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افــراده
جميعهــا
كمــا
ثبــت
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فــي
تســعة
وأربعيــن
انحصـرت
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وهــو
إِلــى
خمسـة
أنـواع
قُسـم
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فاضبط
لها
بالحفظ
يا
من
قد
فهم
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فـــاولٌ
يجـــر
إســماً
واحــداً
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حـتى
ولـو
فـي
اللفظ
كان
زائدا
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تــدعى
حــروف
الجــر
والاضـافه
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وتلــــك
عشـــرون
بلا
انـــافه
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فالبـا
ومـن
وعـن
وفـي
كذا
إِلى
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واللام
والكـــاف
وحــتى
وعلــى
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ورب
والـواو
كـذا
التافي
القسم
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ومــذ
ومنــذ
مــع
شـرطٍ
يلـتزم
|
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ثــم
خلا
حاشــا
ومثلهــا
عــدا
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إن
كـان
مـن
مـا
لفظهـا
تجـردا
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لــولا
لعـلّ
وكـذا
كـي
قبـل
مـه
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وجــرّ
هــذي
بعضــهم
مـا
سـلمه
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أصــغِ
لمــا
اذكــر
مـن
امثـالِ
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قــد
ســقتها
بأوضــح
المقــال
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مثــاله
كيمــه
عصــيت
المـولى
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والبعــض
مــا
سـلّم
هـذا
أصـلا
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أمـــا
لعـــلّ
فمثالهــا
اتــى
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عنـد
عقيـل
فـي
الفصـيح
مثبتـا
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وانشــدوا
رثــا
ابـي
المغـوار
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ومثلــه
قــد
جـاء
فـي
الاشـعار
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مثـال
مـن
كـذا
إِلـى
يـا
سـامي
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تبــت
إلــى
اللـه
عـن
الحـرام
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أمـا
علىنحـو
علـى
اللـه
اعتمد
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واللام
نحــو
للممــات
مـن
ولـد
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وفــي
كفـي
الجنـة
طـاب
الخلـدُ
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والكــاف
نحــو
كـالغزال
يعـدو
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مثــال
حــتى
نحـو
حـتى
اليـومِ
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لـــم
اتخلــص
مــن
اذى
ولــوم
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مثــــال
رب
نحـــو
ربّ
تـــالى
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يلعنــــه
القـــرآن
للاهمـــال
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والــواو
والتــاء
همـا
للقسـَمِ
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قـد
خصصـا
مـن
دون
بـاقي
الكلم
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تقــول
واللــه
وتــالله
لقــد
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فــاز
المطيــع
بنـواله
الرشـد
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حاشــا
كمــا
تقـول
قـول
جـازم
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قـد
هلـك
الأنـام
حاشـا
العـالم
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ومــذ
ومنــذ
نحــو
منــذ
يـوم
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لـم
أرَ
زيـداً
فـي
عـداد
القـوم
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ومثلهــا
خلا
فلــم
يخــلُ
جســد
|
خلا
سـليم
القلـب
مـن
داء
الحسد
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ومثلهــا
عــدا
كمـا
مـن
مخلـصِ
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لأحـــد
عــدا
التقــي
المخلــص
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وعـــد
ســـيبويه
لــولا
منهــا
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إن
لــم
تباعــد
الضـمير
عنهـا
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وهـــاك
مـــن
ثــانيَ
الأنــواع
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أي
مـن
صـنوف
العامـل
السـماعي
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وهــو
ثمـان
أحـرف
كمـا
اشـتهر
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فتنصــب
الاســم
وترفــع
الخـبر
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وهِـــيَ
إنّ
ثـــم
ليـــت
وكــأن
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لعــــل
لكــــنّ
وإِلا
بعـــد
أن
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ولا
لنفــي
الجنــس
قبــل
نكـره
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قــد
باشــرت
ولـم
تكـن
مكـرره
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وثــالث
الأنــواع
ينصـب
الخـبر
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ويرفــع
الاســم
وذا
قـد
انحصـر
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فــي
مــا
ولا
مشــبهتين
ليســا
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لكـــن
لهــا
شــرائط
لا
تنســى
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ثــم
حــروف
تنصــب
المضــارعا
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قـد
عـدها
النحـاة
نوعـاً
رابعا
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فـي
اربـع
تحصر
في
القول
الحسن
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وهِــي
ان
ولــن
وكــي
كـذا
اذن
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وخــامس
الأنــواع
منهــا
كلُــم
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مضــارع
الافعــال
وضــعا
تجـزم
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وهــي
علـى
الصـحيح
خمسـة
عشـر
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لمــا
ولــم
ولا
ولام
مــن
امــر
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وهــــذه
تجـــزم
فعلا
واحـــدا
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أمــا
الـذي
يجـزم
فعليـن
غـدا
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فــان
ومــا
ومــن
وايـن
مهمـا
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مـــتى
وأنّـــى
ثــم
أيّ
اذمــا
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وحيثمـــا
ومثلهـــا
إذا
مـــا
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وبعضـــهم
خـــالف
ذا
الكلامــا
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هــذا
تمــام
العامـل
السـماعي
|
وبعضــه
لــم
يخــل
مــن
نـزاع
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