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قـدك
مثـل
الغصـن
فـي
اعتداله
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لــولا
نســيم
هــب
مــن
عـذاله
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وكيــف
لا
يميــل
غصــن
نــاعم
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بيــن
شــمول
العـذل
أو
شـماله
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ترنحـت
منـك
القنـاة
بالـذي
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جــرى
علــى
ســمعك
مــن
جريـاله
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فــي
كــل
جســم
مـن
هـواك
علـة
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صـــحتها
طرفـــك
بـــاعتلاله
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وبيـــن
أزرارك
جيــد
جــؤذر
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تغــز
لــي
وقــف
علــى
غزالــه
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يتســع
المجــال
فــي
وشــاحه
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لا
يــزول
الضــيق
مــن
خلخـاله
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قــد
كتــب
الحســن
علـى
دلالـه
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هـذا
الـذي
يـدعو
إلـى
إدلالـه
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وعلمتنــــي
نزقـــات
صـــده
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أن
أطلـــب
الأمــان
مــن
ملالــه
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تســلط
الوجـد
علـى
جـوانحي
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مــذ
ســلط
الهجــر
علــى
وصـاله
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قــال
الغــرام
داره
ووالــه
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فقـــد
يــرق
للفــؤاد
الــواله
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وبيـن
جنـبي
ضـمير
لا
يـرى
التخفـي
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ف
بـــالإبلال
عــن
بلبــاله
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كأنمـــا
إســـاءتي
تســره
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والطبــع
لا
يطمــع
فــي
انتقــاله
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هــانت
جنايـات
الزمـان
بعـدما
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تمــرن
الجنــب
علــى
حبــاله
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وآثـــرت
فـــي
مـــارني
أرســانه
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واعتاد
ظهري
العري
من
جلاله
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كـــأنني
مـــن
رقــة
أو
دقــة
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أول
مــا
يســقط
مــن
غربـاله
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أحــوجني
إلــى
المديـح
باخـل
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سلاســل
البخــل
علــى
سلســاله
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أوقــات
فكــري
كلهــا
مشــغولة
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بمــدحه
ولســت
مــن
أشـغاله
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لمــا
غــدت
خســارتي
لربحــه
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أفســـدت
حــالي
بصــلاح
حــاله
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وفــاز
مــن
عمـري
بمـا
أنفقتـه
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فــي
وصـفه
ولـم
أفـز
بمـاله
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ظــن
نبــال
الــذم
تخطــي
عرضــه
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ليسـت
كمـا
فـوق
مـن
نباله
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ومــا
درى
بأنهــا
إمــا
قــذى
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أو
ميســم
يبقــى
علـى
قـذاله
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ومـن
جنايـات
اللئام
بعض
ما
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لا
يقــدر
الشــعر
علــى
احتمـاله
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أصـبحت
اسـتجدي
جهامـاً
ليـس
فـي
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عارضــه
وبــل
ســوى
وبــاله
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وأهتــدي
بحــائر
ولـم
يكـن
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نــور
الهــدى
يقــدح
مــن
ضـلاله
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حــط
علــى
المبـارك
بـن
كامـل
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تمــام
مــا
ينقـص
مـن
كمـاله
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أعلـى
علـى
الميمـون
مـن
منـاره
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أضــعاف
مـا
أعلاه
مـن
منـاله
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مــولى
وإن
قلــت
خليـل
لـم
تخـف
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مــن
عهــده
بـوائق
اختلالـه
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لا
تنحـت
الأيـام
طـول
عمـره
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مـــا
يشـــبه
الخلال
مـــن
خلالــه
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قـد
جـانس
الإحسـان
بالحسن
فهل
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جميلـــه
يشـــتق
مــن
جمــاله
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المرشــدي
المنقــذي
المتنمـي
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فــي
المجــد
بيــن
آلـه
وآلـه
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مــن
معشـر
مـا
منهـم
إلا
امـرؤ
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تنصــل
الــدهر
إلــى
نصــاله
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مجـــد
بنيـــت
فرعـــه
لأصــله
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متبعــاً
تحــذو
علــى
مثــاله
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يتبـــع
فيــه
كامــل
مقلــداً
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أبــا
علــي
وهــو
مـن
أقيـاله
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أســـنده
نصـــر
إلــى
مقلــد
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عــن
منقــذ
وهـو
أبـو
أشـباله
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مطــــردون
كــــاطراد
جــــدول
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زال
القـذى
عـن
مرتمـى
زلالـه
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وكـــاطراد
مـــن
كعــوب
ذابــل
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يجلـو
دجـى
الليـل
سنا
ذباله
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بيــت
إذا
حــدثت
عــن
بنيهــم
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لـم
يـرد
الإسـناد
عـن
إرسـاله
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قــد
شـد
مجـد
الـدين
أزر
عقـده
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فالـدهر
لا
يطمـع
فـي
انحلالـه
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وأصـــبحت
صـــفحة
مجـــد
قــومه
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لا
صــدئت
تلمــع
مـن
صـقاله
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أبلــج
لا
يخجــل
راجــي
فضـله
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ولا
يــرى
الوصــمة
فــي
سـؤاله
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مـا
فـي
الغمـام
مـن
ندى
ومن
ردى
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فمــن
ســجاياه
ومـن
سـجاله
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دانــي
قليــب
المسـتقى
قصـيرة
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أرشــية
الحاجــات
مـن
نـواله
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فضــيلتي
ترعــف
مــن
مقــالتي
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وفضـــله
يعــرف
مــن
فعــاله
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صــنت
بــه
شـعراً
لـه
بـذلته
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وصــون
بيـت
اللـه
فـي
ابتـذاله
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خصــائص
ذكــرت
منهــا
بعــض
مـا
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تعشــقه
الأشـعار
مـن
خصـاله
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ولــو
صـغى
فكـري
إلـى
مثوبـة
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ومــال
مــا
نفقــت
مـن
آمـاله
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مـا
كنـت
والسـحر
الحـرام
صـنعتي
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أحرزتهـا
الحـرام
عـن
حلالـه
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فكيــف
والأيـام
تـدري
أننـي
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هــذا
مقــام
لســت
مــن
رجــاله
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قـد
سـتر
الماضـي
مـن
العمر
وما
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ينسـت
مـن
سـتر
على
استقباله
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كــم
فــرج
مــن
حــرج
جـرى
بـه
|
بـرد
الهـوى
مـن
جمرتي
أهواله
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والبـدر
بعـد
تمـه
فلـم
يزل
|
محــــاقه
يخـــبر
عـــن
هلالـــه
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