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يـا
خيـر
مـن
نظم
المديح
لمجده
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وتنزلــت
سـور
الكتـاب
بحمـده
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يـا
حجـة
اللـه
الـتي
بضيائها
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هــديت
بصـيرة
حـائر
عـن
قصـده
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أنت
الذي
بلغ
النهاية
في
العلى
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عفـواً
ولـم
يبلـغ
بدايـة
جهده
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ورث
الهــداة
الراشــدين
إمامـة
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أحيـا
معالمهـا
بواضـح
رشـده
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إن
يفتخــــر
بنبــــوة
ووصــــية
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فهمـا
تـراث
عـن
أبيه
وجده
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وإذا
تنــزل
دون
ذلــك
لـم
يجـد
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إلا
ولــي
خليفــة
فــي
عهـده
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مــا
ضــركم
والمصــطفى
لكـم
أب
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فقــدانكم
لقضــيبه
ولــبرده
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مـــابين
آلات
النــبي
وآلــه
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إلا
كمــا
بيــن
الحســام
وغمـده
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شــرف
غــدوت
أبــا
محمــد
ذروة
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فـي
تـاجه
وفريـدة
فـي
عقـده
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مجــد
يقــول
إذا
عــددت
نجـومه
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خـل
الإطالـة
واختصـر
فـي
عده
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واذكـر
أبـا
الميمـون
تعل
بذكره
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شــرفاً
ولا
تتعــد
نحـو
معـده
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الحــافظ
المحفــوظ
عنـد
مغيبـه
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بثلاثـة
ورثـوا
الهدى
من
ولده
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مــن
ظــافر
أو
فــائز
أو
عاضـد
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أضـحت
بنـو
رزيـك
سـاعد
عضده
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قــوم
أحلهــم
الزمــان
مراتبـاً
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أوفـت
علـى
حـل
الزمان
وعقده
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الباســـطون
ثــوابهم
وعقــابهم
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بـأتم
بـاع
فـي
العلـى
وأمده
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ورث
الكفالــة
عــادل
فـي
حكمـه
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منهـم
ولكـن
جـائر
فـي
رفـده
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نيطــت
حمائلهــا
بعــاتق
أروع
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حمـل
الشـدائد
قبـل
وقـت
أشده
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وتيقنــت
رتـب
الـوزارة
أنهـا
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كــانت
ممهــدة
لــه
مــن
مهـده
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ولقــد
أعـاض
الدسـت
بعـد
كفيلـه
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أنسـاً
كفـى
الأيام
وحشة
فقده
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ملـــك
يـــرد
الألــف
إلا
أنــه
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لا
يلتقــي
الراجـي
بنبـوة
رده
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جـذلان
يعتصـر
النـدى
مـن
كفـه
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كرمـاً
ويقتـدح
الـردى
مـن
زنده
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ترضـي
رمـاح
الخـط
بسـطة
بـاعه
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ومضــارب
الهنــدي
قـوة
زنـده
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وتظـن
لامعـة
البـوارق
فـي
الـدجى
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بيضـاً
تجردهـا
فـوارس
جـرده
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لا
تغـــترر
ببشاشـــة
مــن
بشــره
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فالسيف
يلمع
والردى
في
حده
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طــارت
بــه
همـم
العلـى
وتقاصـرت
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همـم
الليالي
أن
تجيء
بضده
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مطلـــت
عواطــف
حلمــه
بوعيــده
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عفـواً
وقـارنت
النجاز
بوعده
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ملـك
الجوامـح
فاللسـان
بحمـده
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مسـتخدم
وكـذا
الفـؤاد
لـورده
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وقفـــت
مــدائحنا
عليــه
لأنــه
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مـا
عنـدها
إلا
الـذي
من
عنده
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يـا
عاضـداً
ديـن
الإلـه
وقائماً
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لــولاه
مــا
عرفـت
إقامـة
حـده
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تهنيـك
فـي
العصر
الشريف
سلامة
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عفـت
علـى
خطـأ
الحريـق
وعمـده
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ولعـت
بـه
نـار
الخليـل
فأطفئت
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بسـريرة
ذخـرت
لكـم
مـن
بعـده
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اللـه
صـان
عليـك
مهبـط
وحيه
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ومقـــر
رحمتـــه
وجنــة
خلــده
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شـــبهت
قصـــرك
والخلائق
حــوله
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تعنـو
علـى
حـر
الجـبين
وخده
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بـالبيت
والركـن
المحلـق
ركنه
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والوافــدين
إلـى
نـداك
بوفـده
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ولــو
أننــي
وجهـت
شـعري
نحـوكم
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لكفيتكـم
حـر
الحريـق
ببرده
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شـعر
لـو
أن
البحـر
عـب
عبابه
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وطمـت
علـى
الـدنيا
غـوارب
مده
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وأعــانه
فصـل
الشـتاء
بثلجـه
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مـا
سـد
فـي
الإطفـاء
بعـض
مسده
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أغليتمــو
بــالجود
قيمــة
شـعره
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ورفعتـم
بالجـاه
خامـل
مجده
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وســددتم
بالنقــد
خلــة
فقــره
|
وســترتم
كرمـاً
معـائب
نقـده
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