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وبالحســـنين
الســـيدين
توســـلي
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لجــدهما
فـي
الحشـر
عنـدي
تفـردي
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همــا
قرتــا
عيـن
الرسـول
وسـيدا
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شـباب
الـورى
فـي
جنة
الخلد
في
غد
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وقــال
همــا
يرحانتــاي
أحـب
مـن
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أحبهمــا
فاصــدقهما
الحــب
تسـعد
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همـا
اقتسـما
شـبه
الرسـول
تعادلا
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ومــاذا
عســى
تحصـيه
مهمـا
تعـدد
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فمــن
صــدره
شــبه
الحسـين
رجلـه
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وللحســن
الاعلــى
وحســبك
فاعــدد
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وللحســن
الســامي
مزايــا
كقـوله
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هــو
ابنــي
هـذا
سـيد
وابـن
سـيد
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سيصــلح
رب
العــالمين
بـه
الـورى
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علــى
فرقــة
منهــم
وعظــم
تبـدد
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وان
تطلبـوا
ابنـاً
للنبي
فلن
تروا
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ســواي
مقــال
منــه
غيــر
مفنــد
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أليـس
الـذي
ظهـر
الرسول
قد
ارتقى
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فقــر
ولــم
يعجلــه
وهــو
بمسـجد
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فقــال
لـه
طـال
السـجود
فقـال
لا
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ولكنــه
قــد
خفــت
ان
قمـت
يشـرد
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وان
الحسـين
الصـابر
الحـازم
الذي
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مـتى
تقصـر
الابطـال
في
الحرب
يشدد
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شـبيه
رسـول
الله
في
البأس
والندى
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وخيــر
شــهيد
ذاق
طعــم
المهنــد
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لمصــرعه
تبكــي
الــدموع
بحقهــا
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فللـــه
مــن
جُــرم
وعظــم
تمــرّد
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فبعـــداً
لمــن
يبغضــهم
ويســبهم
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ومـن
سـار
مسـرى
ذلك
المقصد
الردي
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فــدونك
مــن
آل
الرســول
وصــحبه
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منـاقب
مثـل
الـروض
في
زهره
الندي
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هــم
القــوم
آل
الهاشــمي
وصـحبه
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مصــابيح
مــن
يبصـر
سـناها
يسـدد
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ويــا
رب
فــرج
كــل
ضـيق
بمـدحهم
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ووفــق
لمـا
يرضـي
الرسـول
وأرشـد
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وحاشـــاهم
انـــي
أصــوغ
ثنــاهم
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ولم
يشفعوا
لي
في
الذي
قد
جنت
يدي
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وانــي
أرجــو
اننــي
معهــم
غـدا
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وان
لسـت
عنهـم
فـي
الجنـان
بمبعد
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علـى
المصـطفى
والآل
والصـحب
كلهـم
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صــلاة
مــتى
يبلــى
الزمـان
تجـدد
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