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أضــحى
الهنـاء
جميلا
فـي
تلاقينـا
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وغــاب
عاذلنــا
واغتـاظ
واشـينا
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وجـاء
ركـب
مليـك
الـروح
مـن
سفر
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واطــرب
العيـس
بالألحـان
حادينـا
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وقـام
داعـي
سـرور
الانـس
فـي
طرب
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وغمــر
العــز
بالبشـرى
صـحارينا
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وغــرّد
السـعد
كـالقمري
فـي
سـحر
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والــورق
ســاجعةٌ
تبـدو
أفانينـا
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وجــاءت
الريــح
بـالأفراح
راويـة
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شــذاء
عطـر
سـرى
صـبحا
بوادينـا
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وانكـف
جنـح
الـدجا
مذبان
عن
قمر
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اضــحت
بإشــراقه
تزهـز
نواحينـا
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رامـت
تغطـي
الليـالي
نـوره
فبدا
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كالصـبح
زمـادته
إيضـاحاً
وتبيينا
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هــذا
علـيّ
الرضـى
والأسـعدي
بمـا
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وافـى
يشـير
بـه
هـل
مـن
يضاهينا
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هذا
الأمير
الذي
العليا
به
ابتهجت
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حــتى
هنــاءً
بعليــاه
تهادينــا
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مـذ
حـل
جلـق
قـام
المجد
فيها
له
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وبــان
عــن
فضـله
ممـا
يسـامينا
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وســار
للسـاحل
الرومـي
فـي
همـم
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ســـنية
فحـــوى
عــزاً
وتمكينــا
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دعـا
له
المجد
في
نيل
المنى
سحرا
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أجــابه
الســعد
مـن
أعلاه
أمينـا
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ذو
غــرةٍ
حببــت
للنــاس
طلعتهـا
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وزادهــا
اللَـه
بـالأنوار
تزيينـا
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وحيــن
عــم
بفضــل
كــل
ناحيــة
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قـامت
لـديه
بنـو
العليـا
محبينا
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غيــثُ
ســماحته
والغــوث
ســاحته
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فكـم
نعـاطي
بهـا
مـن
كاس
صافينا
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طــابت
معــالمه
جــادت
مكــارمه
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أبـو
المعـالي
بـه
حزنـا
معالينا
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وكــم
ظفرنــا
بنيـل
مـن
مـواهبه
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جــودا
وكــم
بـرزت
آثـاره
فينـا
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فهـــذه
منـــح
مـــولاه
أحكمهــا
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أحكــام
لطـف
فجـل
اللَـه
بارينـا
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فلا
معــــدّ
ولا
عبــــس
ولا
مضـــر
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نـالوا
الذي
قد
بلغنا
من
تهانينا
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هـذا
السـني
الذي
حزنا
الثناء
به
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وعمنــا
الفضـل
قاصـينا
ودانينـا
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بـه
سـمونا
علـى
هـام
السماك
وإن
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نشــهد
قتــالا
فيمنــاه
عيانينـا
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سـل
المعالي
وسل
سمر
العوالي
وسل
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سـود
الليـالي
وسل
عنه
الدواوينا
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مـن
آل
أسـعد
مخطـوب
السـعادة
من
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قـوم
كـرام
إلـى
العليـاء
مجدينا
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سـل
الرمـاح
وسـل
بيض
الصفاح
وسل
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يـوم
الكفـاح
وسـل
عنـه
أعادينـا
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أيـا
عليـا
سـما
سامي
العلى
واتى
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بالنصــر
مقتفيــا
آيـات
ياسـينا
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خـذها
بعفـو
لقـد
وافقـت
على
عجل
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لــروض
فضـل
قطفنـا
منـه
ماشـينا
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كـم
أهـل
فضـل
بديع
بالثنا
نظموا
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بــاب
جــودك
مـن
قبلـي
دواوينـا
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لكنهـا
بالهنـا
جـاءت
تقـول
لنـا
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أضــحى
الهنـاء
جميلا
فـي
تلاقينـا
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