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نُـحْ
وقـل
للحُسـَّاب
أن
يستفيقوا
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ولكــلِّ
الكتـاب
صـرتم
تليقـوا
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صــار
تــوفيقكم
لــذلك
حيــاً
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يــوم
أن
صــار
ميتــاً
توفيـق
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عـض
سـنُّ
اليـراع
سـبابةَ
الخـط
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ط
بطــــرسٍ
قميصـــُه
مشـــقوق
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قـل
لعين
الدواة
تبكي
ودمع
ال
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حـبر
فـي
وجنـة
الرقـاع
تريـق
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أيـن
تلـك
الآداب
واللطف
والظر
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ف
وأيــن
التهــذيب
والتـدقيق
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حبـذا
الشـكل
والمزيـة
والعـق
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ل
وذاك
المفهـــوم
والمنطــوق
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واحتجــاج
علـى
الغريـم
غليـظ
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ومــزاج
لــدى
الغــرام
رقيـق
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فـي
بكـائي
عليـك
جفنـي
غريـق
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فـي
عـزائي
إليـك
قلـبي
حريـق
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عــادة
للزمـان
أن
ليـس
يعطـى
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كــل
حـيٍّ
مـن
عمـره
مـا
يليـق
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ويـح
قلـبي
الحزيـن
ويلك
قلباً
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ظــل
للخــافقين
منــه
خفــوق
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أي
لفـــظ
وأي
معنــىً
عــدمنا
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ورفيــــق
محــــرّر
ودقيــــق
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واحـد
العصـر
مات
لا
واحد
النا
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س
بلــى
مـات
ألـفُ
ألـفٍ
يشـيق
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والجديـدان
أخلقـا
ثوب
إنس
ال
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خلــق
وهـو
الـذي
بفـدوٍ
خليـق
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اليد
البيضا
اللسان
الفصيح
ال
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منظـر
النضـر
والقـوام
الرشيق
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والســجايا
منوعــات
المزايـا
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فـي
ليـالي
الخطـوب
بـدر
شريق
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عطــس
الأنــف
فـي
مصـادرة
الأن
|
ف
إذا
شــم
مـن
ذكـاه
النشـوق
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طــل
بكـائي
فطالمـا
أضـحكتني
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منـه
معنـىً
إذا
اعـتراني
حنوق
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كــان
حظـي
ومرجعـي
وارتيـاحي
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نزهـتي
مـدحتي
الصـديق
الصدوق
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فيـه
عيـن
المحابر
ابيضِّي
حزناً
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فلكـــم
جيــبُ
دفــترٍ
مشــقوق
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ليـس
فيمـا
يختـاره
أحمق
الده
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ر
بمــا
اختــار
أننـي
محمـوق
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بعــد
عينــي
تزوجتــه
دمــوعٌ
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حرمـــت
ســـيب
وحلّــت
طلــوق
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تفتــديه
مــن
العيــون
ألـوفٌ
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لــو
يُفـدَّى
مـن
المنـون
صـديق
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دائمـــاً
ســابق
العلاء
وحــتى
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للمنايـــا
وغيـــرُه
مســـبوق
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لـو
يرانـي
لعـاش
أمثـال
توفي
|
ق
لنــا
مــا
عـاش
نسـرٌ
عـتيق
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ليــس
لــي
فـي
تـذكُّريك
ولا
أن
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سـاك
عـونٌ
إلا
البكـا
والشـهيق
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أشـرق
القـبر
يـوم
جئت
ولا
كال
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عيــد
لكــن
بنـاظري
التشـريق
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قــال
رضـوان
أرخـوا
صـار
زاه
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فـــي
نعيمــي
محمــد
توفيــق
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