|
أسـهرني
الوجـدُ
وطـولُ
الغـرام
|
فمــا
عرفــت
النـوم
إلا
لمـام
|
|
واقصـــر
العـــاذل
لمــا
رأى
|
أن
ليـس
يجـدي
فـي
هواك
الملام
|
|
وبــان
بالــدمع
خفــيُّ
الهـوى
|
وخــان
بالســهد
وفـيُّ
المنـام
|
|
وصــار
بعــد
الخفــض
موصـوله
|
مرتفعــا
فكيـف
لـي
أن
أنـام
|
|
وأهيـــفٍ
كالغصـــن
ذي
غـــرةٍ
|
كالبـدر
قـد
تـوج
جنـح
الظلام
|
|
كــأنه
الشــمس
إذا
مــا
بـدا
|
فـي
الحسن
والنور
وبعد
المرام
|
|
إذا
دنــا
كــانت
حيــاتي
بـه
|
وإن
نــأى
عنــي
فهـو
الحِمـام
|
|
كــــأنه
مــــن
حســــنه
درّة
|
أو
مسـكة
للحسـن
منهـا
ختـام
|
|
يسـبي
الـورى
مهما
دنا
وانثنى
|
بصــارم
اللحـظ
ولـدْن
القـوام
|
|
أقـــول
للعـــاذل
فــي
حبــه
|
هيهــات
لا
يُنسـَخُ
حكـمُ
الغـرام
|
|
كــأن
مــن
يعــذل
فــي
حسـنه
|
يـروم
يخفي
البدر
عند
التمام
|
|
كأنمــــا
جمــــاله
للنهـــى
|
أبـدى
اعتذار
العاشق
المستهام
|
|
كأنمـــــا
كلامــــه
جــــوهر
|
منتـثر
مـن
شـبه
سـمطي
نظـام
|
|
أو
كــف
مـولاي
ابـن
نصـر
جـرت
|
بالفــذ
مـن
أنعمهـا
والتـؤام
|
|
ناصـر
ديـن
اللـه
محيـي
الهدى
|
مــن
رأيــه
لكــل
أمـر
قـوام
|
|
ومــن
إذا
عــد
ملــوك
الـورى
|
فهـو
لهـم
فـي
كـل
فضـل
إمام
|
|
ومــن
بعليــا
ملكــه
أصــبحت
|
غرناطــة
تفــوق
دار
الســلام
|
|
مـن
صـفوة
الأنصـار
مـن
مثلهـا
|
ليــوم
جـود
أو
ليـوم
انتقـام
|
|
هـــم
الـــذين
أمّنـــوا
أولا
|
ديــن
محمــد
عليــه
الســلام
|
|
وهــم
حمــوه
آخــراً
بعـد
مـا
|
قـد
كـان
سـامي
عـزه
أن
يضـام
|
|
يـا
قاتـل
الأسـد
لـدى
الملتقى
|
ومخجــل
البحـر
نـدى
والغمـام
|
|
شــرفت
مملوكــا
غــدا
قلبــه
|
مقتســـما
بيــن
علاك
اقتســام
|
|
هـا
أنـا
قـد
نلـت
جميع
المنى
|
وثغـر
دهـري
غـدا
فـي
ابتسام
|
|
وقــد
دعــا
لــي
مـولاي
دعـوة
|
فحـق
لـي
الفخـر
بها
في
الأنام
|
|
حســبي
بهــا
عـزاً
ضـفا
ثـوبه
|
ألبسـني
الجـاه
ليـوم
القيام
|
|
ونصــّها
أن
يحســن
اللــه
لـي
|
قلـت
علـى
يـدي
إمـام
الكـرام
|
|
الملـك
الاسـمى
الكريـم
الرضـى
|
الباسـل
الأحمـى
الكبير
الهمام
|
|
مــن
مثلـه
لنـثر
شـمل
العـدى
|
ونظـم
شـمل
الـدين
حتى
استقام
|
|
مـــن
مثلــه
مجمعــا
للثنــا
|
مفرقـــا
للعارفــات
الســجام
|
|
مهمــا
تلقــاه
لقيــت
الغنـى
|
والشمس
تبدو
والحيا
في
انسجام
|
|
كأنمـــا
الملــك
لــه
هالــة
|
وهـو
لهـا
لا
شـك
بـدر
التمـام
|
|
أخطــأ
مــن
قــاس
بــه
غيـره
|
ان
عـمّ
جـودا
أو
سـطا
بالحسام
|
|
أدامــه
اللــه
لنظــم
العلـى
|
مؤيــد
العـزم
رفيـع
المقـام
|
|
مـا
هيـج
العاشـق
بـرق
الحمـى
|
ومـا
شـدت
فـي
الروض
ورق
حمام
|