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صـريف
المنايـا
أم
صـليل
الصوارم
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وليـل
الـردى
أم
نقـع
تلك
الملاحم
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تمـوج
بـه
الهـوج
الخطـوب
وتحتـه
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صــــــواعق
نيـــــران
دواهٍ
دوم
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تصــرفها
فــي
كــل
حصــن
ومعقـل
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أكـف
الـردى
عـن
كـل
أسـفع
جـاثم
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مـدافعها
عمـى
المرامـي
إذا
رمـت
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رمـت
لـم
تمـز
ذا
شـكة
مـن
مسـام
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وإن
غضـبت
فـي
موقـف
الهول
خلتها
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نـبى
الجـن
ثـارت
فاغرات
الخياشم
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يشــول
بأشــلاء
الكمــاة
لعابهـا
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فهـن
بـأعلى
الجـو
بيـن
الحـوائم
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فمـن
هامـة
تهـوى
إلـى
جنـب
حدأة
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وجـذع
تـراه
طـائراً
فـي
القشـاعم
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كـــأن
مراميهــا
ضــمائر
عصــبةٍ
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تجمـــع
فيهـــا
كـــل
بــاغٍ
وآم
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رمـوا
غـرض
العـدون
عـن
قوس
فتنةٍ
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إذا
ضــرمت
كــانت
بــوار
العـوم
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فغــن
حسـبوا
الإسـلام
لانـت
قنـاته
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فمـا
زال
ديـن
اللَـه
صلب
المعاجم
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عـدوا
طـورهم
فاستضعفوا
ليث
غابه
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وعـاثوا
فساداً
في
القرى
والعواصم
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يســومون
ضـعفاها
العـذاب
مبرحـاً
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ويغلـون
بغيـاً
فـي
انتهـاك
المحم
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فمـن
حـرة
تبكـي
عفافـاً
هفـت
بـه
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يـد
البغـي
مـن
تلـك
الأكـف
الظـم
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إذا
صـرخت
فـي
الخدر
لم
تر
ناصراً
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وإن
تســتغث
لــم
تلـق
رحمـة
رام
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وطفـلٍ
يعاني
سكرة
الموت
في
الظبى
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ويكـرع
مـن
كـأس
الـردى
عير
هائم
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إذا
مــا
بكتــه
أمـه
فتكـت
بهـا
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ذبابــة
هنــدي
مـن
الـبيض
صـارم
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بـواك
يـذيب
القلـب
رجـع
أنينهـا
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وتجـري
لهـا
حزنـاً
دمـوع
الغمائم
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فلبيـك
لـبيكم
قضـى
السـيف
حكمـه
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وللسـيف
فـي
يـوم
الوغى
خير
حاكم
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ويــا
رب
عيـن
ضـلت
الحـق
أبصـرت
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سـنا
الحـق
منـه
بيـن
حـد
وقـائم
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تعامى
بنو
البلقان
عن
منهج
النهى
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لخــوض
عبــاب
الفتنــة
المتلاطـم
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وأغـرى
بهـم
أنـا
حفظنـا
عهـودهم
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ولا
عهـــد
إلا
للخفــاف
الصــوارم
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علينــا
عهــود
للمواضــي
قديمـة
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نفيهـا
علـى
رغـم
الأنـوف
الرواغم
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إذا
وردت
هــام
الملــوك
أكفنــا
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بهــن
ظمــاءً
عــدن
غيــر
هـوائم
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وللخيــل
منــا
ذمــة
لا
نضــيعها
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رعينـا
لهـا
حـق
العتـاق
الصـلادم
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نخـوض
بهـا
لـج
المنايـا
عوابسـاً
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ونوطئهــا
هــام
الـذرى
المناسـم
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بكـل
فـتىً
يغشـى
علـى
الليث
غابه
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بصــير
بإرغـام
الليـوث
الضـراغم
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بصــير
بحبــات
القلــوب
ســنانه
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ومخـــذمه
طــب
بضــرب
الجمــاجم
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تســير
المنايــا
ن
ذبـابيه
حفلا
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إلـى
كـل
جيـاش
الحصـا
والزمـازم
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إذا
اقتحـم
الهيجاء
لم
يعد
كبشها
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بصــارمة
مــن
ذي
غراريــن
صـارم
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إذا
خطــرت
زرق
الأســنة
لـم
يـرم
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مجـر
العـوالي
باسـماً
غيـر
سـاهم
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وإن
مـا
تقاضـته
العلا
بـذل
نفسـه
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رأى
بـذلها
في
اللضه
خير
المغانم
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إذا
مـا
اسـتمدوا
للعظائم
أقبلوا
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يمــدون
مــن
أيــد
عـواص
عواصـم
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وإن
عرضــت
غـر
المنـاقب
أسـرعوا
|
إلـى
وردهـا
بالماضـيات
العـزائم
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