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رأيتهــا
تمشــي
وفــي
كفّهـا
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عكّـــازة
كظهرهـــا
الأحـــدب
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تشـكو
إلـى
المجهـول
حرمانها
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وضـــيقها
بالعــالم
الأرحــب
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ومثــل
شــهقات
ســراب
يمـوت
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كـانت
خطاهـا
فوق
وجه
الطريق
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مـن
حولهـا
ألـف
خيـال
يفـوت
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وليــس
فيهـم
عـارف
أو
صـديق
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ظننتهــا
تبحــث
عــن
نفسـها
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مثــل
فـألقيت
إليهـا
السـلام
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وكــان
خــوفى
سـوء
إغضـاءها
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أشـدّ
مـن
خـوفى
ظنـون
الأنـام
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لكنهــا
حيّــت
وقــد
أســبلت
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أجفانهـا
واستضـحكت
فـي
حنان
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قلــت
إلـى
أيـن
فقـالت
إلـى
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لا
حيـث
حيـث
البحر
والشاطئان
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قلـت
لها
ما
البحر
قالت
تراب
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أنبــت
فيـه
المـاء
سـرّ
الأزل
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أمــواجه
أنـت
وهـذي
الكعـاب
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واليــأس
مــن
شـطآنه
والأمـل
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قلـت
لهـا
مـن
أنت
قالت
كيان
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كــل
كيــان
فيـه
منّـى
حيـاه
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أنـا
هـو
النـاقوس
والمعمَدان
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والمعبـد
القدسـي
وروح
الصلاه
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أمشــى
ومصـباحي
علـى
راحـتي
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تطفىـء
منـه
الريـح
أو
تشتعل
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للأرض
عنـــدي
عـــالم
فاضــل
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وللســـماء
العــالم
الأفضــل
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في
الكوخ
تلقاني
وبين
القصور
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أبيــع
أنــواري
لمـن
يشـتري
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وربمــا
مــرّت
علــيّ
الـدهور
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لـم
يكسـبوا
منـى
ولـم
أخسـر
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المـوت
مـن
ذاتـي
كما
للحياه
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فجـــوهري
مشـــرق
معناهمــا
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أنــا
ومـا
يظهـر
مجـد
الإلـه
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لا
شـيء
فـي
النـاموس
إلّا
همـا
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غريبـةً
أحيـا
وكـم
مـن
غريـب
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آنسـت
دنيـاه
بروحـي
الحنـون
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وعـدتٌ
إذ
لـم
ألق
لي
من
حبيب
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أسـأل
نفسـي
مـن
ترانـي
أكون
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وأطرقــت
تســكب
مــن
عينهـا
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شــجون
فكــر
ومعــاني
خلـود
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ثــم
مضــت
كأنهــا
لـم
تكـن
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تملأ
مــن
حيــنٍ
علـيّ
الوجـود
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ومثــل
شــهقات
ســراب
يمـوت
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راحـت
خطاها
وهي
تطوى
الطريق
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مـن
حولهـا
ألـف
خيـال
يفـوت
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وليــس
فيهـم
عـارف
أو
صـديق
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