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ودعـوا
الأحيا
وقالوا
هيموا
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إذ
بهــم
ســارت
مطـى
هيـم
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يـا
حداة
الركب
هل
من
وقفة
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حجهـــا
ميقــاته
النعيــم
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كـم
ينـادي
برحيل
في
الحمى
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أخصــــوص
ذاك
أم
تعيــــم
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شـان
آرام
النقى
إن
يشردوا
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فأمســى
شـاردا
إذا
الريـم
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يـا
حمامـا
لحمـام
الألف
قد
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نـاح
نوحـا
دونـه
التهييـم
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نح
وعدد
أنت
مثلي
في
الجوى
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بيــد
أنــي
مـدمعي
مسـجوم
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كــم
ســيوف
فاتكـات
تنضـي
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لظباهـا
فـي
الحشـى
تكليـم
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والمنايـا
انشـبت
أظفارهـا
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رب
ظفــر
فــاته
التقليــم
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يا
صروف
الدهر
رفقا
بالحشى
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ليــت
حـد
المنتضـى
مثلـوم
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أخـري
بعـض
الـورى
أو
قدمي
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شــأنك
التـأخير
والتقـديم
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هـدمت
أركـان
بنيـان
التقى
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ســاء
هــدم
مــاله
ترميـم
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رب
حـبر
حيـث
نـادته
العلى
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أن
ترحــل
ولــك
التكريــم
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فـارق
الـدنيا
ولـبى
ضاحكا
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وبكــاه
العلــم
والتعليـم
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ونعـــاه
للنهــى
معقــوله
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ورثــاه
الفهــم
والتفهيـم
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كــان
ذا
فضـل
إذا
بـاهيته
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زانــه
المنطـوق
والمفهـوم
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نسـب
سـام
إلـى
أوج
العلـى
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لا
يضــاهي
عقــده
المنظـوم
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كـاتب
العليـا
ومـا
وفت
له
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رب
مــال
مــا
لــه
تنجيـم
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قسـم
الـبين
الأسـى
من
بعده
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قســـمة
تحليلهــا
تحريــم
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للجفون
الماء
والقلب
اللظى
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ويحــه
مـا
هكـذا
التقسـيم
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عـد
عـن
ظلمـك
يـا
بين
لنا
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إن
قلـبي
فـي
الهـوى
مظلوم
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بان
من
أهوى
وما
بان
الهوى
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كـم
أقمتـم
يا
شجوني
قوموا
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رحــم
اللــه
تعـالى
تربـة
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ضــم
فيهـا
عظمـه
التعظيـم
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زارهــا
الغيـث
وحـي
حيهـا
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وإليهــا
أهــدي
التســليم
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كعبـة
حجـت
لهـا
سحب
الرضى
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وبهــا
قــد
طـوف
الـترحيم
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يـا
أخلائي
تعـالوا
نبـك
من
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حــل
قــبرا
تربــه
ملثـوم
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عـذب
القلاب
بنيـران
الجـوى
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وهــو
فــي
روضـاته
مرحـوم
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خلــف
الأحـزان
فينـا
ومضـى
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حيـث
طـاب
الشـم
والمشـموم
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فـي
جنـان
قـد
جرت
أنهارها
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ماؤهـا
الجريـال
والتسـنيم
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حكمتـه
العيـن
فـي
ولدانها
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نعـم
عقـبى
الدار
والتحكيم
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وعليـه
الحـور
طـافت
تنجلي
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برحيـــق
صـــرفه
مختـــوم
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بالهـــا
كاســا
فاشــربها
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مــا
بــه
لغــو
ولا
تـأثيم
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نـال
منها
منتهى
الحظ
الذي
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كــان
فيــه
للمنــى
تميـم
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والتهـاني
بالتنـاهي
أرخـت
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قـد
أتـى
الجنـات
إبراهيـم
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