|
ســيدي
ســائل
باسـمائك
الحـس
|
نـى
علـى
بابـك
العظيـم
الأجـل
|
|
ســيدي
عــائذ
باسـمائك
الحـس
|
نـــى
دؤوب
بحبلهـــا
متــدلي
|
|
ســيدي
مخبــت
بأسـمائك
الحـس
|
نــى
واذكارهـا
حـديثي
وشـغلي
|
|
ســـيدي
عزنــي
الوجــود
ملاذاً
|
وتعمــت
أمــام
وجهــي
ســبلي
|
|
سـيدي
مـن
يحلـل
حمـاك
يصـادف
|
كرمـــاً
منــزلاً
برحــب
وأهــل
|
|
ســــيدي
أي
قاصـــد
طـــوحته
|
فـي
حمـاك
الخطـوب
بـاء
بحظـل
|
|
ســيدي
أي
وارد
لــك
لــم
تـم
|
لأ
روايــاه
مــن
نــداك
بسـجل
|
|
ســيدي
أي
بــائس
مســه
الــض
|
ر
ونــاداك
لــم
تغثــه
بطـول
|
|
ســيدي
أي
محســن
فيــك
ظنــاً
|
لـم
يكـن
ظنـه
اليقيـن
المجلي
|
|
ســـيدي
أي
محســن
أو
مســيئي
|
وكلتـــه
الألطـــاف
إلا
لفضــل
|
|
سـيدي
مـن
يصـرف
هـواه
إلى
غي
|
يـرك
لـم
يلـف
منك
غير
التولي
|
|
سـيدي
كيـف
بـي
وقـد
برح
الشو
|
ق
بقلــبي
إليـك
واسـتل
عقلـي
|
|
سـيدي
لـو
أملـت
عنـك
هـوى
نف
|
ســي
تلطفـت
بـي
فعـدلت
ميلـي
|
|
سـيدي
لـو
غمسـت
نفسـي
فـي
ظل
|
مـة
طبعـي
أدركـت
جـذبي
ونشلي
|
|
سـيدي
لـو
فـررت
عمـري
عـن
با
|
بــك
الفيــت
مـن
أزائل
حـولي
|
|
ســـيدي
لــم
أجــدك
إلا
جميلاً
|
تتــدانى
منــي
وانـأى
بجهلـي
|
|
سـيدي
منـك
مـا
يليـق
بمـا
أن
|
ت
ملـــي
بـــه
ومنــي
شــكلي
|
|
ســيدي
أخلقــت
ذنــوبي
وجهـي
|
ورمتنــي
بالشـؤم
سـوءة
فعلـي
|
|
ســيدي
مزقـت
حيـاتي
المعاصـي
|
واقـتراف
الخطَّـاء
للخيـر
يبلي
|
|
سـيدي
إن
أسـرفت
في
الذنب
لا
آ
|
تــي
بخيــر
فتلـك
فعلات
مثلـي
|
|
سـيدي
لا
يزكـو
الـذي
لزه
الطب
|
ع
إلـى
مـا
يرضـي
الرجيم
بحبل
|
|
سـيدي
لـو
قـامرت
شـيطان
نفسي
|
بقـداح
الطاعـات
أحـرزت
خصـلي
|
|
سـيدي
إن
يـك
اقـترافي
عظيمـاً
|
فهـو
فـي
حلـم
اللّـه
عين
الأقل
|
|
سـيدي
مـا
فرطـت
فيـك
اجـتراء
|
إنهـا
فلتـة
الغـرور
بـدت
لـي
|
|
سـيدي
إن
تحمل
على
العدل
نفسي
|
كــان
حقـاً
علـى
عـذابك
حملـي
|
|
ســيدي
لا
تطيــق
سـطوتك
العـظ
|
مــى
عبوديــتي
وفطــرة
ذلــي
|
|
سـيدي
لا
يجيـر
شـيء
علـى
اللّه
|
ولا
عنــــك
مهــــرب
لمحــــل
|
|
ســيدي
أي
ملجــأ
غيــر
احسـا
|
نــك
للعبــد
منــك
أم
أي
وأل
|
|
ســيدي
إن
طردتنـي
غيـر
مقبـو
|
ل
فــويلي
ممــا
دهـاني
ويلـي
|
|
سـيدي
إن
طردتنـي
خاسـر
الصـف
|
قـة
لـم
ألـف
مـن
يقـوم
بكلـي
|
|
ســيدي
إن
يكــن
هـواي
حجـابي
|
عنــك
فاجعـل
هـواي
كالمضـمحل
|
|
سـيدي
مـا
عصـيت
جبراً
من
القد
|
رة
بـل
سـولت
لـي
النفـس
فعلي
|
|
ســيدي
مــا
عصـيت
شـكا
بوعـد
|
ووعيــد
ولا
اعتصــاماً
بحــولي
|
|
سـيدي
مـا
زايلـت
بابـك
عن
أم
|
ن
ويــأس
ولا
اكتفــاء
بطــولي
|
|
ســيدي
كــل
مــا
عـداك
مجـاز
|
ودليــــل
عليـــك
للمســـتدل
|
|
ســـيدي
لا
أرى
المجــاز
ولا
أش
|
هـــد
إلا
حقيقـــة
المتجلـــي
|
|
ســيدي
لا
يــرد
أمــرك
تـديير
|
ضــــعيف
ولا
احتيـــال
مقـــل
|
|
ســيدي
هفـوتي
لسـوء
اختيـاري
|
واتبــاعي
خطـى
العـدو
المضـل
|
|
سـيدي
هـل
تقيلنـي
عشـرة
الجه
|
ل
فعــذري
إليــك
غــرة
جهلـي
|
|
سـيدي
لـو
عاصـك
ما
حاطه
العر
|
ش
تـــأنيتهم
بحلـــم
وفضـــل
|
|
سـيدي
لـو
عاصـك
ما
حاطه
العر
|
ش
لمــا
أنقصــوك
حبــة
بقــل
|
|
سـيدي
مـا
أغنـى
جلالـك
عـن
طا
|
عـة
وجهـي
وعـن
فروضـي
ونفلـي
|
|
ســـيدي
إن
وفقتنــي
لمراضــي
|
ك
فأحســـنتها
فنفـــع
لأجلــي
|
|
ســيدي
إن
ظلمـت
نفسـي
فهلكـي
|
أنـت
ربـي
العزيـز
عن
أي
فعلي
|
|
سـيدي
قـد
أجرمـت
قاصـمة
الظه
|
ر
وأوقــرت
النفـس
أثقـل
حمـل
|
|
سـيدي
حبـك
المتـاب
إلـى
الرح
|
مــة
يحـدو
وعـن
جمالـك
يملـي
|
|
ســيدي
تبـت
مخلصـاً
لـك
وجهـي
|
مــن
ذنــوبي
بـأي
فعـل
وقـول
|
|
ســيدي
تبـت
عالمـاً
أن
مـن
أم
|
ك
عــــاجلته
بصـــفح
وطـــول
|
|
مـا
أبـالي
إن
تعـف
عني
وترضى
|
سـخرتني
الأكـوان
أو
سـخرت
لـي
|
|
رب
إنـــي
مـــن
البلاء
جــزوع
|
ومعافاتـــك
المقيمــة
ســؤلي
|
|
رب
أشــكو
إليــك
فقــراً
وذلاً
|
واحتياجـاً
لـبين
الفقـر
مثلـي
|
|
رب
أنـت
الغني
ذو
الرحمة
الوا
|
ســعة
املأ
كفــي
رجـائي
بفضـل
|
|
رب
لـم
تنفـذ
الخـزائن
والطـو
|
ل
ولا
ضـــاقت
الأيــادي
بطــول
|
|
رب
تعطــي
لحكمــة
بالمقــادي
|
ر
وتعطـــي
بغيــر
وزن
وكيــل
|
|
رب
إن
تعطنـي
فقـد
نضـب
المـا
|
ء
وجــف
المرعــى
لشـدة
مجلـي
|
|
رب
أشـكو
إليـك
طـرق
الرزايـا
|
جلبــت
لـي
حربـاً
بخيـل
ورجـل
|
|
رب
أشـكو
إليـك
طاغيـة
فاكبته
|
كبتــاً
وابهلــه
أعظــم
بهــل
|
|
رب
نكـــل
بــه
وشــدد
عليــه
|
وطـأة
الانتقـام
فـي
غيـر
مهـل
|
|
أعطنــي
قــوة
عليــه
وحــولاً
|
ليـس
يقـوى
بغيـر
حولـك
حـولي
|
|
مــدني
مــن
قـوى
سـطاك
بقهـر
|
واقتــدار
يطــويه
طـي
السـجل
|
|
واكســني
مــن
جلال
عـزة
أسـما
|
ئك
عـــزاً
لا
يستضـــام
بـــذل
|
|
فـالعزيز
المنيـع
مـن
أدركتـه
|
غيــرة
اللّــه
بانتصـار
وصـول
|
|
والعزيـز
المنيع
من
نصرة
اللّه
|
أقــامته
فــي
محــال
التـولي
|
|
والعزيـز
المنيع
من
مت
ذا
الع
|
زة
والكبريـــاء
منــك
بحبــل
|
|
غـارة
اللّـه
أدركـي
نصـرتي
إذ
|
عزنــي
النصـر
مـن
قريـب
وخـل
|
|
غـارة
اللّـه
جـردي
صـارم
المق
|
ت
علــى
مفـرق
الظلـوم
المضـل
|
|
غـارة
اللّـه
بيتي
الكفر
والطغ
|
يــان
أو
صــبحيه
منــك
بثكـل
|
|
غـارة
اللّـه
قـد
ظلمـت
وشـكوا
|
ي
إلـى
مـن
يـرى
ويسـمع
قـولي
|
|
غـارة
اللّـه
بالصـواعق
مـن
نق
|
متـه
فاحصـبي
العـدى
واسـتهلي
|
|
رب
ســلطانك
النصــير
نصــيري
|
وخلــوص
الـدعا
سـيوفي
ونبلـي
|
|
وجنــود
الأسـماء
أنصـَار
قهـري
|
وكنــوز
الأسـماء
كنـزي
وطـولي
|
|
وحصــون
الأســماء
معقـل
أمنـي
|
وغيــوث
الأسـماء
غيـثي
لمحلـي
|
|
وبــروق
الأســماء
تخطـف
أبصـا
|
ر
المريـدين
سـوء
حـالي
وذلـي
|
|
وفيــوض
الأســماء
قــوة
تصـري
|
فـي
وفصـلي
في
الكائنات
ووصلي
|
|
فاكسـني
مـن
لألاء
أسـرارها
نـو
|
راً
وهـب
لـي
بفيضـها
كـل
سؤلي
|
|
وأعشــني
متيمــاً
مولـع
القـل
|
ب
باذكارهــا
نهــاري
وليلــي
|
|
وأغثنــي
بهــا
وجــل
همــومي
|
وغمــومي
وحــل
قيــدي
وغلــي
|
|
لسـت
أخشـى
مـن
الحوادث
أن
كن
|
بــــأنوار
ســــرها
متجلـــي
|
|
فـارج
الهـم
كاشـف
الغـم
عجـل
|
فرجــاً
عــاجلاً
ولطفــاً
بــذلي
|
|
يا
مغيث
الملهوف
يا
راحم
العب
|
رة
يـا
منجـي
الغريق
استجب
لي
|
|
حيطـة
العلـم
بـي
منـاب
سؤالي
|
وســـؤالي
فقـــري
وذل
محلــي
|
|
وسـؤال
اللسـان
والقلـب
تشـري
|
ف
وفضــل
تقضــي
عليــه
بفضـل
|
|
وسـباني
الجمـال
من
قولك
أدعو
|
نـي
وحسـن
الرجـاء
هيـم
عقلـي
|
|
وإلــى
وجهــك
الكريــم
تجلـت
|
مِــدَح
منـك
فيـك
والاسـم
قـولي
|
|
أشـرقت
مـن
سـتائر
اللطف
أنوا
|
ر
ســناها
لا
مـن
كثيفـة
جهلـي
|
|
كلــــم
طيــــب
ورب
رحيــــم
|
ومقـــامي
مقــام
شــاك
مقــل
|
|
هــذه
ســيدي
الوســيلة
أدلـو
|
هـا
إلـى
وجهـك
الكريـم
الأجـل
|
|
ليــس
لــي
حجـة
ولا
مـن
شـفيع
|
بابتهــالي
وذكـر
اسـمك
أدلـي
|
|
مـا
أرانـي
أخيـب
إذ
قمت
أدعو
|
ك
وألقيــت
عنــد
بابـك
رحلـي
|
|
ولســاني
يتلــو
واخلاص
قلــبي
|
تحـت
ميـزاب
سـر
الأسـماء
يملي
|
|
فـأجزني
رضـاك
فـي
جنـة
الخـل
|
د
ملقـــى
بوالـــدي
ونســـلي
|
|
وأجزنــي
رفــداً
تصـون
بـه
وج
|
هـي
عـن
الخلـق
عاجلاً
فوق
سؤلي
|
|
رب
أبلـغ
ذات
النـبي
الـذي
أر
|
ســـلته
رحمــة
وخــاتم
رســل
|
|
أحمــد
المصــطفى
صـلاة
وتسـلي
|
مـاً
كمـا
ترتضـي
لـه
أن
تصـلي
|
|
وعلـى
الآل
والصـحابة
مـا
أخـل
|
لــص
داع
ومــا
أجــزت
بفضــل
|
|
وأجـزه
خيـر
مـا
جزيـت
رسـولاً
|
مـن
عظيـم
الرضـا
وحسن
التولي
|
|
وتــــدارك
بحقـــه
دعـــواتي
|
بقبـــول
ونــائل
منــك
جــزل
|
|
وأفــض
رحمــة
بامــداده
تــك
|
شــف
كربـي
بهـا
وتجمـع
شـملي
|
|
أي
كـرب
مـا
حلـه
اللطف
عن
مس
|
مســك
مــن
حــب
النـبي
بحبـل
|
|
فــاز
داعيــك
بالاجابــة
إن
مَ
|
تَّ
بمعنـــى
جمــاله
المتجلــي
|