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ريـح
الصـبا
مـن
نحـو
هـودٍ
أتانا
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وقــت
الســحير
فهيــج
الأشــجانا
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وســرى
يــذكرنا
اللـوى
والحانـا
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وأراك
وادي
المنحنـــى
والبانــا
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وســفوح
ليلــي
ســولنا
ومنانــا
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أحيــا
قلــوب
العاشـقين
بنشـرها
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وحــدا
جمــوع
المـؤمنين
بـذكرها
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وتعطــرت
كــل
الربــوع
بعطرهــا
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وغـدا
ينـادي
فـي
الـديار
بأسرها
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يــا
زائرون
أمــا
تـروا
شـعبانا
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وافـــاكم
فاستنهضــوا
عزمــاتكم
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وتعرضــوا
نفحــات
نيــل
هبـاتكم
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فــي
حضــرةٍ
تربـو
علـى
حضـراتكم
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مستمســــكين
بصـــالح
نيـــاتكم
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متــأدبين
علــى
الوفــا
أعوانـا
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فـي
سـفح
ربـع
المجتبا
هود
النبي
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بالمشـهد
المـألوف
كـم
شـخص
حـبي
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وعلا
فخــاراً
بعــد
نيــل
المطلـب
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ولكــم
محــي
ذنــبٌ
هنـاك
لمـذنب
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واعتـاض
بالفعـل
المشـوم
احسـانا
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قومـــوا
فشــدوا
اليعملات
بهمــةٍ
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متأســــيين
بســــادةٍ
وأئمــــةٍ
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وانحــو
ضــريحاً
بالوقـارِ
وحرمـةٍ
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هــود
النــبي
ثـوى
بـه
مـن
أمـةٍ
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حقـــق
بهـــذا
صـــحةً
وبيانـــا
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قــد
قـال
هـذا
عـن
نصـوصٍ
عديـدةٍ
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أشـــياخُ
شـــرع
ظــاهر
وحقيقــةٍ
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بإجمــاع
منهـم
مـن
دهـور
مديـدةٍ
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ســاروا
علــى
صـدق
وحسـن
عقيـدةٍ
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يكفيــك
هــذا
إن
تعــي
برهانــا
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قد
زار
ذو
القرنين
هوداً
كما
حكوا
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مــن
بعــده
جـم
غفيـرٌ
لـه
سـعوا
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شــدوا
ركــائبهم
إليـه
ومـالووا
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ولكــم
خلائق
مــن
أئمتنــا
مضـوا
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زاروا
وقضـــوا
عنـــده
أزمانــا
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مثـل
المقـدم
فـي
الـورى
استاذهم
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وبنيـــه
أشــياخ
الملا
وعمــادهم
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وكــذا
فروعهــم
علــى
تعــدادهم
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طــول
الــدهور
مـع
غمـار
بلادهـم
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وجهــاتهم
ممــن
دنــا
أو
بانــا
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فـاتبع
طريـق
القـوم
تحـظ
بالمنى
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وتنـال
خيـراً
مـن
هنـاك
ومـن
هنا
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وتفـوز
فـي
الأخـرى
وفي
هذا
الدنا
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دع
قــول
محــرومٍ
شــقي
ذي
خنــا
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عبـد
الهـوى
قـد
قـارن
الشـيطانا
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واجهــد
هــديت
بصـدق
عـزمٍ
وافـر
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واقصـد
حمـى
هـود
النـبي
الطـاهر
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ومـــتى
وصــلت
بالعشــي
وبــاكر
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تلــق
غــدير
المكرمــات
فبــادر
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فالغســل
منــه
يطهــر
الأدرانــا
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ثـم
ارق
يـا
صـاح
الحصـاة
لتركعا
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متأدبــــاً
متضــــرعاً
متخشـــعا
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وادخـل
إلى
الوادي
الفسيح
مسارعا
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للــبير
ســلم
ثـم
أدع
كمـن
دعـا
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وارج
وســل
مــن
ربــك
الرضـوانا
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للباقيـــات
الصــالحات
مثــابرا
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ســبح
وحمــد
ثــم
هلــل
مكــبرا
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واتـرك
دواعـي
المشـغلات
إلـى
ورى
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ومـتى
وصـلت
القبـة
الفيحـا
تـرى
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قــبر
رســول
اللــه
حقـا
عيانـا
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قــف
وانــتزح
ســلم
عليـه
مكملا
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تســليم
أسـلافٍ
لنـا
سـادوا
الملا
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واقـرأ
احكمـت
بعـد
الدعاء
مرتلا
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قـل
يـا
نـبي
اللـه
جيئت
مهـرولا
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أطلــب
قـرا
مـن
يكـرم
الضـيفانا
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والثـم
ثـرى
تلـك
البقـاع
ممرغـاً
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خـديك
واتـرك
مـن
عتـا
أو
من
طغى
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فهنــاك
للــزوار
نيــل
المبتغـى
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يـا
رب
واهلـك
مـن
علينـا
قد
بغى
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واغفــر
لنـا
يـا
سـامعاً
لـدعانا
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قـل
يـا
إلهـي
بجـاه
هـودٍ
عافنـا
|
وتـب
علينـا
واحمنـا
والطـف
بنـا
|
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وامنـن
علينـا
يـا
كريـم
وهب
لنا
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واختـم
لنـا
بالصـالحات
وكـن
لنا
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أنــت
الغيــاث
الملتجــا
مولانـا
|
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ثـم
الصـلاة
علـى
النـبي
ذا
الأكمل
|
ومحمـــد
المختـــار
ذاك
الأفضــل
|
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والآل
والأصـــحاب
مــع
كــل
ولــي
|
مـــا
لاح
بـــرقٌ
مــن
زمــان
أولِ
|
|
أو
حركــت
ريــح
الصــبا
أغصـانا
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