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شــنف
بــذكر
مفــاخر
العربــان
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ســمعي
وانعــش
خــاطري
وجنـاني
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فحــديث
آبـاء
الفـتى
ينشـي
بـه
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عزمـاً
كنفـخ
الـروح
فـي
الجثمان
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ولـــرب
آثــار
لهــم
تــذكارهم
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يهــب
الضــمائر
قــوة
الايمــان
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هم
منبع
الدين
القويم
ومطلع
الن
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ور
العظيـــم
ومنجــع
اللهفــان
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تتفــاخر
الأجيــال
فـي
أخبـارهم
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والشـــمس
لا
تحتـــاج
للبرهــان
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والكـون
يزهـر
فـي
مكـارمهم
وما
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أدراك
فعـــل
الوابــل
الهتــان
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أهـل
الشـجاعة
والبراعـة
والوفا
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والصـــدق
والإيثـــار
والاحســان
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جعلـوا
الممالـك
تحـت
ظل
سيوفهم
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متظلليـــــن
ذوائب
المـــــران
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واسـتقبلوا
الزمـن
العبوس
بأوجه
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غـــر
اضـــاءت
غـــرة
الأحيــان
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وتوطنــوا
رحــب
الفلا
فتعلمــوا
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ســعة
الصــدور
ورقــة
الغـدران
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خلقــوا
ألـي
بـأس
ومـن
أخلاقهـم
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رعــي
الــذمام
ونصـرة
الجيـران
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تـأبى
قبـول
الضـيم
أنفسـهم
ولو
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طـــاحت
رؤوســهم
عــن
الأبــدان
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والجـود
شنشـنة
مـتى
ذكـروا
بها
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خضـــع
الوجــود
واذعــن
الثقلان
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بسـطوا
الأكـف
بـه
فنـالوا
سؤدداً
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عقــدت
عليــه
خناصــر
الأعيــان
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وكفــاهم
شــرفاً
عظيمــاً
أنهــم
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عـــرب
ومنهـــم
ســيد
الأكــوان
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قـوم
تـرى
نـور
البصـيرة
طافحـاً
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مـا
بينهـم
فـي
الشـيب
والشـبان
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ملكـوا
الفراسـة
والخفايا
عندها
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كالصــبح
جلــت
قــدرة
المنــان
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سـل
عنهـم
الشـعر
البليـغ
كـأنه
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وحــي
تنــزل
مــن
عظيـم
الشـان
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وسـل
الفصـاحة
هـل
يضـئ
بغيرهـم
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إنســانها
فـي
العـالم
الإنسـاني
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تخـذوا
المفـاخر
حليـة
بضـيائها
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ســطع
الوجــود
واشـرق
الملـوان
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وتنافسـوا
بمحاسـن
اللغـة
الـتي
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ألفاظهــا
كالهيكــل
النــوراني
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لغــة
بفضــل
جلالهــا
وجمالهــا
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شــهدت
شــواهد
محكــم
الفرقـان
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لغــة
إذا
أدركــت
سـحر
بيانهـا
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أدركـت
معنـى
السـحر
فـي
الأجفان
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لغـة
هـي
البحـر
الخضـم
وكيف
لا
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وبهــا
مغــاص
الــدر
والمرجـان
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ضـاق
المجـال
علـى
مبـارى
فضلها
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فكأنمــا
هــو
فــوق
رأس
ســنان
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وغـدا
المفكـر
فـي
دقـائق
سـرها
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متضـــائلاً
كالتـــائه
الحيــران
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قـل
للألـى
جهلـوا
مكانتهـا
وقـد
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كــادوا
لهــا
فـي
السـر
والاعلان
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عــاديتم
مـا
تجهلـون
ولـم
يعـب
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قـــدر
الــورود
كراهــة
الجعلان
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واللَــه
يـأبى
ان
تهـان
فبشـروا
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مـــن
رام
ذلتهــا
بكــل
هــوان
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ام
البلاغـــة
لا
عـــدمنا
درهــا
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روح
العقـــول
وراحــة
الاذهــان
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للّـــه
مــا
أحلاك
يــا
عربيــتي
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فــي
ذوق
أهـل
الـذوق
والعرفـان
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كـل
اللغـات
لـديك
يالغـة
الهدى
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خـــدم
وأنــت
مليكــة
الايــوان
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ظلمـوك
أهلـك
بالجفـاء
فأصـبحوا
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والكــل
يمشــي
مشــية
السـرطان
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لــم
يحفظـوا
لـك
ذمـة
وتعلقـوا
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بهــوى
السـوى
ورمـوك
بـالهجران
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لـو
أتقنـوا
فيـك
العلوم
لأدركوا
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شـأو
العلـى
وعلـوا
علـى
الأقران
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لكنهـــم
غــروا
بغيــرك
حقبــة
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مــن
دهرهــم
والـدهر
ذو
الـوان
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حـتى
إذا
انكشـف
الغطـاء
وايقظت
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مقــل
الرجــال
حــوادث
الأزمـان
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نهضـــوا
وكــل
يســتعيذ
بربــه
|
ممــا
انتشـى
ويسـب
بنـت
الحـان
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