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كــن
عارفــا
بوحــدة
الوجــود
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وقامعـــاً
بكـــثرة
الموجـــود
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وميـــز
الحـــادث
مــن
قــديم
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وخلـــص
الثــابت
مــن
مفقــود
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واحــذر
مـن
التبـاس
مـن
تجلَّـى
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بغيـــره
فــي
حالــة
الشــهود
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فوحــدة
الوجــود
فـي
اصـطلاحنا
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كنايـــة
عــن
رؤيــة
الــودود
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بالحس
والذوق
الصحيح
الطاهر
ال
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طهــور
مــن
شــك
ومــن
حجــود
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لا
بخيــال
العقـل
والفكـر
ومـا
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تـــأتي
بــه
طبــائع
الجلــود
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منزهــــاً
مقدســــاً
مســــبحاً
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عــن
كــل
والــد
وعــن
مولـود
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وعــن
دخــول
وخــروج
فـي
سـوى
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وعــن
جميــع
مقتضــى
الحــدود
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وعــن
كمــال
نحـن
نـدريه
وعـن
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نقـــص
وعـــن
زوال
أو
نفـــود
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وإنمــــا
كمــــاله
بمقتضـــى
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مــا
قــاله
عـن
نفسـه
بـالجود
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نعلمـــه
نحـــن
بمــا
علمنــا
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بـــه
مــن
الوفــاء
بــالعهود
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والصــدق
والقيــام
بـالحق
لـه
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علــى
ســبيل
الركــع
الســجود
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مــن
زاد
عجـزاً
عنـه
زاد
علمـه
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بــه
مــدى
الصــدور
والــورود
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يـا
أيهـا
الناظر
بالعقل
احترز
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أن
تفهـــم
المطلــق
بــالقيود
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واصـبر
إلـى
أن
يفتـح
الله
ولا
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تهجـــم
علــى
مرابــض
الأســود
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ودع
علــوم
اللــه
عنـد
أهلهـا
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واردع
حجــا
جاهلــك
المكنــود
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وإن
أردت
فــاترك
الـدنيا
وغـب
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عــن
علمــك
المزخـرف
المرصـود
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وعــدِّ
عــن
جــاهٍ
ومنصــب
وعـن
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أهــل
وعــن
أصــل
وعــن
جـدود
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واقنـع
بمـن
تطلبـه
دون
الـورى
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واخــرج
عــن
القيـام
والقعـود
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واخلـص
لـه
النية
واصبر
واصطبر
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علـــى
مــراده
بــك
المقصــود
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ولا
تظــن
وحــدة
الوجــود
مــا
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تفهــم
مــن
وحــدة
ذا
الوجـود
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تفهـــم
معنـــى
وتقــول
أنــه
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هــو
مــراد
الأكمليــن
القــود
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وليــــس
ذا
مرادهـــم
لأنهـــم
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فــاتوك
فــي
منــابر
الصــعود
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وأنـت
فـي
الحضـيض
مأسور
الهوى
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بشــهوة
كالنــار
فــي
الوقـود
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أســلك
ســبيلهم
وقــل
بقـولهم
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تـــدري
الــذي
دروا
بلا
صــدود
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فـإن
تقـوى
اللـه
مـن
يخلص
بها
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حلــت
عقــال
عقلــه
المعقــود
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هيهـــات
هيــات
لفــرد
واحــد
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يــدخل
فــي
مراتــب
المعــدود
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ومطلـــق
حـــتى
عــن
الإطلاق
لا
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يفهــم
فــي
عقــد
مـن
العقـود
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وأيــن
نــور
الحـق
ممـن
عقلـه
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فــي
ظلمــات
مــن
ســواه
سـود
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إن
المعـــاني
كلهـــا
حــوادث
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منفيــة
عــن
ربنــا
المشــهود
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لأنـــه
مســـبح
عنهـــا
بهـــا
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فـــي
ســـيلان
هـــي
أو
جمــود
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وإنمــا
الأمــر
الــذي
نريــده
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بوحــدة
الوجــود
فـي
المعهـود
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أمــر
عظيـم
خـارج
عـن
كـل
مـا
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تــدري
ذوو
الشــقوة
والســعود
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حقيقــة
تفنـى
الجميـع
إن
بـدت
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للعقـل
عنهـا
العقـل
فـي
رقـود
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ومـن
أتـى
بهـا
عليـه
في
الورى
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بُغِــي
بســوءٍ
وَاِفْتِــرَا
وَعُــودي
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لأنهــا
الســر
الــذي
جـاء
بـه
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نبينـــا
رغمــاً
عــن
الحســود
|
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وهــو
الـذي
فـي
آدم
لمـا
بـدا
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خـــرت
لـــه
الأملاك
بالســـجود
|
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وقــد
أبــى
إبليـس
عـن
سـجوده
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لــــه
فلا
يـــزال
بـــالمطرود
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فيـه
النصـارى
بـالحلول
كفرهـم
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والكفـر
بالتجسـيم
فـي
اليهـود
|
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وعنــه
زاغــت
عصــبة
وألحـدوا
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حــتى
بهــم
آل
إلــى
اللحــود
|
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وقــد
مضــت
نبــوة
بــه
وقــد
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أتـــــت
خلافــــة
بلا
جنــــود
|
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فــي
كــل
عصــر
واحــد
فواحـد
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إلــى
قيــام
السـاعة
الموعـود
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هـذا
المـراد
عنـدنا
بوحـدة
ال
|
وجــود
نتلــوه
علــى
الشــهود
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ليشــهدوا
لنــا
بـه
فـي
موقـف
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يفــي
بـه
الكريـم
فـي
الوعـود
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وتظهـــر
الحجــة
بالشــاهد
أن
|
قــد
بَلَّــغَ
الغـائبَ
ذا
الهجـود
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نحــن
بهــذا
قــائلون
دائمــاً
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ونــــوره
فينــــا
بلا
خمـــود
|
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لا
أننــا
نقـول
بـالمعنى
الـذي
|
تقــول
أهــل
المـذهب
المـردود
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فــالله
مــن
ضــلالهم
يعصــمنا
|
بفتـــح
بــاب
دونهــم
مســدود
|
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ومــن
علينـا
يفـتري
بغيـر
مـا
|
قلنــا
رهيــن
يــومه
المشـهود
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