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يـا
سعد
اصبر
على
الدهر
الذي
عظمت
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فيـه
الخطـوبُ
وفيـه
الزلـة
انتشرت
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تبـدد
الأمـر
بيـن
النـاس
واختلفوا
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تبعـاً
لأهـوائهم
مـن
حيـث
مـا
وقعت
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كــل
علــى
رأســه
يجــري
مقاصـده
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بمقتضـى
الحـظ
إن
جـازت
وإن
حظـرت
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لا
يرجعـــون
لــذي
عقــلٍ
ومعفــرةٍ
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أحكــام
ديــن
الإلـه
بينهـم
طمسـت
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سـاد
الرعـاع
على
الأسياد
وارتفعوا
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حمقـاً
بـذا
رتـب
الأشـراف
قـد
وضعت
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صـالت
علـى
قطرهـم
فتـن
بهـا
خربت
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ديــارهم
وبهـا
الأثمـار
قـد
أكلـت
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مـا
ميـزوا
بعضـهم
بعضاً
وما
عرفوا
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بـل
كـل
بيضـا
يروهـا
شـحمةً
ظهـرت
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هـذا
بمـا
خـالفوا
مـن
أمر
خالقهم
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فأمــةٌ
خــالفت
فــي
دينهـا
خسـرت
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يـا
أهـل
ودي
فهـل
لـي
من
يساعدني
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علــى
الوفــاء
بحــق
خصـلةٍ
فرضـت
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نـدعو
إلـى
اللـه
فـي
سـر
وفي
علنٍ
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ونجتلـي
سـنناً
فـي
الـدين
قد
سترت
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ونوضــح
الحــق
للنــاس
ونرشــدهم
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لهـدي
خيـر
الـورى
لكن
إذا
اجتمعت
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إلـى
الـدعاة
شـروطٌ
ثـم
مـا
قصدوا
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منهــا
اتفــاق
بنيـاتٍ
لهـم
صـلحت
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يختـص
هـذا
بأهـل
العلـم
فـي
جهـةٍ
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مــع
اتبــاعٍ
لهـم
مـن
شـوكةٍ
قـوي
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إن
عينــوا
أحــداً
منهـم
ببلـدتهم
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لـدعوة
النـاس
مـع
تسـليمهم
كملـت
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إذ
كــل
أمــرٍ
لهـم
مـن
لا
يشـاركه
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فيــه
ســواه
يتــم
لا
بمــا
كـثرت
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فيــه
الأقاويـل
والأشـخاص
يوشـك
أن
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تكــون
عقــدته
بـالخلف
قـد
نقضـت
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يـا
سـعد
شـغلي
بهذا
الحال
أورثني
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أدواء
مزمنـةً
فـي
الجسـم
قـد
حصلت
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لأننــي
لــم
أجــد
شخصـاً
يسـاعدني
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علــى
عهـود
الوفـا
أقـدامه
رسـخت
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حـرت
ومـا
حيرتـي
مـن
غيـر
ما
سببٍ
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بـل
بعـد
طول
اختباري
بالورى
قدمت
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غـاض
الوفـاء
وفـاض
الغدرُ
واختلفت
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مقاصـدُ
النـاس
والألبـاب
قـد
خبثـت
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بـالحزم
سـير
بينهم
إن
لم
تباينهم
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وقـف
مـع
الحـذر
إن
أحـوالهم
خفيت
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واغنــم
بقيــة
عمــرٍ
ضــاع
أولـه
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فـي
الترهـات
جـزاء
النفـس
ماعملت
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واحــذر
مخادعـة
الأهـواء
فـي
عمـلٍ
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وسـابقِ
المـوت
فالأزمـانُ
قـد
جمحـت
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واجهــد
بصــدقٍ
وتـب
واعمـل
لآخـرةٍ
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فيهـا
تـرى
كـل
نفـسٍ
كـل
مـا
كسبت
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يــا
ربنـا
جـد
لنـا
فضـلاً
بمغفـرةٍ
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وأعمارنا
اختمها
بالحسنى
إذا
نفدت
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ثـم
الصـلاة
مـع
التسـليم
فـي
قـرنٍ
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علـى
الرسـول
مـع
الأتبـاع
ما
طلعت
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شـمس
ومـا
حـرك
الأشـجار
ريـحٌ
ومـا
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حمــائم
الأيـك
فـي
أغصـانها
صـدحت
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