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يــا
أخـا
عبـس
الحمـاة
الأنـوف
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والكريــم
الموصــوف
بـالمعروف
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هــزك
الفضــل
والفتـوة
والسـؤ
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دد
والمجــد
كــاهتزاز
السـيوف
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أن
فينــا
مــرزء
تحمــل
الــك
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ل
وتنفــــي
رزيئة
الملهــــوف
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إن
قصــدت
العلـى
فليـس
عجيبـاً
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ليـس
قصـد
الشـريف
غيـر
الشريف
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أنـت
منـا
كـدرة
التاج
في
التا
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ج
ومثــل
الربيـع
حـذو
الخريـف
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أنــت
دون
التوصـيف
فخـر
لعبـس
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لــم
تــزد
فــي
علاك
بالتوصـيف
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رقــم
المجــد
للســراة
حروفـاً
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وبيمنــاك
رقــم
تلــك
الحـروف
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قــد
ملأت
الزمـان
مجـداً
وفضـلاً
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قـف
قليلاً
قـد
ضـاق
وسـع
الظروف
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كـل
شـأو
مـن
دون
شـأوك
والمـق
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دار
مـــن
أي
تالـــد
وطريـــف
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ليـس
مـن
يـدعي
الفخـار
يسـاوي
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ك
ولا
كــل
مــا
بنــوا
بمنيــف
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لـم
أصـارفك
بالرجـال
وقد
أيقن
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ت
منهــــم
ببهــــرج
وزيـــوف
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مـا
ظننـت
الزمـان
يجحـد
فضـلي
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غيــر
أن
الزمــان
جـم
الصـروف
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ظالمــاً
شــمر
الأعــادي
لهضـمي
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فــدهاهم
مجــدي
برغــم
الأنـوف
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هـــذه
ســيرتي
وســيرة
دهــري
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حســـدوني
وأنكـــروا
معروفــي
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إن
نسـيت
الأشـياء
لـم
أنس
يوماً
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كنــت
لـي
فيهـم
غـرار
السـيوف
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حـاولوا
مـا
رقمتـه
مـن
كمـالي
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حنقـــاً
بــالتحريف
والتصــحيف
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بخســوني
وطففــوا
الكيـل
زوراً
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ولهــم
منــك
ســورة
التطفيــف
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هكذا
يا
أخا
المناقب
رأي
الدهر
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قــد
كــان
فــي
كمـال
الشـريف
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ببنــي
الـدهر
علـة
ليـس
تشـفى
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بــدواء
حــتى
لقــاء
الحتــوف
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لا
تحــــاول
علاجهـــم
بكمـــال
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آفـة
الـدهر
فـي
كمـال
الشـريف
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وتمـوت
الجعلان
فـي
نفحـة
الطـي
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ب
وتحيــا
ســعيدة
فـي
الكنيـف
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عــزة
العلــم
أمجـدتني
مقامـاً
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فتــــبينت
كــــل
رأت
ســـَخيف
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ليـت
شعري
هل
يرعوي
الدهر
يوماً
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مــن
بنـات
الـدهر
هـز
القحـوف
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عجبــاً
ليـس
يسـلم
المجـد
فيـه
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كـــل
حـــر
بصـــخرة
مقـــذوف
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مـا
يريـد
الزمان
من
رفعة
الند
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ل
ومــن
ذلــة
الكريـم
العفيـف
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وعــذير
الزمــان
ممــا
أقاسـي
|
ه
انفــراد
الكــرام
بـالمعروف
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وعــزوم
يثيرهــا
كــرم
النــف
|
س
وهـــم
يشـــيب
رأس
الصــروف
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واقتحـام
المجيد
في
الروع
لا
ير
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قــب
ســعداً
أو
ينثنــي
لمخـوف
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قمـت
عبـد
الرحمـن
لـي
في
مقام
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ظلمــوني
فيــه
كظلــم
الطفـوف
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أنكــر
الملحــدون
مـا
أنكـروه
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فـــرددت
التنكيــر
بــالتعريف
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رشـــحت
منهـــم
صــدور
مــراض
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بحـــزازات
الســوء
والتعنيــف
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لـم
تـدعهم
علـى
بسـاط
المخازي
|
بـل
دحضـت
الـدعوى
بـرأي
حصـيف
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يظهــر
السـوء
مـن
بـواطن
سـوء
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يرشــح
الظــرف
جـوهر
المظـروف
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خـذ
ثنـائي
كـأنه
الجـوهر
المك
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نـون
فـاجعله
فـي
محـل
الشـنوف
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قلمــي
ســاحر
القلــوب
بــديع
|
وبـــديع
الأقلام
محــض
الصــريف
|
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دعهـم
في
المخازي
والتكذيب
إني
|
متنـــبي
الـــدنيا
بلا
تكليــف
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