|
هنـا
الربـع
لا
بيـن
الدخول
فحومل
|
فعطفـاً
علينا
يا
ابنة
القوم
وانزل
|
|
صــحبتك
فاستصــحبت
عــذلك
جـاهلاً
|
كـــأني
لــم
أصــحبك
الا
لتعــذلي
|
|
دعينــي
واشــجاني
اكابــد
حملهـا
|
فــان
الـذي
بـي
فـوق
رضـي
ويـذبل
|
|
تلومين
دمعي
يا
ابنة
القوم
ان
جري
|
علـــى
طلــل
عــاف
ورســم
معطــل
|
|
تقــولين
تبكــي
منـزلاً
بـان
أهلـه
|
ولــم
تعلمــي
يــا
هـذه
أي
منـزل
|
|
سـلي
يـا
ابنـة
الاقـوام
ثـم
تبيني
|
فـان
سـاغ
حكـم
اللوم
عندك
فاعذلي
|
|
وكيـف
ادخـار
الـدمع
عـن
خير
منزل
|
تضــمن
مـن
خيـر
الـورى
خيـر
نـزل
|
|
مـن
الـبيض
بسـامون
فـي
كـل
معـرك
|
مـن
الـبيض
مشـغول
الفراغين
ممتلي
|
|
بنـو
الـوحي
تتلـى
والمناقب
تجتلي
|
وغـــر
المســـاعي
اولا
بعـــد
اول
|
|
لهــم
كــل
مجــد
شـامل
كـل
رفعـة
|
لهــا
كــل
حمــد
شـاغل
كـل
محفـل
|
|
بنـو
المصـطفى
الهـادي
وحسبك
نسبة
|
تفــرع
عــن
اســمي
نــبي
ومرســل
|
|
ســـحائب
افضــائل
بــدور
فضــائل
|
كــــواكب
اجلال
بحــــور
تفضـــلي
|
|
غيـوث
ليـوث
يـومي
السـلم
والـوغى
|
ممــاة
حيــاة
للمعــادي
وللــولي
|
|
فاكنـافهم
خضـر
الربـا
يـوم
فاقـة
|
واسـيافهم
حمـر
الظبـا
يـوم
معضـل
|
|
وانـــوارهم
فتـــح
لرشــد
موفــق
|
وآثـــارهم
حتـــف
لغـــي
مضـــلل
|
|
اذا
سـوبقوا
يوم
الفخار
انتهت
بهم
|
ســوابق
للمجــل
القــديم
المؤثـل
|
|
تراهـــم
ركوعــا
ســجداً
واكفهــم
|
نوافلهــــا
مخلوطـــة
بالتنفـــل
|
|
وعيـن
العلـى
والعلم
فيهم
فهل
ترى
|
ســوى
لا
ولــم
للطــالب
المتوغــل
|
|
مناجيـــد
ازوال
اماجيـــد
ســادة
|
صـــناديد
ابطـــال
ضــراغم
جفــل
|
|
فســل
بهـم
ركـب
البلا
سـاعة
البلا
|
انـاخ
والفـي
الخطـب
فيهـا
بكلكـل
|
|
فهـل
ضـاق
ذرعـاً
بالفنـا
كـل
أمثل
|
وقـد
ضـاق
ذرعـاً
بالقنـا
كـل
هوجل
|
|
سـروا
يقطعون
الخيل
والليل
والفلا
|
بعــزم
مـتى
يستسـهل
الصـعب
يسـهل
|
|
يـــؤم
بهـــم
طلاب
مجـــد
مؤثـــل
|
تــورثه
عــن
امثــل
بعــد
امثــل
|
|
طلابــا
بصــدر
الرمـح
يرعـف
انفـه
|
دمــا
لا
بكــف
الســائل
المتوســل
|
|
غـــداة
رمتــه
آل
حــرب
بحربهــا
|
وقـادت
آليـه
القـود
فـي
كـل
جحفل
|
|
غـداة
التقـى
الجمعان
في
طف
كربلا
|
ومــا
كـربلا
عـن
يـوم
بـدر
بمعـزل
|
|
وقـد
سـدت
الآفـاق
بـالنقع
والـوغى
|
فلـــم
تــر
إلا
جحفلاً
تحــت
قســطل
|
|
وقــد
زعزعــت
ريــح
الجلاد
فهيجـت
|
ركـــام
ســـحاب
بالمنيــة
مســبل
|
|
وقــامت
رجـال
اللَـه
مـن
دون
آلـه
|
تشـب
لظـى
الحـرب
العـوان
وتصـطلي
|
|
بكـل
خفيـف
الحـاذ
مـن
فـوق
سـابق
|
تخـال
بـه
الفتخـاء
مـن
تحـت
اجدل
|
|
فكــم
مــارق
بالرمـح
ثغـرة
مـارق
|
وكــم
فاصــل
بالسـيف
هامـة
فيصـل
|
|
فطـارت
فـراخ
الهـام
إذا
طلقت
بها
|
اكفهـــم
عقبـــان
بيـــض
وانصــل
|
|
وبــان
لهــم
ســر
هنــاك
فعجلـوا
|
سـرى
الـبين
نحـو
المنـزل
المتأهل
|
|
فنـاموا
علـى
الرمضـاء
بيـن
معفـر
|
بهـا
الـوجه
أو
دامـي
الجبين
مرمل
|
|
وضــل
أخــو
الهيجــاء
يحمـل
شـكة
|
علــى
ســابح
مــوج
المنيـة
هيكـل
|
|
أخــو
همــم
يــاتي
بكــل
عجيبــة
|
تــروق
لعيــن
النــاظر
المتأمــل
|
|
تـرى
منـه
بـدراً
قـد
تسـنم
شـاهقاً
|
تســربل
بحــراً
حــاملاً
متـن
جـدول
|
|
وكـــر
بمشـــتن
المكـــر
بصــارم
|
تبــادره
الهامـات
مـن
غيـر
أرجـل
|
|
فـــاوثر
طعنـــاً
كــالرحيق
معجلا
|
وثنـــى
بضــرب
كــالحريق
مرعبــل
|
|
تـراه
كـأن
الطعـن
بهـدي
له
المنى
|
فيبــدوا
بــوجه
الباسـم
المتهلـل
|
|
كــأن
ظلام
النقــع
يبــدي
لعينــه
|
ضـــياء
صـــباح
بالمســرة
مقبــل
|
|
كـأن
المنايـا
السـود
بيـض
خـرائد
|
تعـاطيه
بعـد
الهجـر
عـذب
المقبـل
|
|
واوتـــر
رجـــس
نحـــوه
بمراشــة
|
كــثيرة
وبــل
الشـر
عيطـاء
عيطـل
|
|
وثنـــى
ســـنان
نحـــوه
بســنانه
|
فجــد
لــه
لهفــي
لــه
مـن
مجـدل
|
|
واقبـــل
شــمر
حيــن
دبــر
حظــه
|
فشــمر
عـن
ماضـي
الغراريـن
منصـل
|
|
وادبــر
ينحــو
الفاطميــات
مهـره
|
بعولـــة
عـــان
ناعيــاً
للمعــول
|
|
فقـامت
بها
الآمال
تعدوا
إلى
الروى
|
ســراعاً
ولا
يــدرين
حــال
المؤمـل
|
|
فابصــرن
رب
الجــود
خلـواً
جـواده
|
وطـود
العلـى
قد
حطه
الحتف
من
علي
|
|
فجئن
فـــالفين
الضـــبابي
ســيفه
|
يفصــل
مـن
نحـر
الهـدى
كـل
مفصـل
|
|
فعالقـــة
اذيـــال
شــمر
تــذوده
|
دفاعــاً
وطــوراً
بالبكـا
والتوسـل
|
|
تقـول
لـه
يـا
شـمر
والدمع
قد
جرى
|
علــى
خـدها
مثـل
الجمـان
المفصـل
|
|
أبــا
شـمر
دعنـي
والحـبيب
لعلنـي
|
أَبـــل
غليلاً
منــه
قبــل
التحمــل
|
|
ولا
تحرمنـــي
ســاعة
قــرب
ســيدي
|
فانـك
عمـر
الـدهر
يـا
شـمر
مثكلي
|
|
أيـا
شـمر
مـن
للجـود
بعـد
وجـوده
|
ومــن
لبنــي
الآمـال
بعـد
المؤمـل
|
|
أيـا
شـمر
مـن
للفضل
يرعاه
ان
تكن
|
قطعــت
بحــد
الســيف
راس
المفضـل
|
|
ومــرت
تنــادي
السـبط
وهـو
مجـدل
|
وتنـــدبه
يـــا
مـــوئلي
ومؤمــل
|
|
تقـول
ألا
يـا
واحداً
نسجت
له
الصبا
|
والظبـــا
بـــردي
نجيــع
وجنــدل
|
|
ويــا
واحـداً
مـا
للمسـاكين
غيـرة
|
اذا
مــا
اثــارت
قســطلاً
أم
قسـطل
|
|
ويـا
ماجـداً
ان
هجـر
الخطب
واغتدت
|
تريــد
اليتـامى
عنـدها
ظـل
مـوئل
|
|
ويــا
منيـة
السـارين
حيـن
يلفهـم
|
بليلان
مـــن
ظلــي
ســيقط
وشــمأل
|
|
ويــا
حسـناً
قـد
غـاب
عنـي
جمـاله
|
أرانـي
قبيحـاً
فيـه
حسـن
التجملـي
|
|
لتبـك
المعـالي
بعـد
يومـك
شـجوها
|
بكــاء
العطايـا
والنـوال
المعجـل
|
|
فقـل
لبنـي
الحاجـات
خلو
عن
السرى
|
وقطــع
الفيــافي
مجهلا
بعـد
مجهـل
|
|
وقـل
للمذاكي
الجود
لا
تصحبي
الوغى
|
ولا
تركضــي
فــي
جحفـل
تحـت
قسـطل
|
|
وقـل
للمطايـا
لسير
ما
انت
والفلا
|
فلا
ضـــل
منهـــال
ولا
ضــل
منهــل
|
|
وقــل
للـوغى
صـبراً
فلا
رفـع
قسـطل
|
ولا
ركـــض
فرســان
ولا
ركــز
ذبــل
|
|
وقـل
لليتـامى
والايـامي
قضـى
الذي
|
عليــه
عيــال
كــل
عــاف
ومرمــل
|
|
وقــل
لعلــوم
الحـق
ويحـك
بعـدها
|
مــن
المعتــدى
والجاهـل
المتعقـل
|
|
فلا
دفــع
ايــراد
ولا
دفــع
مبهــم
|
ولا
كشـــف
اجمــال
ولا
حــل
مشــكل
|
|
اتـــتركني
مـــا
بيــن
لاه
ولاعــب
|
وذو
جــدل
لــم
يعـط
نصـفاً
ومبطـل
|
|
مضـى
الماجد
الضرغام
والواحد
الذي
|
تحمــل
مــن
كــل
العلا
كــل
مثقـل
|
|
ربيــع
اليتــامى
المعتفيــن
وكـا
|
فـل
الأيـامي
وامـن
الخايف
المتوجل
|
|
اقـــول
لركــب
كالقســي
تفرقــوا
|
ذرا
مثلهــا
مـن
كـل
وجنـاء
عيهـل
|
|
قفـوا
بـي
اذ
ابـان
الطفوف
واعرضت
|
مخايـــل
ذاك
العــارض
المتجلجــل
|
|
وحلـوا
مـن
الاكـوار
وابتدوا
الثرى
|
فمــا
بعــد
صـدي
للصـدى
ري
منهـل
|
|
وقومـوا
بنـا
يـا
قوم
نبكي
بربعها
|
لاشـــرف
مقتـــول
باشـــرف
منــزل
|
|
لثـاو
علـى
الرمضـاء
لم
يلق
مشفقاً
|
علـى
الـترب
عـار
بـالنجيع
مسـربل
|
|
لهيــف
الحشـى
واري
الفـؤاد
مقطـع
|
بـبيض
الضـبا
نـاء
عـن
الأهـل
مهمل
|
|
مخلا
بقفــــر
مســــتلب
الــــردى
|
تريــب
المحيــا
ميــت
لــم
يغسـل
|
|
ذبيـح
قطيـع
الـراس
ظلماً
من
القفا
|
جريــح
كســير
الظهــر
جسـم
معطـل
|
|
قتيـــل
بلا
ذنـــب
معلــى
براســه
|
علـى
الرمـح
مأسـور
النسـاء
مـذلل
|
|
عليـك
ابـن
خيـر
المرسـلين
تأسـفي
|
وافــراط
احزانــي
ووجــد
يلــذلي
|
|
فليــت
ســهاماً
خــص
نحــرك
وقعـه
|
اصــيب
بــه
دون
البريــة
مقتلــي
|
|
وليت
القنا
المهدى
إلى
نفسك
الفنا
|
شـربت
بـه
وهـو
المنـى
كـاس
حنظـل
|
|
وليـت
العـوادي
عـدن
جسـمي
ففصـلت
|
ســنابكها
مــن
دون
ظهــرك
محملـي
|
|
ومـالي
علـى
مـا
كان
من
فوت
نصركم
|
ســوى
عــبرة
أو
قــرع
سـن
بمفضـل
|
|
وهـل
ينفـع
الراوي
وقد
فاته
الروى
|
تحــدر
دمــع
فــوق
خــديه
مهمــل
|
|
وان
ارج
فيـك
الفـوز
يـا
بـن
محمد
|
فانــك
بــالأمر
الـذي
ترتجـي
ملـي
|
|
وان
اجـر
فـي
مضـمار
مـدحت
فسـكلا
|
فهـل
سـابق
فيمـا
هنـا
غيـر
فسكلي
|
|
ومـا
قـدر
شـعري
في
علاك
وذو
العلى
|
حبـاك
بخيـر
المـدح
فـي
خير
منزلي
|
|
فيهنـى
القـوافي
ان
حـوت
فيك
مدحة
|
ويهنيــك
مــدح
المحكــم
المتنـزل
|