|
أرأيــت
يــوم
تحملتــك
القـودا
|
مـن
كـان
منـا
المثقـل
المجهودا
|
|
حملتهــا
الغصــن
الرطيـب
وورده
|
وحملــت
فيــك
الهـم
والتسـهيدا
|
|
وجعلــت
حظـي
مـن
وصـالك
ان
أرى
|
يومــاً
بــه
ألقـى
خيالـك
عيـدا
|
|
لـو
شـئت
أن
أعطـي
حشـاي
صـبابة
|
فـوق
الـذي
بـي
مـا
وجـدت
مزيدا
|
|
أهــوى
ربـاك
وكيـف
لـي
بمنـازل
|
حشــدت
علــي
ضــغائباً
وحقــودا
|
|
أمعـرس
الحييـن
مـا
لـك
لـم
تحب
|
مضــنى
ولــم
تسـمع
لـه
منشـودا
|
|
أأصــمك
الاضــغال
يــوم
تحملـوا
|
ام
صــرت
بعـد
الضـاعنين
بليـدا
|
|
قـد
كنـت
توضـح
بالأسـنة
والظبـا
|
معنــى
وتقضــي
موعــداً
ووعيـدا
|
|
حيـث
الشـموس
على
الغصدن
لم
تكن
|
عـــاينت
إلا
اوجهـــاً
وقـــدودا
|
|
مـن
سـام
عـزك
فاستباح
من
الشرى
|
آداده
ومـــن
الخــدور
الغيــدا
|
|
انـي
انتفـى
ذاك
الجمـال
واصبحت
|
ايامــك
الــبيض
الليـالي
سـودا
|
|
فاسـمع
أبثـك
اننـي
أنـا
ذلك
ال
|
كمــد
الـذي
بـك
لا
يـزان
عميـدا
|
|
مـا
أبعـدت
منـك
القريـب
حـوادث
|
عرضــت
ولا
قربــن
منــك
بعيــدا
|
|
لا
تحســبنه
هـوى
يحـال
وان
غـدا
|
حـــظ
الشــقي
تفرقــاً
وصــدودا
|
|
فلأنــت
أنــت
وان
عـدت
بـك
نيـة
|
عــن
نـاظري
وتركـن
دونـك
بيـدا
|
|
وان
ابحـــت
تجلـــدي
فلطالمــا
|
الفيتنــي
عنــد
الخطـوب
جليـدا
|
|
أو
رحـت
تنكـر
صـبوة
قـامت
علـى
|
اثاتهــا
فــرق
النحــول
شـهودا
|
|
فلقبلمـا
الـتزم
العنـاد
معاشـر
|
جحــدوا
عليــاً
يـومه
المشـهودا
|
|
اخـذوا
بمسـرور
السـراب
وجانبوا
|
عــذباً
يميــر
الوافـدين
بـرودا
|
|
مصــباح
ليلتهــا
صـباح
نهارهـا
|
يمنــى
نـداها
تاجهـا
المعقـودا
|
|
مطعانهـــا
مطعامهــا
مصــدامها
|
مقــدامها
ضــرغامها
المعهــودا
|
|
بشــر
أقــل
صــفاته
ان
عـاينوا
|
منهــن
مـا
ظنـوا
بـه
المعبـودا
|
|
ضــلت
قريــش
كــم
تقيـس
بسـابق
|
الحلبـات
ملطـوم
الجـبين
مـذودا
|
|
يــا
صـاحب
المجـد
الـذي
لجلالـه
|
عنــت
البرايــا
مبغضـاً
وعنيـدا
|
|
لــك
غـر
افعـال
اذا
اسـتقريتها
|
أخــذت
علــي
مغــاوراً
ونجــودا
|
|
وصــفات
فضــل
اشـكلت
معنـى
فلا
|
اطلاق
يكشـــــفها
ولا
تقييــــدا
|
|
ومراتــــب
قلـــدتها
بمنـــاقب
|
كالعقـد
تلبسـه
الحسـان
الخـودا
|
|
مـا
مـر
يومـك
ابيضـاً
عند
الندى
|
إلا
انثنــى
بـدم
العـدا
خنديـدا
|
|
احســبته
بابيــك
وجــه
خريــدة
|
فكســوت
أبيــض
خـدها
التوريـدا
|
|
أنــي
يشــق
غبــار
شـعوك
معشـر
|
كنـت
الوجـود
لهـم
وكنـت
الجودا
|
|
يجنــون
مــا
غرسـت
يـداك
قضـية
|
القـت
علـى
شـهب
العقـول
خمـودا
|
|
أنــي
هـم
والخيـل
ينـثر
وقعهـا
|
نقعــاً
تظــن
بـه
السـما
كديـدا
|
|
ومواقــف
لـك
هـون
احمـد
جـاورت
|
بمقامــك
التعريــف
والتحديــدا
|
|
فعلـى
الفـراش
مبيت
ليلك
والعدى
|
تهــدي
اليــك
بوارقــاً
ورعـودا
|
|
فرقــدت
مثلــوج
الفـؤاد
كأنمـا
|
يهـدي
القـراع
لسـمعك
التغريـدا
|
|
فكفيــت
ليلتــه
وكنــت
معرضــاً
|
بـــالنفس
لا
فشـــلا
ولا
رعديــدا
|
|
واستصـبحوا
فـرأوا
دويـن
مرادهم
|
جبلا
اشـــم
وفارســـاً
صـــنديدا
|
|
رصدوا
الصباح
لينفقوا
كنز
الهدى
|
أو
مـا
دروا
كنـز
الهـدى
مرصودا
|
|
وغــداة
بــدر
وهــي
أم
وقــائع
|
كــبرت
ومــا
زالـت
لهـن
ولـودا
|
|
قــابلتهن
فلــم
تــدع
لعقودهـا
|
نظمـــاً
ولا
لنظـــامهن
عقيـــدا
|
|
فالتـاح
عتبـة
ثاويـاً
بيميـن
من
|
يمنـــاه
أردت
شـــيبة
ووليــدا
|
|
ســـجدت
رؤســهم
لــديك
وانمــا
|
كــان
الـذي
ضـربت
عليـه
سـجودا
|
|
وتوحـــدت
بعــد
ازدواج
والــذي
|
نــدبت
إليـه
لتهتـدي
التوحيـدا
|
|
وقضــية
المهـراس
عـن
كثـب
وقـد
|
عــم
الفــرار
اسـاوداً
واسـاودا
|
|
ولـى
بهـا
الظعن
الدراك
ولم
تزل
|
إذ
ذاك
مبـــدى
كـــرة
ومعيــدا
|
|
فشـددت
كـالليث
الهزبـر
فلم
تدع
|
ركنـــاً
لجيــش
ضــلالة
مشــدودا
|
|
وكشــفتهم
عــن
وجـه
ابيـض
اجـد
|
لــم
يعــرف
الادبـار
والتعريـدا
|
|
وعشــية
الاحــزاب
لمــا
اقبلــت
|
كالســيل
مفعمــة
تقـود
القـودا
|
|
عـدلت
عـن
النهـج
القويم
واقبلت
|
حلــف
الضــلال
كتائبــاً
وجنـودا
|
|
فــابحت
حرمتهــا
وعـدت
بكبشـها
|
فـي
القـاع
تطعمـه
السباع
حنيدا
|
|
وبنــي
قريضــة
والنضـير
وسـلعم
|
والـــوادييين
وخثعــم
وزبيــدا
|
|
مزقــت
جيــب
نفــاقهم
وتركتهـم
|
أممــاً
لعاريــة
السـيوف
غمـودا
|
|
وشــللت
عشـراً
فاقتنصـت
رئيسـهم
|
وتركــت
تســعاً
للفــرار
عبيـدا
|
|
وعلــى
حنيــن
أيـن
يـذهب
جاهـد
|
لمـــا
ثبــت
بــه
وراح
شــريدا
|
|
ولخيـــر
خيـــر
يصـــم
حــديثه
|
ســمع
العــدى
ويفجـر
الجلمـودا
|
|
يــوم
بــه
كنـت
الفـتى
الفتـاك
|
والكــرار
والمحبــو
والصـنديدا
|
|
مـن
بعـد
مـا
ولـى
الجبان
براية
|
الايمــان
تلتحـف
الهـوان
بـرودا
|
|
ورأتــك
فــاهتزت
بقربــك
بهجـة
|
فعــل
الـودود
يعـاين
المـودودا
|
|
فنصـــرتها
ونضـــرتها
فكأنهــا
|
غصــن
يرنحــه
الصــبا
املــودا
|
|
فغــدت
ترقــل
والقلــوب
خوافـق
|
والنصــر
يرمــي
نحـول
الاقليـدا
|
|
فلقيتهــا
وعقلــت
فارســها
ولا
|
عجـب
إذا
افـترس
الهزبـر
السيدا
|
|
ويــل
أمـه
أيظنـك
النكـس
الـذي
|
ولــى
غـداة
الطعـن
يلـوي
جيـدا
|
|
وتبعتهــا
فحللــت
عقـدة
تاجهـا
|
بيــد
ســمت
ورتاجهـا
الموصـودا
|
|
وجعلتــه
جســراً
فقصــر
فاغتـدت
|
طــولى
يمينــك
جسـرها
الممـدوا
|
|
وابحـت
حصـنهم
الشـهيد
فلـم
يكن
|
حصــن
لهـم
مـن
بعـد
ذاكَ
مشـيدا
|
|
فهـــوت
لعزتـــك
الملائك
ســجداً
|
تـولي
الثنـاء
وتكـثر
التمجيـدا
|
|
وحـديث
أهـل
النكـث
عسـكر
عسـكر
|
بهـم
البهيمـة
جنـدها
المحشـودا
|
|
لاقــاك
فارســها
فبغــدد
هاربـاً
|
لـو
كـان
محتـوم
القضـا
مـردودا
|
|
وعلـى
ابـن
هنـد
طـار
منك
باشأم
|
يــوم
غـدا
لبنـي
الـولاء
سـعودا
|
|
الفــى
جحـاش
الكرمليـن
فقـادهم
|
جهلاً
فـــابئس
قـــائداً
ومقــودا
|
|
فغــدوت
مقتنصــاً
نفــوس
كمـانه
|
لِلّـــه
مقتنــص
يصــيد
الصــيدا
|
|
حتى
إذا
اعتقد
الفنا
ورأى
القنا
|
مذرويــة
ورأي
الحســام
حديــدا
|
|
وبـدا
لـه
العضـب
الـذي
من
قبله
|
قــد
فــل
آبــاء
لــه
وجــدودا
|
|
رفــع
المصــاحف
لا
ليرفعهـا
علا
|
لكــن
ليخفــض
قــدرها
ويكيــدا
|
|
فجنــى
بهــا
عـز
الأمـان
وخلفـه
|
يــوم
يجرعــه
الشــراب
صــديدا
|
|
وكـذاك
أهـل
النهـر
ساعة
فارقوا
|
بفراقهـــم
لجلالـــك
التأييــدا
|
|
فوضــعت
ســيفك
فيهــم
فابـادهم
|
تلفــاً
فــديتك
متلفــاً
ومعيـدا
|
|
ولقــد
روى
مســروقهم
عــن
أمـة
|
والحــق
ينطــق
منصــفاً
وعنيـدا
|
|
قــالت
هـم
شـر
الـورى
ومبيـدهم
|
خيـر
الـورى
أكـرم
بـذاك
مبيـدا
|
|
ســبقت
مكارمـك
المكـارم
مثلمـا
|
ختمــت
لعمــر
فخـارك
التأييـدا
|
|
مــازلت
اســئل
فيـك
كـل
قديمـة
|
عـاد
القـديم
وقبـل
عـاد
ثمـودا
|
|
الفـــاك
آدم
آدمـــاً
لا
صـــالح
|
يــدري
بــذاك
ولا
نزيلــك
هـودا
|
|
إنــي
لأعـذر
حاسـديك
علـى
العلا
|
وعلاك
عــذري
لــو
عــذرت
حسـودا
|
|
فليحســد
الحســاد
مثلــك
أنــه
|
شـرف
يزيـد
علـى
المـدى
تجديـدا
|
|
مــا
انصــفتك
عصـابة
جهلتـك
إذ
|
جعلـت
لـذاتك
فـي
الوجـود
نديدا
|
|
ثـم
ارتقـت
حـتى
ابتـك
رضـى
بمن
|
لـم
يـرض
كعبـك
أن
يـراه
صـعيدا
|
|
ظلــت
ادلتهــا
أتبــدل
بـالعمى
|
رشــداً
وبالعـدم
المحـال
وجـودا
|
|
باعتــك
وابتــاعت
بجـوهر
ذاتـك
|
العلــوي
ســفلى
المـبيع
رديـدا
|
|
وبمــا
اسـرت
مـن
قـديم
نفاقهـا
|
وجــرت
عليــه
طارفــاً
وتليــدا
|
|
بلغ
المرادي
المراد
واورد
الحسن
|
الــردى
وقضــى
الحســين
شـهيدا
|
|
تـاللَه
لا
أنـس
ابـن
فاطم
والعدى
|
أبــدت
اليــه
ضــغائناً
وحقـودا
|
|
غـدروا
بـه
إذ
جـائهم
من
بعد
ما
|
أســدوا
اليــه
مواثقـاً
وعهـودا
|
|
قتلـوا
بـه
بـدراً
فـاظلم
ليلهـم
|
فغـدوا
قيامـاً
فـي
الظلال
قعـودا
|
|
فحمـوه
أن
يـرد
المبـاح
وصـيروا
|
ظلمــاً
لـه
ظـامي
الرمـاح
ورودا
|
|
فســمت
إليـه
أماجـد
عرفـوا
بـه
|
قصـد
الطريـق
فـادركوا
المقصودا
|
|
نفــر
حـوت
جمـل
الثنـا
وتسـنمت
|
قلــل
المعــالي
والـداً
ووليـدا
|
|
مـن
تلـق
منهـم
تلـق
كهلاً
أو
فتى
|
علـم
الهـدى
بحر
الندى
المورودا
|
|
وتبــادرت
طلــق
الأســنة
لا
تـرى
|
الغمــرات
إلا
المائسـات
الغيـدا
|
|
وكأنمــا
قصــد
القنـا
بنحـورهم
|
درراً
يفصــلها
الطعــان
عقــودا
|
|
واســتنزلوا
حلــل
العلا
نـاحلهم
|
غرفــانه
فغــدى
النـزول
صـعودا
|
|
فتظــن
عينــك
انهـم
صـرعى
وهـم
|
فــي
خيــر
دار
فــارهين
رقـودا
|
|
وأقـام
معـدوم
النضـير
فريد
بيت
|
المجــد
معــدوم
النضـير
فريـدا
|
|
يلقــى
القفـار
صـواهلاً
ومناصـلا
|
ويــرى
النهــار
قسـاطلاً
وبنـودا
|
|
سـاموه
أن
يرد
الهوان
أو
المنية
|
والمســــود
لا
يكـــون
مســـودا
|
|
فانصــاع
لا
يعبـأ
بهـم
عـن
عـدة
|
كــثرت
عليــه
ولا
يخــاف
عديـدا
|
|
يلقـى
الكمـاة
بـوجه
ابلـج
ساطع
|
فكــأنهم
أمــوا
نــداه
وفــودا
|
|
يسطوا
فتقى
البيض
تغرس
في
الطلى
|
فتعــود
قائمــة
الــرؤس
حصـيدا
|
|
أســد
تظــل
لـه
الاسـود
خوافقـاً
|
فـترى
الفتى
يحكي
الفتاة
الرودا
|
|
الــبرق
صــارمه
ولكـن
لـم
يسـق
|
للويــــل
إلا
هامـــة
ووريـــدا
|
|
والصــقر
لهـدمه
ولكـن
لـم
يصـد
|
إلا
قلوبـــاً
أو
غـــرت
وكبــودا
|
|
بـــأس
يســـر
محمـــد
ووصـــيه
|
ويغيـــض
نغــل
شــمية
ويزيــدا
|
|
حــتى
إذا
حـم
والحمـام
وآن
لـه
|
تلقـــى
عمـــاداً
للعلا
وعميــدا
|
|
عمــدت
لــه
كـف
العنـاد
فسـددت
|
سـهماً
عـدى
التوفيـق
والتسـديدا
|
|
فثــوى
يمشــتن
النــزال
مقطــع
|
الاوصــال
مشـكور
الفعـال
حميـدا
|
|
لِلّــه
مطــروح
جـوت
منـه
الـثرى
|
نفــس
العلا
والســؤدد
المعقـودا
|
|
ومبـــدد
الاوصـــال
لازم
حزنـــه
|
شــمل
الكمــال
فلازم
التبديــدا
|
|
ومجــرح
مــا
غيـرت
منـه
القنـا
|
حســناً
ولا
أخلقــن
منــه
جديـدا
|
|
قـد
كـان
بدراً
فاغتدى
شمس
الضحى
|
مـذ
البسـته
يـد
الـدماء
لبـودا
|
|
تحمــي
أشــعته
العيــون
فكلمـا
|
حــاولن
نهجــاً
خلنــه
مســدودا
|
|
وتظلــه
شــجر
القنـا
حـتى
بـدت
|
ارســال
هــاجرة
إليــه
بريــدا
|
|
وثواكـل
فـي
النـوح
تسـعد
مثلها
|
أرأيــت
ذا
ثكــل
يكــون
سـعيدا
|
|
حنــت
فلــم
تـر
مثلهـن
نوائحـاً
|
إذ
ليــس
مثــل
فقيــدهن
فقيـدا
|
|
لا
العيــس
تحكيهـا
إذا
حنـت
ولا
|
الورقـاء
تحسـن
عنـدها
الترديدا
|
|
ان
تنــع
اعطــت
كـل
قلـب
حسـرة
|
أو
تــدع
صـدعت
الجبـال
الميـدا
|
|
عبراتهـا
تجـي
الـثري
لو
لم
تكن
|
زفراتهــا
تــدع
الريـاض
همـودا
|
|
وغـدت
اسـيرة
خـدرها
ابنـة
فاظم
|
لــم
تلـف
غيـر
اسـيرها
مصـفودا
|
|
تــدعو
بلهفـة
ثاكـل
لعـب
الأسـى
|
بفـــؤاده
حــتى
انطــوي
مفئودا
|
|
تخفـي
الشـجا
جلداً
فان
غلب
الأسى
|
ضــعفت
فابـدت
شـجوها
المكمـودا
|
|
نــادت
فقطعــت
القلـوب
لشـجوها
|
لكمــا
ايتظــم
البيــان
فريـدا
|
|
انسـان
عينـي
يـا
حسـين
يـا
أخي
|
أملــي
وعقــد
جمـاني
المنظـودا
|
|
مـالي
دعـوت
ولا
تجيـب
ولـم
تكـن
|
عــودتني
مــن
قبــل
ذاك
صـدودا
|
|
ألمحنــة
شــغلتك
عنــي
أم
قلـى
|
حاشــاك
انــك
مــا
برحـت
ودودا
|
|
أفهــل
ســواك
مؤمــل
يـدعى
بـه
|
فيجيــب
داعيــة
ويــورق
عــودا
|
|
ان
اســتعن
قــامت
إلــي
ثواكـل
|
لــم
تـدر
إلا
النـوح
والتعديـدا
|
|
وكفيلهــا
فــوق
المطــي
معالـج
|
مــن
ضــره
ومـن
الحديـد
قيـودا
|
|
أوحيـد
أهـل
الفضـل
يعجـب
جاهـل
|
ان
تمـس
مـا
بيـن
الطغـام
وحيدا
|
|
ويلام
غيـــث
مــا
ســقاك
وانــه
|
مــن
بحـر
جـودك
يسـتمد
الجـودا
|
|
قـد
كـان
يعتـب
عنـد
تركك
ضامياً
|
لـو
كـان
غيـرك
بحـره
المـورودا
|
|
يـا
ابـن
النـبي
ليـة
مـن
مـدنف
|
بعـــدك
لا
كـــذباً
ولا
تفنيـــدا
|
|
مـا
زالَ
سـهدي
مثـل
حزنـي
نابتاً
|
والغمـض
مثـل
الصـبر
عنـك
طريدا
|
|
تـأبى
الجمـود
دمـوع
عيني
مثلما
|
يـأبى
حريـق
القلـب
فيـك
حمـودا
|
|
والقلـب
حلـف
الطـرف
فيـك
فكلما
|
أســبلت
هــذا
ازداد
ذاك
وقـودا
|
|
طـال
الزمـان
علـى
لقاك
فهل
قضى
|
للحــزن
والمحــزون
فيـك
خلـودا
|
|
أفلـم
يحـن
حيـن
المسـرة
ان
ترى
|
عينــاني
ذاكَ
الصـارم
المغمـودا
|
|
وفصــــيحة
عربيــــة
مأنوســـة
|
لــم
تــألف
الوحشـي
والتعقيـدا
|
|
ما
سامها
الطائي
الصغار
ولا
الذي
|
قــد
يممتــه
خالــد
بـن
يزيـدا
|
|
انزلتهـا
بجنـاب
ابلـج
لـم
يخـب
|
قصـــد
لــديه
ولا
يــذل
قصــيدا
|
|
كــانت
بــه
جهـد
المقـل
وانمـا
|
عـذر
الفـتى
أن
يبلـغ
المجهـودا
|
|
لـو
شـاء
يمـدح
بالـذي
هـو
أهله
|
حصــر
الانـام
فمـا
سـمعت
نشـيدا
|