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لقـد
بلـغ
الملـك
أقصـى
الأمل
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وطـاب
الزمـان
لنـا
واعتـدل
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ببــدر
تجلـى
بـأفق
المعـالي
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كمـا
حلّـت
الشـمس
برج
الحمل
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بنجــل
الامـام
الكريـم
الـذي
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بنـى
معلـم
المجد
حتى
استقل
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كــــأن
نــــداه
وأمـــداحه
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يسـيران
في
الناس
سير
المثل
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كــأني
بــه
قــد
سـمت
نفسـه
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لمـا
لـم
تنلـه
الملوك
الأول
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فتحنـو
اشـتياقا
عليه
القلوب
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وترنـو
ابتهاجـا
اليه
المُقل
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وتنـأى
اختيـالا
عتـاق
الجياد
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وتزهـى
انثنـاء
صـدور
الأسـل
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صــفات
كــبير
وإن
كـان
طفلا
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يلازم
منهــا
الملـوك
الخجـل
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ومـن
كـان
قطـب
الهـدى
أصـله
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فيامــا
أعــز
ويامــا
أجـل
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إمام
على
الحلم
والعلم
والبذ
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ل
والفضـل
والمكرمـات
اشتمل
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بخيــل
اليــدين
بعـرض
وجـار
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وإن
كـان
لم
يدر
معنى
البخل
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مـبين
الرشـاد
مقيـم
الجهـاد
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مفيــد
الأيـادي
مبيـد
النحـل
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وبحـر
النـوال
وشـمس
المعالي
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ومعنــى
الكمـال
وسـر
الـدول
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فكـم
مـن
عزيـز
وكـم
من
ذليل
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أعـــز
شــبا
دمعــه
أو
أذل
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تـراه
لدى
السلم
محيا
العباد
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ويــوم
الجلاد
ممــات
البطـل
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وكـالغيث
والليـث
بأسا
وجودا
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إذامــا
ســطا
وإذامـا
بـذل
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لــه
راحـة
بيـن
نعمـى
وبـؤس
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بهـا
الصـاب
مجتمـع
والعسـل
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وفيهـا
تلاقـى
المنـى
والمنـى
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ومنهـا
الحيـاة
ومنهـا
الأجل
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أيـا
قاتـل
الأسـد
يـوم
الوغى
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ويـا
مخجـل
الغيـث
مهما
همل
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ســـتفتح
أرض
العــدى
عنــوةً
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وتبـدلها
الأمـن
بعـد
الوجـل
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تفـــرق
جمعهمـــو
بالفنــاء
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وتجمــع
ســبيهمو
فـي
النفـل
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لأنـــك
مـــن
أســـرة
شــيدت
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أواخرهـــا
مــا
بنتــه
الأول
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هــم
القــومُ
أمــا
معـاليهم
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فقــد
صـح
إسـنادها
واسـتقل
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إذا
ذكـر
النـاس
كـانوا
أعـزّ
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مكانــا
وأســمى
حلـى
وأجـل
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فهمتهـم
فـي
اقتنـاء
الثنـاء
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وبغيتهــم
فــي
ســمو
المحـل
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ولا
عيـب
فيهـم
سـوى
ظـان
بهم
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جيــوش
العـدى
وضـباهم
تفـل
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مـآثر
أعيـت
علـى
النظم
وصفاً
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فمــا
لبليـغ
بهـا
مـن
قبـل
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فيـا
ديـن
يهنيـك
منهـم
امام
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أقــام
عمــادك
بعــد
الميـل
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ولـولا
نـدى
كفـه
مـا
اسـتقام
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ولـولا
هـدى
عـدله
مـا
اعتـدل
|
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فلا
تســأل
الــدين
عـن
حـاله
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ولكـــن
عمـــن
حمــاه
فســل
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ولمـــا
رأى
نجـــم
أعــدائه
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طلــوع
نجــوم
السـعود
أفـل
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تـرى
الأسـد
مـن
بأسه
كالنقاد
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وصــيد
الملــوك
لـه
كـالخول
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أيـــدرك
شــأو
علاه
الكــرام
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أينقـاس
بحـر
النـدى
كالوشـل
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أيـا
جملـة
الفضـل
هنيت
نجلا
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يفســر
بــالجود
ذاك
الجمــل
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هلال
ســـعيد
كريــم
القــدوم
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أهـل
بـه
النصـر
لمـا
اسـتهل
|
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وبـدر
كسـا
الـدهر
نـور
سناه
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ومـرآه
أسـنى
الحلـى
والحلـل
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ســما
للمكــارم
طفلا
صــغيرا
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فكيــف
يكـون
إذا
مـا
اكتهـل
|
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ســيبدي
أمامــك
يـوم
الـوغى
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حســـاما
بكـــف
علاك
اســتقل
|
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يخـــال
صــباحا
فلا
غــرو
أن
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يجلـي
دجـى
الشـرك
مهما
يسل
|
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أقمــت
الحقيقــة
مــن
أجلـه
|
وناهيــك
مــن
مشــهد
محتفـل
|
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حفظــت
بــه
ســنة
المصــطفى
|
فحــزت
بهــا
رتبـة
لـم
تنـل
|
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فإنـــك
أســمى
وأكــرم
مــن
|
أطـــاع
أوامـــره
وامتثــل
|
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لـــدى
مصــنع
بــاهر
حســنه
|
يـروق
ابتهاجـا
سـناه
المقـل
|
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دنـــت
للســـرور
بأرجـــائه
|
قطـوف
المنـى
فـي
رياض
الجدل
|
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وحـف
بـه
السـعد
مـن
كـل
وجه
|
وســتر
الأمــان
عليـه
انسـدل
|
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إذا
أبصــر
البــدر
ســاحاته
|
يــود
لــو
أن
فـي
ذراه
مثـل
|
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وإن
لمحتـــه
ذكــاء
اغتــدت
|
تلـــون
مــن
حســد
أو
خجــل
|
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منحــت
العفــاة
بــه
منعمـاً
|
بــروض
الأمــاني
جنــيّ
الامـل
|
|
أمــولاي
عــادات
فضــلك
قــد
|
أعــد
نشــاطي
بعــد
الكســل
|
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وطــوقن
جيــدي
عقـود
اللهـا
|
فرفعتنــي
عــن
صـفات
العطـل
|
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بقيــت
لنصــرة
ديــن
الهـدى
|
وأمــرك
بيــن
الـورى
ممتثـل
|
|
ولا
زالــت
مـا
عشـت
مسـتأثرا
|
بخفــض
الزمـان
ورفـع
المحـل
|