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بحمــد
اللَـه
يهـديك
الشـجي
|
صــلاةً
مــع
ســلامٍ
يــا
نـبي
|
|
بعـــزك
يســـتقيم
الأعــوجي
|
مشـــرَّفُهُ
بنصـــرك
مَشـــرَفيّ
|
|
فيـا
صـدر
الصدور
وأين
مدحي
|
وهــل
يحصـي
معاليـك
الحصـيّ
|
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وتخـدمك
الغـداة
علـى
أصـيل
|
بمـا
تهـوى
تسـابقها
العشـي
|
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وكوكبـك
المنيـر
مضـيء
سـعد
|
بموكبــك
الفريــد
لـه
مضـي
|
|
يعــوّذك
النـدَى
مـن
كـل
نـدٍّ
|
وترقيــك
العنايــة
والرقـي
|
|
لئن
حلاك
جـــوهر
كــل
مجــدٍ
|
ففـي
خجـل
مـن
الصـدر
الحلي
|
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نواصـي
الخيـل
خيـرٌ
وهي
حرز
|
وكنــز
بطنهــا
وهـي
المطـي
|
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وغايـات
الجيـاد
غنـىً
وغنـمٌ
|
وغيّــة
غيرهــا
غــرمٌ
وغــي
|
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فصـادقها
بقـول
اللَـه
فيهـا
|
ورافقهــا
بمـا
قـال
النـبي
|
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فقـد
أوصـى
وأثنـى
واقتناها
|
وشـرَّفها
لـدى
المسـح
الجـثي
|
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فمــا
أذن
العلا
تصـغي
لشـادٍ
|
إذا
صــهل
الأصـم
لـك
الصـفي
|
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لزاد
الراكب
انتسب
ابن
غبرا
|
وأخلفــت
الحــرون
بـه
صـَدِي
|
|
مـن
الشـعب
الـذي
مرعاه
عشبٌ
|
بلا
شـــبع
وتســقيه
الســقي
|
|
فما
بالطرف
يدري
الطرف
أصلاً
|
فكــم
يبــدو
غنـيٌّ
لـي
غـبي
|
|
غــبي
بــاللوامع
مـع
حـروبٍ
|
وبـــالمطلوب
منــه
ألمعــي
|
|
إذا
مـا
احتـاطه
عنـف
مـبين
|
أحــاط
بــوثبه
لطــفٌ
خفــي
|
|
إذا
مـا
أودعتـه
الريـح
سراً
|
تظــاهر
بــالجنون
العنصـري
|
|
أتنكــر
فــي
تنكُّـرِهِ
أصـيلاً
|
وأكـثر
مـا
يغـر
بـك
الـدعي
|
|
وســرج
ضـمن
سـرج
مـن
عسـيب
|
وناصــية
وضــمنهما
الكمــي
|
|
بأحســن
هيئة
خلقــاً
وخلقـاً
|
حديــد
الطـرف
واللـون
بهـي
|
|
عريـــضٌ
أدرعٌ
عـــالٍ
ضــليعٌ
|
وهـــادٍ
مســرعٌ
كــرعٌ
وحــي
|
|
وشــامخ
قــونس
وسـمين
نهـدٍ
|
رقيــق
النحــر
مسـمعه
وَعِـي
|
|
طويــل
الشـدق
للأعلـى
لسـان
|
وفخـــدٌ
أضــلع
جيــدٌ
رقــي
|
|
طويـل
الـذيل
والأذنيـن
قاما
|
صــحيح
الثغــر
والأجفـان
ري
|
|
قصــير
مرفقـاً
عضـداً
قطيفـاً
|
وســاقاً
عصعصــاً
ظهـراً
نمـي
|
|
قصــير
الإيــر
ريّــال
أقضـبٌ
|
أســاجعه
خفــت
نفــسٌ
قــوي
|
|
قصـير
الكعـب
منتصـباً
برجـل
|
سـوى
اليد
أشبه
النسر
الحصي
|
|
صــحيحٌ
وســط
حــافره
بعيـدٌ
|
أليَّتُــــهُ
وحرقفُـــهُ
نســـي
|
|
وبيــن
إليِّــهِ
ويــديه
بعـدٌ
|
وأذنٌ
مـــن
نـــواهقه
عــري
|
|
وشـــامخ
قـــونس
وأوزَّتــاه
|
كنهــد
البكــر
مسـمعُهُ
وعـي
|
|
صـغير
النقرتيـن
علـى
عيـون
|
نوابــع
بعــد
مرآهــا
قصـي
|
|
وأرصــاغ
كصــَنجٍ
مــن
حديـدٍ
|
وســـَبطٌ
شــعرُه
عَــرفٌ
رَخــي
|
|
وبــاطن
حوســة
خــدٌّ
وســاق
|
عـــراض
جبهــة
كفــل
ملــيّ
|
|
وفهــدته
لأعلــى
مــن
قطـاةٍ
|
وفخـــذ
ضــلعه
لحــمٌ
قــوي
|
|
غليـظ
العجـب
والعصـب
أماماً
|
علــى
ركــب
وأفــرق
لا
وطـيّ
|
|
وأشــراف
القطــاة
وحرقفيـه
|
وحــارك
نعــم
شــيات
أشــيّ
|
|
وعــال
بيــن
عينيــه
وكتـفٍ
|
بحــــاركه
لأوســـطه
علـــيّ
|
|
بهــا
رمانــة
الظهـر
نتـوءٌ
|
كسـاه
اللحـم
لا
الشحم
الردي
|
|
وسـتة
أذرع
فـي
الجـري
قسها
|
خلال
قـــوائم
نصـــف
بَطـــيّ
|
|
خفـي
قـوائم
فـي
الخصـر
ضمّت
|
لــه
رجلاه
إن
فتــحَ
الركــيّ
|
|
إذا
مـا
امتـد
فـي
جريٍ
نظيمٍ
|
حـــوافره
كحـــافر
لا
عصــي
|
|
ســما
عنقـاً
يـداه
ذات
بسـطٍ
|
ورجلاه
يقبضـــــها
حـــــثيّ
|
|
تفــوت
ببطنـه
الرجـل
يـديه
|
بشــبرين
علــى
نســب
شــريّ
|
|
أليـف
السـبق
يسـرع
لا
بعتـق
|
علـى
خيـط
مـن
الـذيل
السوي
|
|
كــأن
اللحــم
منبتـه
بعظـم
|
رقيـــق
أن
يكمِّشـــه
وفـــيّ
|
|
يــبيت
مكــانه
إن
لـم
تجئه
|
بــأدنى
إشــارة
لـك
مِطـوَعيّ
|
|
وذو
فقـــرٍ
قويـــاتٍ
بظهــرٍ
|
لحيـــم
مثــل
أضــلاح
رَبِــيّ
|
|
بــبيت
شــكاله
ضــيق
يـداه
|
طــوال
كاللســان
يســيل
ري
|
|
لـدى
الإسـراج
لـم
يزعجه
حزم
|
ولا
وحـــش
ومقـــدام
وفـــي
|
|
تــأدب
عنــد
إلجــام
ومسـح
|
وإعلاف
وشـــــرب
لا
دنـــــي
|
|
حريـصٌ
فـي
الوهـاد
وفي
صعود
|
صــبور
إن
أتــى
ظمــأٌ
وطَـي
|
|
ذكـور
الـبر
يشـقى
مـن
مطاعٍ
|
عليـــه
وإن
يعــاوده
نســيّ
|
|
أصـيل
ليـس
يثنـي
عنـد
شـربٍ
|
يــديه
وبيــن
إخــوته
خـويّ
|
|
صـفي
الجسـم
يرضـى
ثقل
رضوى
|
ويلثــم
نعــل
خفتـه
الصـفي
|
|
يسوسـك
فـي
ارتقـاءٍ
وانحدار
|
ولــو
أن
الشــوى
منـه
شـوي
|
|
يـورّي
في
الدجى
لثم
العوالي
|
فـم
الطعنـات
سـنبكه
الـورِي
|
|
تَهمهُمُــهُ
يهيِّــج
كــل
شــاكٍ
|
لطـول
العهـد
بالهيجـا
بكِـي
|
|
ســرَى
والترهـات
بـه
يراهـا
|
ســـريٌّ
دونـــه
ســكبٌ
ســري
|
|
لســـانٌ
مثـــل
آذان
وجيــدٌ
|
طــوال
وهــو
ذو
كفــل
كُـرَيُّ
|
|
ومنتصــب
العراقيــب
بكعــب
|
صــغير
مــن
نــواهقه
عــري
|
|
ولــم
ينفــر
بخبـط
لا
رمـوحٌ
|
وينكــر
أو
تمــانعه
الشـظي
|
|
ولـم
يطمـح
ولـم
يجفل
ولا
ذو
|
حـــران
ولا
نــدوب
ولا
نعــي
|
|
ولا
الــروّاغ
والغــرّار
فيـه
|
وثـــوبٌ
لا
مريـــض
ولا
أســي
|
|
ولـم
يطـرب
إلـى
حبلـى
فهيم
|
لـدى
التعليـم
يقهـره
الصبي
|
|
وفــي
علــف
وشــرب
غيـر
لاهٍ
|
بغيـــر
لا
يبعـــثره
هنـــي
|
|
بلا
روغ
وزيـــغ
عنــد
مشــي
|
يخــاف
الصــوت
ثبـت
لا
نـزيّ
|
|
يباعــد
بيــن
رجليـه
لبـولٍ
|
ولـم
يرفـص
ولـم
يعضـض
حمـيّ
|
|
فلا
روثــاً
ولا
زفــراً
تعـاطى
|
ومنظـــور
لـــه
ليلاً
قصـــي
|
|
لــه
فـرحٌ
خروجـاً
أو
دخـولاً
|
لمربطـــــه
ولا
لأذى
رعــــي
|
|
شـديد
الحفـظ
مـن
حفـر
كوادٍ
|
ولـم
يوطـأ
لـه
في
السير
شي
|
|
ولـم
يصـهل
ولـم
يشـرب
هواء
|
ولـم
يُحمَـر
ولـم
يقلقـه
كـي
|
|
مـتى
تُرمَـى
سـهامٌ
وهـو
يجري
|
بهــتّ
رماتهــا
سـبق
القسـي
|
|
فيخشـى
فـوقه
الرامـي
فتوراً
|
ليرمـي
الظهـر
مـن
سـهم
هويُّ
|
|
لـه
فـي
الفصد
والتنعيل
صبر
|
ولا
لاك
اللجــــام
ولا
أبـــيُّ
|
|
فمصــريْ
حـاذق
وخـافجي
أصـل
|
وشــاميُّ
القــوَى
أو
مغربــي
|
|
فــذو
نسـل
وأفشـلها
فرنكـي
|
وبرقــي
الهيكلــيُّ
الأخثنــي
|
|
خراســاني
وهنـدي
أو
بُقـاعي
|
حقيــر
الشـكل
أو
تـتري
ردي
|
|
فلا
تقصــص
نواصــيها
وتنقـص
|
مبانيهــا
فيحزنــك
الخصــي
|
|
وفـي
الحركات
والسكنات
منها
|
يكــون
مسيســها
فهــمٌ
ذكـي
|
|
وراع
الفصـل
والأقطـار
واحكم
|
نظافتهــا
فــأنت
بهـا
وصـي
|
|
نزيـــلٌ
بالســلامة
أكرمتــه
|
نــزال
وفـي
ربـا
نجـدٍ
رَبِـيُّ
|
|
صـبور
فـي
الظمـا
وصعود
هضب
|
أليـف
البحـر
لـم
ينفـر
طوي
|
|
ولـم
ينفـر
سـوى
لنجاة
هيجا
|
بضــرب
يــدٍ
إذا
فـر
النجـي
|
|
ودون
النــاس
يعـرف
مقتنيـه
|
ولـم
يعضـض
ولـم
يغـدر
وفـيُّ
|
|
يقاسـي
مـا
يقاسـي
مـن
مطاعٍ
|
عليـــه
وإن
يعــاوده
نَســيُّ
|
|
وأحمــر
أبلــق
قرطــاس
كلا
|
كميــــتٌ
أزرق
أو
أشــــهبي
|
|
غـــوارثه
بفارســـه
محــالٌ
|
مــتى
بـارى
ومـن
عيـب
بـري
|
|
ســريع
الإنبعـاث
بغيـر
عنـفٍ
|
وإجحـــاف
صـــراط
مســـتويُّ
|
|
صــحيح
الثغـر
محمـرٌّ
لسـاناً
|
ونــابع
مقلــة
جفــنٌ
صــفي
|
|
مليـء
الظهـر
لحمـاً
ذا
فقارٍ
|
قويـــات
قـــوائمه
القــوي
|
|
نحيـف
الخـد
ذو
أذنيـن
طالا
|
وقامــا
صــدره
رحــبٌ
رقــيُّ
|
|
جــوادٌ
أجيــدٌ
ظهــرٌ
قصــير
|
لحيـــمٌ
لا
ســـيحمٌ
مخـــبريُّ
|
|
فأمــا
يــافث
نســباً
إليـه
|
فمــن
طــرفٍ
ومـن
طـرف
لـؤي
|
|
فلا
شــاكي
السـلاح
يشـك
فيـه
|
ولا
هــو
مــن
شــكيمته
شـكي
|
|
قصــيدٌ
فــي
صــناعتها
مُقـرٌّ
|
بهــا
المتنــبئ
والبحــتري
|
|
لهــا
فـي
حلبـة
الآداب
سـبق
|
حــذيٌّ
عنــده
الجــاري
خـذيُّ
|
|
قريــرٌ
لفظهــا
لمسـاً
وشـماً
|
وفـي
فـم
سـمع
ذي
بصـرٍ
حَلِـيُّ
|
|
وقلــت
معرِّجــاً
لمـا
هـدينا
|
بخطبتهــا
وأهــديت
الهــديُّ
|
|
أتـى
النـادي
ينـاديه
فـأرخ
|
كتــاب
الخيــل
مهـديه
علـي
|
|
وحمـد
اللَـه
فـي
بدئي
وختمي
|
صــلاتي
مــع
سـلامي
يـا
نـبي
|