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دعينـي
أنـزِّهُ
بالصـيد
نفسي
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وأصـطادُ
بـاللهو
طائرِ
يأسي
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وأنعـشُ
بيـن
الخمـائل
حسـّي
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وأرهـفُ
حـد
يراعـي
الكليـلْ
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دعينـي
أداوي
بزهـر
الحقولِ
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ســَقام
فـؤادي
وداء
خمـولي
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فكـم
في
الربى
نشوةً
للعقولِ
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وكـم
في
الربيع
حلىً
للحقولْ
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دعينــي
أزفُّ
عـروس
الربيـعِ
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إلـى
خاطري
المبتلى
وضلوعي
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ولا
توجسـي
خيفـة
مـن
ولوعي
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فمــا
لفــؤاديَ
عنـك
بـديلْ
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دعينــيَ
أدرسُ
بيـن
الزهـورِ
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فنـون
القريـض
بسجع
الطيورِ
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لعلــي
أهـذبُ
قاسـي
شـعوري
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فـأُخرجَ
للنـاس
شـيئاً
جميـلْ
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دعينـي
فـإني
مللتُ
الطروسا
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وقـد
بات
قلبي
لديها
حبيسا
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أليـس
لـه
أن
يمـلَّ
الدروسا
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ليقرأَ
في
الروض
خير
الفصولْ
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دعينـي
فـإن
القضـاء
دعاني
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فــاقفر
نظمـي
وجـفَّ
بيـاني
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ولكــنَّ
شـعري
نبـاتُ
جنـاني
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وليــس
لزهـر
جنـاني
ذبـولْ
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دعينـي
فـإن
القضـاء
بلانـي
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نزيـهَ
اليـدين
نزيه
الجنانِ
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وهـل
يرتضـي
منـك
مختصـمانِ
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وليـس
جميـع
الشـهود
عـدولْ
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دعينـي
فـإني
أسـير
الشهودِ
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وفكري
من
الشرع
رهنُ
القيودِ
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تــراث
قـديم
خلا
مـن
جديـدِ
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لعمــرك
هــذا
جمـودٌ
وبيـلْ
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دعينـي
فقـد
كان
قلبي
خليَّا
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فـذاق
الغـرام
فأمسـى
شجيّا
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وغــاب
الحـبيب
فبـتُّ
شـقيَّا
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وبـات
فـؤادي
وحيـداً
ملـولْ
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دعينــي
فـإن
حبيـبي
نبيـلُ
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وليـس
لـه
فـي
الأنـام
مثيلُ
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وهـل
فـي
عيـوني
سواه
جميلُ
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وهــل
لبثينــةَ
غيـرُ
جميـلْ
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دعينــي
فــإن
المحبـة
داءُ
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وفيهـا
إذا
مـا
تسـامت
علاءُ
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وعيـش
الفـتى
دون
حـبّ
عراءُ
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وهـل
طـاب
عيش
نبا
عن
خليلْ
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دعينــي
فــإن
الغـرام
بلاءُ
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وفيــه
لقلــب
المـتيم
داءُ
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وفيـه
لبعـض
النفـوس
مضـاءُ
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وفيـه
لبعـض
النفـوس
خمـولْ
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دعينـي
إليـك
عـروسَ
القريضِ
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فـأَنت
الدواء
لقلبي
المريضِ
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وأنـت
رجـاء
جنـاحي
المهيضِ
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وأَنـت
الأمـاني
مُدامُ
العقولْ
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دعينـي
أناجيـك
حيناً
فحينا
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لا
نعشَ
قلبي
الكليمَ
الحزينا
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ولا
تـدعيني
أثيـرُ
الشـجونَا
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فللوجـد
عنـدي
حـديثٌ
يطـولْ
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