|
مَا
عسَى
النفسُ
أن
تَنِي
مَا
عساها
|
لَيْــسَ
للنفـس
رادعٌ
عـن
هَواهـا
|
|
تُـورد
المـرءَ
فِي
المهالك
عَسْفاً
|
عِيسـُها
الجهـلُ
والغُـرور
مُناها
|
|
بُســطتْ
نعمــةُ
الإلــه
عَلَيْهَــا
|
فاســتُفوتْ
مدهوشــةً
فِـي
عُلاهـا
|
|
راقَهــا
رونــقُ
الغـرورِ
فظنـتْ
|
ملكَهــا
الأرضَ
والسـماءَ
سـماها
|
|
هَـذِهِ
النفـسُ
دأبُها
الظلم
شَرْعاً
|
يَــا
لَنفـسٍ
مَـا
نَهاهـا
نُهاهـا
|
|
هَـذِهِ
النفـس
إن
تكـن
ذات
وُسـْعٍ
|
جَهِلـــت
أن
يكــون
ربٌّ
ســواها
|
|
هَـذِهِ
النفـس
فِـي
المهالك
تلقى
|
مَـا
دَهاهـا
سـوى
عظيـم
دَهاهـا
|
|
مـا
ثناهـا
زجـرُ
الحوادثِ
دهراً
|
مَـا
ثناهـا
عـن
غَيِّها
مَا
ثناها
|
|
ويـكِ
يَـا
نفـسُ
فالليـالي
عِشار
|
كــم
عجيــبٍ
تَدُسـُّه
فِـي
خِباهـا
|
|
ويـك
يَـا
نفـس
والمنايـا
سِهام
|
فِـي
يـد
الـدهر
للنفـوس
خِباها
|
|
ويــك
يَـا
نفـسُ
لا
يغرنّـك
زهـوٌ
|
مثـل
مَـا
غَـرَّ
حِمْيـراً
فِي
ذُراها
|
|
إن
يكــن
بـالعُلى
رِيـامٌ
تعـدَّت
|
فقَـــديماً
فَخارُهــا
لا
يبــاهَى
|
|
حميـرٌ
ذِروة
السـَّنام
مـن
المـج
|
د
وأعلـى
الأَنـام
قَـدْراً
وجاهـا
|
|
شــَيَّدت
ركــنَ
مجـدِها
واطمـأنتْ
|
فِـي
حِماهـا
المنيـعِ
يَا
لَحِماها
|
|
قِمـــمٌ
للعُلـــى
بناهـــا
رِام
|
زادهــا
حِمْيــرٌ
فـأَعْلى
بِناهـا
|
|
أَســَّس
المجـدُ
ساسـَها
فاسـتقلتْ
|
بســَنا
العـزِّ
والعُلـى
قـدماها
|
|
فتــوالتْ
مـن
الليـالي
عَلَيْهَـا
|
حِقَـــبٌ
تنقضــي
فعَــزَّ
بَقاهــا
|
|
حيــن
عـاثتْ
بنـو
ريـام
فظلـتْ
|
تخضــب
الأرضَ
بالــدماء
يـداها
|
|
لـم
تـول
تقطـع
المَسـالك
بَغْياً
|
كـم
نفـوسٍ
تسـعى
أراقـت
دماها
|
|
كـــم
لُجيــنٍ
وعَســْجَدٍ
نهبتْــه
|
حَلَّلــت
كــل
مَــا
يَحُـلّ
فِناهـا
|
|
كـم
نسـاءٍ
حـرائر
الجيـب
بِيعتْ
|
كــم
يــتيمٍ
حُـرٍّ
يُبـاع
شـَقاها
|
|
ظــل
يـدعو
ويسـتغيث
وكـم
قَـدْ
|
بــات
مــن
ظلمـه
يَعَـضّ
شـِقاها
|
|
مُلـئَ
الصـاع
يَـا
ريـام
فهل
فِي
|
وُسـعِك
اليـوم
مَـا
يـرد
قَضـاها
|
|
هَــذِهِ
نُصــرةُ
الإلــه
بكــف
ال
|
مَلـك
القَـرْم
قَـدْ
أُديـرت
رَحاها
|
|
حكّمتــه
يــدُ
المقـادير
فيمـا
|
شـاء
يقضـِي
مـن
الأمـور
قَضـاها
|
|
ملــكٌ
لـو
يشـاء
للكـون
قَهْـراً
|
مَلَّكتـــه
الملا
جميــعَ
قُواهــا
|
|
ســالمتْه
يـدُ
الليـالي
وألقـت
|
أبـدعُ
الكائنـاتِ
طوعـاً
عَصـاها
|
|
هـو
سـِرُّ
الإلـه
فِـي
الخلق
حتماً
|
هـو
عيـنُ
الوجـود
نـور
سـَناها
|
|
أخــذتْه
حَميــةُ
الــدين
لمــا
|
أَن
طغــت
حميــرٌ
بشــحم
كُلاهـا
|
|
فــأتتْهم
عصــائبُ
اللـه
تَتْـرَى
|
بـــأمير
يشـــَب
حــسَّ
لَظاهــا
|
|
تنهـــبُ
الأرض
تهتِـــك
العِــرض
|
مـن
أديـم
الجِبـال
صـُمَّ
حَصـاها
|
|
فاســتعدتْ
بنــو
ريــام
وظنـت
|
أنمــا
الــدهرُ
لا
يَفُـلُّ
قَناهـا
|
|
مـن
لـكِ
اليـومَ
يَـا
ريام
فهذِي
|
عُصــبة
اللـه
والنفـوسُ
غِـذاها
|
|
عصـبةٌ
سـيفُ
نقمـةِ
اللـه
فِيهَـا
|
رَكْبُهـا
النصـر
والسـيوف
حِذاها
|
|
وعَــد
اللـه
نصـرَ
كـلَّ
مـن
قَـدْ
|
نصــر
اللــهَ
نصــرةً
لا
تضـاهَى
|
|
فـدَنا
الرَّكْـب
ودَجا
الخطْب
وودتْ
|
كــلُّ
نفـس
تـدنو
لقهـرِ
عِـداها
|
|
واسـتدارتْ
رحـى
الحـروب
وولـتْ
|
هربــاً
حميــر
تَــدوس
رِداهــا
|
|
وأَســود
الشــَّراةِ
تـزأر
فِيهَـا
|
مثلَمــا
تـزأر
الليـوثُ
جِـداها
|
|
والأميـرُ
المُطـاع
فِيهَـا
سـليما
|
نُ
بِــهِ
تَعقِـد
المعـالي
لِواهـا
|
|
ذلَّلــت
صــعبَ
كــلِّ
أَرْعَـن
منـه
|
همــةٌ
ينطــح
النجــومَ
سـَناها
|
|
فــرأت
منــه
مَـا
رأتْـه
نـزار
|
لَـمْ
تُطِـق
دفـعَ
بأسـِه
عن
قُراها
|
|
قَــدْ
غـدتْ
بعـد
بأسـِها
ذاتَ
ذل
|
تطلــب
الســِّلْم
لا
يَـردُّ
صـَداها
|
|
كـم
تراهـا
بـالرغم
تطلب
عفواً
|
كــم
تنــادِي
فلا
يُحـاب
نِـداها
|
|
وأتتـــه
بنـــو
ســليم
بــذلٍ
|
تطلـب
العفـوَ
مذ
رأت
مَا
غَشاها
|
|
كــلُّ
نفــسٍ
بِنَــا
تُقـدِّم
دهـراً
|
سـوف
تُجـزَى
بمـا
جنتْـه
يـداها
|
|
ولَنِعْــم
الأميــر
حمـدان
لـولا
|
إنمــا
الظلــم
للنفـوس
بَلاهـا
|
|
غَصــَب
المــالَ
مـالكيه
وأضـحى
|
يمنـع
المسـلمين
قهـراً
عَطاهـا
|
|
فــأدارت
رحــى
الخطـوب
عَلَيْـهِ
|
كـي
تريـه
الخطوبُ
مَا
قَدْ
أراها
|
|
نزعــتْ
ملكَــه
الحـوادث
قَسـْراً
|
وســقته
بالــذل
كــأسَ
طِلاهــا
|
|
وأتــاه
البِلــى
بــبيت
سـليط
|
كَــانَ
فِــي
عــزة
فَحَـلَّ
عُراهـا
|
|
ســَلَّم
الــبيت
عنـوةً
ثُـمَّ
ولَّـى
|
يَعـثر
الـذيل
مـن
أمـور
أتاها
|
|
هكـذا
الـدهرُ
يُمهل
المرءَ
عُذراً
|
ثُـمَّ
يُبـدى
عجائبـاً
قَـدْ
طَواهـا
|
|
فجــديرٌ
بطاعـة
اللـه
مـن
قَـدْ
|
وَلـيَ
الفصـل
فـي
أمـور
نَواهـا
|
|
أصـبح
الـدهرُ
فِـي
يـديه
زِماماً
|
لـو
أراد
السـماءَ
سـَكْناً
رَقاها
|
|
فـانعمِ
البـالَ
مَا
بقيت
ودُم
فِي
|
عــزة
أنــت
شمســُها
وضــُحاها
|
|
ما
حَدا
الركبُ
فِي
الفيافي
وحَنَّت
|
رازمــاتُ
الحُـدا
لنيـل
سـناها
|
|
أو
تنفسـت
حمـائم
الجود
منوقا
|
فيصــل
أنــت
للوفــود
غناهـا
|