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لا
وعينيــكِ
والجــبينِ
وجيــدِك
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مـا
سـلوتُ
الهـوى
وطيـب
عهودِكِ
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كيــف
أســلو
وجلنــار
فـؤادي
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يتلظــى
مــن
جلنــار
خــدودك
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ســلبت
مقلتــاك
أســود
قلـبي
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فهـو
خـالٌ
للحسـن
بيـن
نهـودك
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كـل
شـيءٍ
لـديّ
فـي
الحـب
سـهلٌ
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مـن
أليـم
العـذاب
غيـر
صدودك
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قـد
هتكـت
الغصـون
عطفاً
وليناً
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بقــوام
يهــتز
تحــت
بنــودك
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شــرح
لام
العـذار
رد
علـى
مـن
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لام
صـــباً
مسلســـلاً
بقيـــودك
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رســل
عينيــك
صـيرتنا
عبيـداً
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فـاتقِ
اللَـه
فـي
عـذاب
عبيـدك
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كم
هدانا
الصباح
من
فرقك
الوض
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اح
لمــا
أن
جــنّ
ليـل
جعـودك
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ان
عـرف
الخـزام
في
ثغرك
العذ
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ب
الأقـاحي
والمسـك
طـي
بـرودك
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نصـــبت
فتنـــةً
لكــل
ســليمٍ
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صـورة
الحسـن
فـي
لجيـن
زنودك
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فحيــاتي
شــهود
ســامي
محيـا
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ك
ومـوتي
إن
لـم
أكن
من
شهودك
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بالــذي
صــاغ
وجنتيــك
وروداً
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داوِ
قلــبي
بشــم
طيــب
ورودك
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واسـقني
الصـرف
مـن
سـلافةِ
ثغرٍ
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باســم
عــن
مثــال
در
عقـودك
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اتلــف
الـبين
مهجـتي
وحشـائي
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فاشــفها
منعمــاً
بفضـل
ورودك
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جـد
بوعـدٍ
ان
لـم
تجـد
بوصـالٍ
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فلعلــي
أرى
الشــفا
بوعــودك
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قـد
كسـاني
الصـدود
ثـوب
سقامٍ
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ومنعنــي
المنـام
خـوف
وعيـدك
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ردّ
نــومي
عســى
يلــمُّ
خيــالٌ
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منـك
بـي
لا
عـدمت
طيـب
رقـودك
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يـا
رعى
اللَه
طيب
عهد
التداني
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وزمانــاً
صــفا
بــانس
وجـودك
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