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زر
أرض
مصــر
وقـف
علـى
ربواتهـا
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واحفـظ
فـوادك
مـن
ظـبي
ظبياتهـا
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وتــوقّ
انفــاس
النســيم
فانهــا
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ممزوجــة
بــالحب
مــن
غاداتهــا
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ارض
كســاها
النيــل
زخـرف
وجهـه
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واعــار
بــرد
ميــاهه
نســماتها
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فبــدت
كــان
الارض
وجــه
مليحــة
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وكأنهـــا
خــال
علــى
وجناتهــا
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لِلّــه
روضــتها
وقـد
حيـى
الصـبي
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اغصــانها
فحنــت
لهــا
هاماتهـا
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وتحــدثت
امواههــا
فــوق
الحصـى
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تــوحي
لطيــر
اراكــه
نغماتهــا
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والارض
مــن
ظــل
الغصــون
كانمـا
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نــثرت
دنــانير
علــى
جنباتهــا
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ولقـد
جلسـت
الـى
الغزالـة
سـاعة
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غفلــت
بهــا
عنـا
عيـون
وشـاتها
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واللحــظ
ينطــق
والشـفاه
صـوامت
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لغـــة
تخــطُّ
عيوننــا
كلماتهــا
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حـتى
اذا
طفـح
الغـرام
ولـم
تعـد
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كلــم
العيــون
تفـي
بوجـداناتها
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عاتبتهــا
فتحــدرت
مــن
جفنهــا
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درر
وددت
اكـــون
مــن
قطراتهــا
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ورنــت
الــيَّ
فقابلتهــا
ادمعــي
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فكانهـــا
نظــرت
الــى
مرآتهــا
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ان
القلــوب
غصـون
اربـاب
الهـوى
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ومــدامع
الاجفــان
مــن
ثمراتهـا
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فــاذا
جــرى
فيهـا
نسـيم
صـبابة
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نـثرت
ثمـار
الوجـد
عبراتهـا
مـن
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دمــع
تــراه
مقلــتي
فــي
خـدها
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مــاء
ونفســي
منـه
فـي
جمراتهـا
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ضـدان
قـد
جمعـا
بـه
وكـذا
الهوى
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فيــه
الســعادة
مــازجت
افاتهـا
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لتكـن
كمـا
تهـوى
الصـبابة
اننـي
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لا
التقـــي
فيــه
ســوى
لــذاتها
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تعـــذيبها
عـــذب
يـــروق
وروده
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عنــدي
فكيـف
العـذب
مـن
حالاتهـا
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سكر
الفواد
بها
باقداحٍ
من
الاحداق
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دار
الســــكر
فــــي
داراتهـــا
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يســعى
بهـا
قمـر
لـو
ان
نجومنـا
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منــه
لكــان
البـدر
مـن
هالاتهـا
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فصــفحت
فــي
ســكري
بخمـرة
حبـه
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عمــا
اســاء
الــيَّ
مـن
هفواتهـا
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هيهـات
مـا
الـدنيا
ليـذكر
ذنبها
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وســعادتي
بلقــاك
مــن
حسـناتها
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لقيـــا
اخــال
الارض
دارة
درهــم
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فيهــا
وكـل
العمـر
مـن
سـاعاتها
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حــتى
لا
حســب
ان
نفسـي
فـي
ربـي
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جنباتهــا
والخلــد
بعـض
حياتهـا
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واظــن
صـرف
المـوت
اليـن
جانبـاً
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مــن
ان
يكــدر
بيننــا
خلواتهـا
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واقـول
دعنـا
يـا
ممـات
وعـج
الى
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نفــس
تــرى
راحاتهــا
بمهاتهــا
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كــم
مــن
نفــوس
تشـتهيك
حزينـة
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تـدعو
وتبسـط
فـي
الـدعا
راحاتها
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فــالى
دعاتـك
فاسـتجب
كرمـاً
ودع
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اهــل
الصـبابة
عنـك
فـي
جناتهـا
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