|
لا
يــزال
الحـق
فينـا
مـذهباً
|
رضــي
الخصـم
علينـا
أم
أبـى
|
|
مــا
بقينـا
فعلـى
الحـق
وإن
|
نَقْــضِ
أحســنّا
بـه
المنقلبـا
|
|
إنمــا
ســيرتنا
العـدل
ولـن
|
ننثنــي
عـن
نشـره
أو
نـذهبا
|
|
نحـن
مَن
قمنا
على
السلطان
إذ
|
جـــار
لا
نــتركه
أن
ينكُبــا
|
|
إنمـا
البغـي
وظلـم
الناس
لا
|
يثبــت
الملــك
عليـه
مركبـا
|
|
قومنـا
اضـطروا
إلـى
مـذهبنا
|
عزلــوا
ســلطانهم
مســتوجبا
|
|
نحــن
قَوّمنــا
وســكنَّا
بمــا
|
فيهــم
المعــوجَّ
والمضــطرِبا
|
|
ليــس
للــدُّنيا
لَــدينا
قـدَر
|
مثــل
قــوم
عظّموهــا
طلبــا
|
|
رفضـُنا
الـدنيا
وإن
بَّرحـت
حرٍ
|
كيــف
إن
ولَّــت
وسـَاءت
حُقُبـا
|
|
إنمــا
الــدنيا
حطــام
زائل
|
فـاقضِ
منهـا
يـا
فتى
ما
وجبا
|
|
تعلـمُ
الـدُّنيا
وإن
راقـت
لنا
|
مـا
عـداها
المجتلى
والمجتبى
|
|
نُعِشــت
فينــا
عقــولٌ
للهُـدى
|
وجســوم
فيــه
تشــكو
النًّبـا
|
|
لا
نبــالي
إن
بــذلنا
أنفسـاً
|
في
رضا
المولى
ونؤتى
المطلبا
|
|
لــم
تَرعنــا
بارقــات
لمعـت
|
قــد
أثـارت
صـاعقاتٍ
بالظُّبـا
|
|
كـــثرت
أعــدانا
لكــنَّ
مــن
|
صــحب
الحــق
وإن
قــلَّ
رَبَــا
|
|
شـأننا
الإِنصـاف
في
الحكم
ولا
|
نلـج
الرشـوةَ
أو
بـابَ
الرِّبـا
|
|
ننصــف
العـاجز
مـن
ذي
قـدرة
|
كــان
مِنّـا
أبعـداً
أو
أقرَبـا
|
|
فــإذا
قلنــا
فعلنــا
أبـداً
|
مــا
حيينـا
لا
نقـول
الكـذبا
|
|
قولنــا
أنفـذُ
مـن
صـَوْلٍ
وكـم
|
صـولنا
زلـزل
أركـان
الجِبَـالِ
|
|
جــــذبتنا
نفحـــة
وَهْبيـــة
|
تجعــل
المنكـر
والجـور
هَبَـا
|
|
خرجـت
فـي
الأرض
تمحـو
بـاطلاً
|
وتــردّ
الظلــم
ممــن
ركبــا
|
|
دولــة
غــراء
كالشــمس
بهـا
|
تشــرق
الـدنيا
وتسـمو
رُتَبـا
|
|
ســهلة
بيضـاء
لـم
تُلـفِ
بهـا
|
حرجــاً
أو
كــدراً
أو
معتبــا
|
|
وهــب
اللــه
لهـا
مـن
لطفـه
|
ســالماً
ذاك
الامـامَ
المجتـبى
|
|
ســلَّه
اللــه
حســاماً
لامعــاً
|
يقطـع
الكفـر
ويجلـو
الغيهبا
|
|
بـــايعته
العُلمــا
والأُمــرَا
|
والبرايـــا
فــترقّى
منصــبا
|
|
قـام
بـالأمر
فكـان
اليُمْـنُ
في
|
ســعيه
حيــث
أتــى
أو
ذهبـا
|
|
فهـو
فتّـاح
الصيَّاصـي
والقـرى
|
وهـو
وضـاح
الصـَّحاري
والرُّبـا
|
|
زهـتِ
الـدنيا
بـه
كالعيـد
في
|
أهلــه
وافــق
دهــراً
طيبــا
|
|
وبــه
لطـف
كبَـرْد
المـاء
مـن
|
كَبِــد
الظمـآن
يُطفـي
اللهبـا
|
|
فهـو
المـاءُ
جـرى
عنـد
الرِضا
|
وهــو
النــار
يُـرى
إن
غضـبا
|
|
دائم
الصــــبر
حَمـــول
للأذى
|
قــائم
الشـكر
يجلـي
الكربـا
|
|
أمــرُه
شــورى
فلا
خُلْــف
لمـا
|
يرتضــيه
العلمــاء
النقبــا
|
|
حــف
بالنصــر
لمــا
يقصــده
|
وببرهـــان
يُزِيـــل
الحجبــا
|
|
مــا
عنــاه
أصــعب
إلا
وقــد
|
ســهّل
اللــه
إليــه
الأصـعبا
|
|
راشــد
الأُمّــة
مـأمون
البِنـا
|
واقــد
الهمـة
مسـنُون
الشـَبا
|
|
سـالم
الجـانب
ممـدود
المـدى
|
طـاهر
الحُجْـزة
معقـود
الحُبـا
|
|
آمِــن
المرصـد
ميمـون
اللقـا
|
صـاعد
المقصـد
يعلـو
الشـهبا
|
|
وأخـوه
الناصـر
الشـهم
الـذي
|
قـام
فـي
سـبل
الهُـدى
محتسبا
|
|
باســط
الراحـة
محمـود
العلا
|
واســع
السـاحة
مـأوى
الأُدَبـا
|
|
يـا
حُماة
الدين
يا
أهل
الوفا
|
يـا
كـرام
النـاس
قومُوا
غضبا
|
|
أيِّـدوا
هـذا
الامـام
المرتضـى
|
واعمـروا
بالعدل
هذا
المذهبا
|
|
وانزعُوا
الأحقاد
منكم
واسلكوا
|
ســُبل
الخيـر
وداووا
الوَصـَبا
|
|
واجمعــوا
الأمـر
ولا
تختلفـوا
|
واحــذروا
ريحكــم
أن
تـذهبا
|
|
واطلبـوا
الألفـة
وارعَوْا
حقكم
|
واذكـروا
إذ
كنتـم
أيـدي
سَبَا
|
|
وابـذلوا
الفانيَ
بالباقي
فما
|
يطلـــب
الأشــرفَ
إلاَّ
النُّجَبــا
|
|
هــذه
دولتكــم
يـدري
الـورى
|
إنكـــم
أركانهــا
والخُطبــا
|
|
وعجيــب
أصــلها
منــا
ولــم
|
نعتلــق
منهــا
بـأدنى
سـَبَبا
|
|
راقبــوا
مــولاكم
فـي
دينكـم
|
واحفظـــوا
دينكــم
والأدَبــا
|
|
يـا
بنـي
الاسـلام
هـل
من
يغرة
|
تُنهــض
المُقْعَــد
والمنقلبــا
|
|
تلــك
عبـاد
المسـيح
اختـبرت
|
أمركـم
هـل
طـال
سعياً
أم
كبا
|
|
فــإذا
مـا
استضـعفوا
أمركـم
|
جعلــوكم
مغنمــاً
أو
منهبــا
|
|
وإذا
مــا
استصــعبوا
أمركـم
|
أدبــروا
عنكـم
وولـوا
هربـا
|
|
هــذه
حــالتهم
لــم
تختلــف
|
ومحـــال
حالُنــا
أن
تُغلبــا
|
|
حالنــا
قــد
بَهــرت
أعلامنـا
|
رفرفــت
بالنصـر
فيهـا
كتبـا
|
|
ولْيــروا
منــا
سـيوفاً
رُهِفـت
|
قَطفــت
منهــم
رؤوسـاً
حبحبـا
|
|
فلْيــروا
منــا
خميسـاً
لَجِبـا
|
عجلاً
يحمـــل
موتـــاً
عجبـــا
|
|
قـــد
ســمعنا
رنّــةً
صــَافرة
|
مـن
بنـي
الكفـر
فقلنا
هبهبا
|
|
لــم
يكــن
كــل
صـدىً
تسـمعه
|
صــلت
السـيف
ولا
صـوت
الظبـا
|
|
هــب
صـدى
السـيف
فإنّـا
عـرب
|
بــذباب
السـيف
نقضـي
الأربـا
|
|
نحن
نهوى
الموت
في
درك
العُلا
|
ولأن
المـــوت
حكـــم
وجبـــا
|
|
فــإذا
الحـرب
علـت
أصـواتها
|
لا
تلمنــا
إن
رقصــنا
ضــرَبا
|
|
أوَ
لَـم
يَـدْرِ
بنـو
الكفـر
على
|
قِلِّنـــا
إنــا
كــثيرٌ
حَســَبا
|
|
نحتسـي
مـن
ارؤس
القوم
الطلى
|
ونعــد
الضــرب
فينــا
ضـربا
|
|
وهـــم
أكـــثر
منــا
عــدداً
|
وهـــمُ
أكـــثر
منَّــا
نشــبا
|
|
غيـر
إنـا
عنـدنا
الحـق
ومـن
|
عنــده
الحـق
علا
فـوق
الربـى
|
|
ولقــد
نُـزّل
فـي
الـذكر
لنـا
|
كـــم
قليــل
لكــثير
غلبــا
|
|
عبــدوا
عيســى
وقـالوا
إنـه
|
ولــدٌ
واعتقــدوا
اللـه
أبـا
|
|
حـــاشَ
للــه
فلا
نخِــذل
مــن
|
صــار
فــي
توحيــده
منتـدبا
|
|
وابــن
إبراهيــم
أبـدى
أنـه
|
مســتعين
بهــم
كــي
يُرهبــا
|
|
وتحــــدّى
بهـــم
مســـتظهراً
|
أمــره
فينــا
وبــث
الكُتُبـا
|
|
ورمــى
المسـفاة
حربـاً
فـرأى
|
ســيئاً
ثــم
انثنــى
محتجبـا
|
|
فأثــار
الناصـر
الـدين
علـى
|
حربـــه
جيــشَ
مَنــون
لَجِبــا
|
|
جيـــش
صــدق
ســُقيت
أنصــُلُه
|
ســُمَّ
شــجعان
تُــذِيق
العطبـا
|
|
فأحــاطوا
بجهــات
الحـزم
لا
|
يجــد
الحصــن
إليهـم
مضـربا
|
|
والمقـــاديم
يشـــبّون
وغــىً
|
ويـــدبّون
إليـــه
كالـــدَّبا
|
|
وعُمـــان
حركـــت
أرجاءهـــا
|
وغــدت
تجــري
دَبــوراً
وصـَبا
|
|
فأمــاتوا
نهرهـم
كَبْسـاً
ولـم
|
يَــدَعَوا
فيــه
لطفــل
مشـربا
|
|
وإِمــام
النــاس
فـي
رسـتاقه
|
يتوالــــون
إليـــه
رغبـــا
|
|
ومضــى
أحمــد
يســتنجد
مــن
|
آل
ســـعد
والنصــارى
طلبــا
|
|
والنصـارى
فـي
الـذي
ليس
لهم
|
فيـه
نفـع
لـم
يكونـوا
سـببا
|
|
إيعـــادي
مُســـلمُ
ذو
نهُيــةٍ
|
دولــةَ
الأســلام
قـل
لا
مرحبـا
|
|
ظــن
مــاء
وهــو
آلٌ
واعتلـى
|
بحبـــال
مــدّها
وهــي
هَبَــا
|
|
وأتــى
مسترضـياً
بالصـلح
فـي
|
آل
جنّـــي
لا
رِضــاً
مســتعتِباً
|
|
لــم
يــزل
فـي
غِـرّةٍ
ملتهيـاً
|
وعلا
ثــــم
غلا
ثــــم
أبـــى
|
|
صـاحب
الحـرم
نـراه
لـم
يكـن
|
صــَاحَب
الحَــزم
ولا
مَـنْ
جرّبـا
|
|
غـــالب
الأيــامَ
فــانحط
وذا
|
شـأن
مـن
قـام
يعـادي
الأغلبا
|
|
مــا
درى
أنَّ
العــوادي
طرقـت
|
حــوله
لمــا
دعاهــا
كَثَبــا
|
|
ليتـــه
أضـــمر
طيبــاً
وحلا
|
مــورداً
واعتــاد
قـولاً
طيبـا
|
|
مــا
عليــه
ثــائر
مـن
أحـد
|
لا
ولا
كـــان
لـــه
مرتقبـــا
|
|
أيـن
ذاك
العقـل
منـه
والذكا
|
والــدَها
ولــىَّ
وأنــى
ذهبـا
|
|
مـا
اقتفـى
آباءه
الصيد
الأُلى
|
دوّخــوا
الأرض
وهــاداً
ورُبــى
|
|
فهـم
غـوث
الـورى
غيـث
الثرى
|
عـــدلُهم
شــرَّق
حــتى
غرَّبــا
|
|
وبنــو
جنــي
بــرأي
غلَبُــوا
|
الجـن
والإِنـس
وراعـوا
مطلبـا
|
|
أهــل
عقــل
وسـكون
قـد
رأوا
|
ميلهــم
للصـُّلح
فـوراً
أصـوَبَا
|
|
صــالحوا
فــارتفعوا
منزلــة
|
وهَمَــوْا
جـوداً
فبـارَوا
سـُحُبا
|
|
يـا
إمـام
المسـلمين
استمعُوا
|
بلبلاً
يصــدح
فــي
دوح
الرُّبَـى
|
|
تجـــدوا
ســـِحراً
حلالاً
ضـــمَّه
|
منطـــقٌ
جــزل
وقــولٌ
عَــذُبا
|
|
أطلـبُ
الأجـر
مـن
المـولى
بكم
|
وعليـــه
أن
يُتِــمّ
المطلبــا
|