتة
الاعـــــداء
|
|
وعافنــا
مــن
ســائر
الامــراض
|
ونجنـــا
مـــن
ســيئ
الاعــراض
|
|
ولا
تـــدع
لنــا
مــن
الاغــراض
|
الا
الـــذي
منهـــن
انـــت
راض
|
|
وجـــد
بعفــو
واســع
وعافيــة
|
للشــر
والمكــروه
هنـا
نـافيه
|
|
فـي
غبطـة
مـن
كـل
شـوب
صـافية
|
ونعمــة
علــى
الجميــع
ضـافية
|
|
والشــكر
اوزعنـا
علـى
الانعـام
|
وعــــرف
الانعـــام
بالـــدوام
|
|
واكرمنـــا
واجـــب
بـــالمرام
|
فــــانت
ذو
الجلال
والاكــــرام
|
|
ولا
تهنــا
يــا
مجيــر
المجـرم
|
فمــا
لمــن
اهنتــه
مـن
مكـرم
|
|
واجعـل
لنـا
يـبرا
ومخرجـا
الى
|
مـا
لـم
نكـن
محتسـبين
مـن
الي
|
|
ونجنــا
مــن
الشــرور
والفتـن
|
ومــن
حــوادث
اواخــر
الزمــن
|
|
ونجنـــا
مـــن
شــر
كــل
بــر
|
وفـاجر
فـي
البحـر
او
فـي
البر
|
|
ونجنــا
مــن
حيلــة
المحتــال
|
ونجنــا
مــن
غيلــة
المغتــال
|
|
ومـــن
تســـلط
ذوي
الســـلطان
|
ومــن
عــداء
عصــبة
العــدوان
|
|
وشـــر
كـــل
جـــائر
وعـــادل
|
وشـــر
كـــل
عـــاذر
وعـــاذل
|
|
وشـــر
كـــل
عـــالم
وجاهـــل
|
وشـــر
كـــل
فـــاطن
وذاهـــل
|
|
وشـــر
كـــل
حاقـــد
وحاســـد
|
وناقــــد
وصــــالح
وفاســــط
|
|
وشـــر
كـــل
عـــائن
وخـــائن
|
وصــــادق
فــــي
وده
ومـــائن
|
|
وشـــر
كـــل
ســـارق
وطـــارق
|
وهالــــك
وفاتــــك
ومــــارق
|
|
وغاســــق
وواقــــب
وســــاحر
|
وكــــاهن
وعــــائف
وزاجــــر
|
|
وكــــل
شـــيطان
وكـــل
جـــن
|
مـــن
ظـــاهر
منهــم
ومســتجن
|
|
وطعنهـــم
ووخزهـــم
وضـــربهم
|
وكيهــم
فــي
ســلمهم
وحربهــم
|
|
واضــرب
حجابــا
دونهـم
وسـورا
|
يكــون
مــن
صــين
بـه
مسـتورا
|
|
وخــذ
لنـا
بالثـأر
مـن
ظلامهـم
|
واصــددهم
بـالقهر
عـن
مرامهـم
|
|
ونجنــا
مــن
شــكل
كــل
اســد
|
وحيـــــة
وعقــــرب
واســــود
|
|
وغيـــر
ذا
مــن
ســائر
الخلائق
|
جميعهـــا
مــن
صــامت
ونــاطق
|
|
واجعــل
حريمنــا
حريمـا
آمنـا
|
وكـــن
بحفظـــه
كفيلا
ضـــامنا
|
|
ووفــــق
القلــــوب
للوفـــاق
|
وطهرنهــــا
مــــن
النفــــاق
|
|
وآمنـــــن
ســــبل
الرفــــاق
|
وابـــدل
الكســـاد
بالنفـــاق
|
|
ولا
تـــذقنا
علقـــم
الـــدنيه
|
فانهـــا
شـــر
مـــن
المنيــة
|
|
عودتنــــا
نعمــــك
الهنيـــة
|
وجـــدت
بـــالمواهب
الســـنية
|
|
فــدم
لنـا
علـى
الـذي
عودتنـا
|
لا
نغتنـي
عـن
ذاك
مـا
اوجـدتنا
|
|
واقـض
لنـا
مـا
كـان
مـن
حوجاء
|
فــي
حالنــا
هـذا
وذاك
الجـاء
|
|
واقــض
حـوائج
الـذين
انتسـبوا
|
لنـا
جميعـا
واعـف
عما
اكتسبوا
|
|
مــــن
كـــل
ذي
ارادة
وجـــار
|
وســـائر
الضـــيوف
والـــزوار
|
|
وكــــل
قــــاص
جيلــــه
ودان
|
مــن
فــرق
البيضـان
والسـودان
|
|
وكــــل
ذي
قرابــــة
واجنـــب
|
مــن
امــة
مجيبــة
خيــر
نـبي
|
|
فمـــا
لكنـــا
ســـواك
نــافع
|
نرجـــوه
للجلـــب
ولا
مـــدافع
|
|
ومـــا
لنـــا
لرغــب
ولا
وهــب
|
ســواك
نــدعوه
فيمحــى
ويهــب
|
|
اذا
الخطـوب
اهـولت
اهـولا
لهـا
|
فمالنــا
غيــرك
مولانــا
لهــا
|
|
وفـــي
دواك
رب
خـــاب
الامـــل
|
وبطــــل
الرجـــاء
والتوكـــل
|
|
فكــن
بتــاج
العــز
والكرامـه
|
متوجـــا
لنـــا
مــع
الســلامه
|
|
وردنــــا
بـــاليمن
والامـــان
|
وجــد
بمــا
لا
تبلــغ
الامــاني
|
|
وركبنــــا
مركــــب
النجـــاة
|
بعــد
مماتنــا
وفــي
الحيــاة
|
|
ونجنــا
مــن
موجبــات
الغضــب
|
ومـــا
يكـــون
ســببا
للســبب
|
|
واســلك
بنــا
مســالك
النجـاح
|
والفــوز
فــي
الـدارين
والفلاح
|
|
وبالكفالـــــة
وبالكفايـــــة
|
حطنـــا
وبالنصــر
وبالحمايــة
|
|
وكـــن
الـــي
واقيــا
ايانــا
|
ممــا
يجـر
الخـزي
فـي
دنيانـا
|
|
ونجنـا
يـاذا
العطايـا
الزاخره
|
ممـــا
يــؤدي
لعــذاب
الاخــره
|
|
وهـب
لنـا
يـا
مـن
علا
عن
صاحبه
|
وولـد
فـي
الامـر
حسـن
العاقبـة
|
|
وثبنـــــا
علــــى
الايمــــان
|
عنــد
فــراق
الــروح
للابــدان
|
|
وبعــده
عنـد
السـؤال
والقيـام
|
إلــى
دخولنـا
غـدا
دار
السـلام
|
|
لنــا
توســل
عظيــم
المنزلــة
|
اليـك
بـالكتب
العظـام
المنزلة
|
|
وبالكتــاب
المتســبين
المعجـز
|
كــــل
مطـــول
وكـــل
مـــوجز
|
|
وبــالنبئين
ومــن
قـد
ارسـلوا
|
وبــاولي
العـزم
الـذين
فضـلوا
|
|
وبـالحبيب
المصـطفى
خيـر
البشر
|
مــن
ســبقت
مولـده
بـه
البشـر
|
|
وبـــالملائك
الكــرام
الــبررة
|
والمرســـلين
منهــم
والســفرة
|
|
وبالرســـول
عنـــدك
المكيـــن
|
جبريـــل
روح
القـــدس
الاميــن
|
|
وبصـــحابة
النـــبي
الخيـــرة
|
وكــل
مـن
بـالخير
منهـم
بشـرة
|
|
كــا
اهـل
بـدر
وكاهـل
الشـجرة
|
والخلفــاء
ثــم
بـاقي
العشـرة
|
|
وبنــي
خيـر
البرايـا
والبنـات
|
وامهــات
المــومنين
المحصـنات
|
|
وآل
حيـــر
الخلـــق
خيـــر
آل
|
مــن
خلطــوا
الحــب
بالمعـالي
|
|
وســادة
مــا
للعلـى
مـن
ذمهـب
|
عنهــم
فهــم
سلســلة
مـن
ذهـب
|
|
وبـــاولي
الاصـــدار
والايــراد
|
ســـــاداتنا
سلســــلة
الاوراد
|
|
وشــيخنا
منهــم
وشــيخه
معــا
|
مـن
جمعـوا
شـتى
المعـالي
جمعا
|
|
ومـن
حـوى
في
الفضل
اعلى
منزلة
|
امامنـا
الجيلـي
قطـب
السلسـلة
|
|
وبجميــع
الاوليــاء
الصــالحين
|
والعلمـاء
العـاملين
المخلصـين
|
|
وكـــل
مــن
كــان
لــه
تعلــق
|
بالصــــالحين
اولـــه
تهـــوق
|
|
يـــا
ربنـــا
بجـــاه
هـــؤلاء
|
كـــن
مســـتجيب
ذائه
الــدعاء
|
|
وكاشـــفا
عنـــا
لكـــل
ضـــر
|
انــت
المجيــب
دعــوة
المضـطر
|
|
وصــل
اكمــل
الصــلاة
والســلام
|
علــى
الـذي
اتـى
باحسـن
الكلام
|
|
المهتدى
الهادي
التهامي
العربي
|
شــــفيعنا
لنيــــل
كـــل
أرب
|
|
والال
والأزواج
والصــــــــحابة
|
وغيرهـــم
مــن
أمــة
الإجابــة
|