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وادي
ابـن
راشـد
سلا
الأرواح
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ومنتهـــى
بغيــة
الناشــد
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النــور
فــي
حـده
الفيـاح
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والســـر
فيــه
إلــى
زائد
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لا
زال
موصـــول
بـــالأفراح
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وقـــرة
العيـــن
للقاصــد
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وطــائر
الســعد
قــد
نـاح
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ومجـــده
ليـــس
بالنافــد
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كــم
ترعــى
أعشـابه
غـزلان
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مــن
شمسـها
يـذهل
الـداني
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الــبرق
مــن
لحظهــا
خجلان
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والفــص
مــن
ميسـها
وانـي
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كـم
أهيـف
القـد
كـم
نعسان
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كــم
عـالي
القـدر
والشـان
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كــم
عيطلـي
عطـره
الفـواح
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قـد
هيـج
الماشـي
والقاعـد
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وادي
ابـن
راشـد
به
الأوتاد
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من
صفوة
ابنا
النبي
الطاهر
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قـد
زانـوا
الغـور
والأنجاد
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وفضــلهم
فــي
الملا
ظــاهر
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هـــم
الســلاطين
والاســياد
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بـل
ملجـأ
البـادِ
والحاضـر
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هـم
راحـةُ
الـروح
والاشـباح
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هــم
الأمــانُ
أتـى
الـوارد
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بهـم
زهـى
الـوادي
المحروس
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وانجــاب
ضــره
مــع
ضـيره
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وامتــاز
معنـاه
والمحسـوس
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فخــراً
ومجــداً
علـى
غيـره
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وخـــص
الواحـــد
القــدوس
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بالفضــل
والجـم
مـن
خيـره
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حــق
لــه
كيـف
لا
يـا
صـاح
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وفيــه
آل
النــبي
الحامـد
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يــا
وادي
السـادة
الاشـراف
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حييــت
بــالنور
والأســرار
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والأمــن
والخيــر
والألطـاف
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والحفـظ
عـن
وصـمة
الأشـرار
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لا
زلــت
يــا
وادي
الاحقـاف
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معمــور
بالقــادة
الأخيـار
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أهـــل
الفضــائل
والإصــلاح
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ذي
سـرهم
فـي
الـورى
عامـد
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يـا
رب
يـا
فـرد
يـا
قهـار
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صــف
عــن
الـوادي
أكـداره
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وأهلــك
أهـل
الاذى
الفجـار
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ذي
الظلـم
لـي
أضرموا
ناره
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ورامـوا
أن
يطفئوا
الأنـوار
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هتكـوا
مـن
الشـرع
أسـتاره
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الـدين
مـن
جلهـم
قـد
طـاح
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والخيــر
مـن
نـادهم
شـارد
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يـا
أهـل
ذا
الوادي
الأحباب
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دمتـم
علـى
البشـر
والنصـر
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بجــاه
خيــر
الـورى
الأواب
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المصــطفى
الهــادي
الطهـر
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عليــــه
والآل
والأصــــحاب
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والتـــابعين
علــى
الأثــر
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صــلاه
منــا
عــدد
الأريـاح
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ومــا
سـجد
فـي
الملا
سـاجد
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