|
ردا
أحـــاديث
المنــى
وأعيــدا
|
ومعاهــدا
حســنت
ربــى
وعهـود
|
|
داراً
عهــدت
بهــا
الأهلـة
أوجهـاً
|
متهللات
والغصـــــون
قــــدود
|
|
والأقحـــوان
مباســـماً
معســولة
ال
|
نغمـــات
والـــورد
الجنــي
|
|
واسـتخبروا
ريـاً
برامـة
نافراً
|
لمـا
لا
يريـد
عـن
الصـدود
صـدودا
|
|
لا
تعـــرض
الأرواح
عــن
أجســادها
|
حــتى
يعــرض
مقلــة
أو
جيـدا
|
|
تهفــو
بســالفتيه
سـود
ذوائب
|
مـن
أجلهـا
أهـوى
الليالي
السودا
|
|
وبملتقـى
العقـدات
مـن
أردافـه
|
غصـــن
يحــل
عزائمــاً
وعقــودا
|
|
متـــأود
منــع
الحيــا
أعطــافه
|
أن
لا
تميـل
علـى
النقا
وتميدا
|
|
كالشــــمس
إلا
أنــــه
متقلــــد
|
دراً
كــأفراد
النجــوم
فريـدا
|
|
قـذفت
نـوى
قـذفت
بنـا
عـن
أرضـه
|
فغـدا
قريـب
الصـبر
عنه
بعيدا
|
|
وزهــدت
فــي
عيــش
نبـت
أكنـافه
|
عنــي
وفـي
حلـف
أضـاع
لبيـدا
|
|
ورغبــت
عــن
عـرف
وعـرف
أوجبـا
|
أن
أهجــر
المقصـود
والمقصـودا
|
|
ولســت
مــن
عزمـي
وحزمـي
نثلـة
|
نســـبت
غلـــي
فــأنكرت
داودا
|
|
وشـــفعتها
مــن
منطقــي
بمهنــد
|
تفـري
مضـاربه
الطلـى
مغمـودا
|
|
مـــاض
يقلــد
الســابري
كــأنه
|
قـاض
يقيـم
علـى
الحديـد
حدودا
|
|
وركبـت
مـن
نسـل
الجـديل
وشذقم
|
قلصـا
أبيـد
بهـا
السرى
والبيدا
|
|
أجنــي
ســكون
الجسـم
مـن
حركاتهـا
|
وإذا
القيام
أفاد
كان
قعودا
|
|
ومــتى
جــرت
فـي
الآل
وهـي
رواكـد
|
أبقـت
ميـاه
الوجه
فيه
ركودا
|
|
هجــرت
وصــيد
البـاخلين
فلـم
تنـخ
|
إلا
بخيــر
الأكرميــن
وصـيدا
|
|
وسـرت
ونجـم
الليـل
ترفع
في
الدجى
|
مــن
صـبح
غرتـه
لهـن
عمـودا
|
|
ملــك
إذا
أســدت
يــداه
صـنيعة
|
كــانت
قيـود
نـدى
تفـك
قيـودا
|
|
وإذا
السـؤال
أمـض
قـال
سـماحه
|
ليــديه
عــودا
للمكــارم
عـودا
|
|
كــرم
يولـد
فـي
السـماح
بـدائعاً
|
فيهــا
معـان
تقبـل
التوليـدا
|
|
ينهــل
بــارق
بشـره
منـا
ولـم
|
يســمعك
للوعــد
الجميـل
رعـودا
|
|
ويقــل
مــع
فصــل
الخطــاب
كلامـه
|
إلا
إذا
كـــان
الكلام
مفيــدا
|
|
تــأبى
لــه
فصـل
المقـال
جلالـة
|
أمــرت
بنقــص
مقــاله
ليزيـدا
|
|
مــاش
علــى
سـنن
المعـالي
يقتفـي
|
فـي
المجـد
آبـاء
لـه
وجـدود
|
|
جـازوا
علـى
الشـعرى
وجـاوز
حـدهم
|
بفضــائل
لا
تقبــل
التجديـدا
|
|
أبقــى
ســليم
مـن
مصـال
سـيداً
|
سـاد
الكهـول
مـن
الملـوك
وليدا
|
|
فبنــى
لــبيت
بنـي
مصـال
جـده
|
شــزفاً
فزادتــه
النجـوم
مشـيدا
|
|
فـإذا
اختـبرت
العـزم
كـان
عرمرماً
|
وإذا
اعتبرت
الشخص
كان
وحيدا
|
|
ضـعف
الزمـان
عـن
القيـام
بحقـه
|
فقضــاه
ممــا
يســتحق
زهيــدا
|
|
ولــو
أنـه
يسـعى
بغايـة
جهـده
|
أبقـــى
وراء
الاجتهــاد
مزيــدا
|
|
والشـمس
لـو
نطقـت
لقـالت
قل
لنا
|
يــا
عزمـه
أنـى
تريـد
مزيـدا
|
|
لا
تعجلــن
فــإن
تحــت
رمـاده
|
جمـــراً
ذكيــاً
لا
يخــاف
خمــودا
|
|
ووراء
طحلبـــه
نميــر
ينجلــي
|
عمــــا
قليــــل
إن
أردت
ورودا
|
|
ولكــم
أجــاب
مثوبـاً
بعزيمـة
|
هجــرت
نهــوداً
حيــن
رام
نهــود
|
|
وملمــة
فــي
الملـك
غـادر
ثلمهـا
|
بمضـــائه
وقضــائه
مســدودا
|
|
متعقـــب
لحــن
الزمــان
يــرده
|
بفصــيح
فعــل
بينــاً
مــردودا
|
|
شـكر
الـورى
لك
في
البحيرة
سيرة
|
أبقـت
عليـك
مـن
الثنـاء
خلودا
|
|
سـعدت
بعـدلك
بعـد
جـور
طالما
|
أشــقى
طريفــاً
واســتباح
تليـدا
|
|
ونســخت
مـن
جـور
الـولادة
شـريعة
|
يتوارثــون
رســومها
تقليــدا
|
|
أيــدت
بـالتقوى
وصـادق
عزمـة
|
جلبــا
إليــك
النصـر
والتأييـدا
|
|
ومهابـة
السـمت
الملـوكي
الـذي
|
يغـدو
بهـا
أسـد
العرينـة
سـيدا
|
|
فقــدت
بـك
الإسـكندرية
أنسـها
|
فأعــدت
فيهــا
أنسـها
المفقـودا
|
|
كنـا
وأنـت
علـى
البحيـرة
نـازل
|
والثغــر
يشــكو
فـترة
وخمـودا
|
|
جزنــا
بــدارك
لا
خلــت
فتصــورت
|
فيهـا
النفـوس
جلالـك
المعبودا
|
|
فجعلــت
سـدة
بابهـا
ورحابهـا
|
حرمـــاً
وصــحبي
ركعــاً
وســجودا
|
|
واستشـعروا
وجـه
السـما
متبسـماً
|
فيهــا
وبشـر
جبينـك
المعهـودا
|
|
حــتى
إذا
قـدم
الركـاب
يحفـه
|
نصـــر
يحـــف
ميامنــاً
وســعودا
|
|
فطلعـــت
فــي
جنباتهــا
متهللاً
|
كالبــدر
لا
بــل
للوجــود
وجـود
|
|
عنـت
الوجـوه
بهـا
لوجهـك
خدمـة
|
وغــدت
تبــدد
لثمهــا
تبديــدا
|
|
وســريت
فـي
نـادي
نـداك
مجهـزاً
|
حمــداً
يـزور
مقامـك
المحمـودا
|
|
مــن
كــل
نـادرة
تهـز
رواتهـا
|
منهــا
قنــاة
بــل
فتــاة
رودا
|
|
ســيارة
فــي
الأرض
بـات
ثناؤهـا
|
وهـي
المقيمـة
في
العقال
شرودا
|
|
يحــدي
إليــك
بهـا
لفكـري
سـابق
|
لا
مكــــذباً
أملاً
ولا
مكـــدودا
|
|
فاعتــد
يـا
خيـر
الملـوك
بصـاحب
|
أمسـى
عليـك
مـن
الورى
معدودا
|
|
خـــل
يزيــن
ولا
يشــين
وربمــا
|
كنـت
الفـتى
هرمـاً
وكنـت
لبيدا
|
|
مـا
عـذر
أفكـاري
وقـد
علقـت
ندى
|
ملكـاً
مجيـداً
أن
أكـون
مجيـدا
|
|
متهللاً
بشـــــراً
ومنهلاً
نــــدى
|
ألقــى
الكرامـة
عنـده
والجـودا
|
|
أبــدى
النــدى
وأعــاده
ليفيـدني
|
في
المكرمات
العطف
والتأكيدا
|