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باســمك
ســيدي
تجلــى
الكـروب
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وذكـــرك
تطمئن
بـــه
القلــوب
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بحمــدك
ســبحت
روحــي
ونفســي
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وقلـــبي
فيــك
منكســر
قطيــب
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بثثــت
إليــك
أحزانــي
وكربـي
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وحـــالي
عنــك
ربــي
لا
تغيــب
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برحمتــك
اســتغثت
ولــي
يقيـن
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بــأن
مــن
اســتغاثك
لا
يخيــب
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بلطفـــك
ســيدي
فــرج
وبشــرى
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وإن
عقــدت
شــدائدها
الخطــوب
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بمنظــرك
العلــي
صــفات
نفسـي
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ومــا
جــرت
علــي
بـه
الـذنوب
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بســوء
الاختيــار
عصــيت
ربــي
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وتلـــك
قضـــية
منهــا
أتــوب
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بصـــرت
بزلــتي
ســراً
وجهــراً
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وســرك
ليــس
تهتكــه
العيــوب
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بعيــد
مــن
عبيــدك
كــل
خيـر
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ولكــن
أنــت
بالحســنى
قريــب
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برأفتــك
اسـتجرت
مـن
الخطايـا
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فكـــل
مكاســـبي
اثــم
وحــوب
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بــرئت
إليــك
ممـا
لسـت
ترضـى
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وأنــت
علــى
براءتــي
الرقيـب
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بأوبــة
مخلــص
لــم
يبـق
شـيء
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ســواك
علـى
الوجـود
لـه
حـبيب
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بعثــت
إليــك
مــن
سـري
رجـاء
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وأنـت
عليـم
مـا
تخفـى
الغيـوب
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بصــير
بــي
ومـا
أخفـي
وأبـدي
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ومـا
يـأتي
بـه
الزمـن
العصـيب
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بمــا
نجيبـت
نوحـاً
حيـن
نـادى
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وأنــت
لكــل
مــن
نـادى
مجيـب
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بمــا
نجيــت
يـؤنس
حيـن
نـادى
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وســبح
فــانجلت
عنــه
الكـروب
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بمــا
نجيــت
أيــوب
المنــادي
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ونعـــم
العبـــد
أواب
منيـــب
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بــديع
الكائنــات
الطـف
بعبـد
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لـــه
مــن
كــل
ســيئة
نصــيب
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برحمتــك
الــتي
وســعت
أصـبني
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فإنــك
مــن
تشــاء
بهـا
تصـيب
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بليــاتي
أحــاطت
بــي
ومــالي
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عليهـــا
ســـيدي
صــبر
رحيــب
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بنصـــرك
اســـتعد
لكــل
هــول
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بحولـــك
كـــل
هــول
لا
ينــوب
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بحولـــك
رب
لــي
نصــر
عزيــز
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بحولـــك
رب
لــي
فتــح
قريــب
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بــدالي
مــن
جلالـك
قهـر
خصـمي
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فاســـهمهم
إلــي
لهــم
تصــيب
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بغوا
بي
السوء
فانجدلوا
وخابوا
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كـــذلك
كـــل
جبـــار
يخيـــب
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بعزتـــك
اعتصـــمت
فلا
أبــالي
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وإن
نصــبت
مكائدهــا
الخطــوب
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بعــز
اللّــه
ســلطاني
عليهــم
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وعـــدل
اللّــه
ســلطان
مهيــب
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بقــدرتك
اســتجرت
مـن
الأعـادي
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فــأنت
القـاهر
الحكـم
الحسـيب
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بنـــور
محمـــد
نــور
يقينــي
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وصــل
عليــه
مــا
نـارت
قلـوب
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