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ســلام
وهـل
يشـفي
الغليـل
سـلام
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وقــد
نزحــت
دار
وعــزم
مـرام
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تحيـة
مشـغوفٍ
يحـن
إلـى
اللقـا
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حنيــن
وليــد
نـال
منـه
فطـام
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حليـف
سـهاد
طلـق
النـوم
بعدكم
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ثلاثـاً
فـراح
اليـوم
وهـو
حـرام
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قضـى
لـي
هـواكم
أن
أبيت
مسهداً
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وأنتــم
نيــام
والخلــي
ينـام
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ومـا
ضـر
إبراهيـم
نـار
غرامـه
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إذا
صـــح
بــرد
منكــم
وســلام
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لعمــري
لقــد
أججتـم
بفراقكـم
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لواعــج
لا
يخبــو
لهــن
ضــارم
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وحملتـم
جسـمي
علـى
ضـعفه
جـوىً
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يئط
ثــــبير
تحتـــه
وشـــمام
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أمـا
وهـواكم
وهـي
حلفـة
صـادقٍ
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يــــرى
أن
مكـــذوب
الكلام
كلام
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لقـد
لعبـت
أيدي
الهوى
بحشاشتي
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كمــا
لعبــت
بالشـاربين
مـدام
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أشـيم
بـروق
الشـام
شوقاً
إليكم
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وهيهــات
مـن
دار
السـلام
شـئام
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وأرمـي
بطرفـي
نحـوكم
كـي
أركم
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فتــأبى
مــرام
بيننــا
وأكـام
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ليسـيقكم
يـا
جيـرة
الشام
وابل
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ركـام
وهـل
يسـقي
الغمـام
غمام
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ولا
غـرو
أن
سـقت
الحيـا
لمعالم
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لأفلاذ
قلـــبي
بينهـــن
مقـــام
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مسـرة
نفسـي
والجـديرون
بالهوى
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وإن
نبهــوني
للغــرام
ونـاموا
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تركتهــم
فوضـى
وحسـبي
وحسـبهم
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مــن
اللَـه
مـولىً
كافـل
وعصـام
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نعـم
حبـاذ
تلـك
المغاني
وحبذا
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نزولــي
بهـا
والمزعجـات
نيـام
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قضــى
حســنها
أن
لا
نلام
بحبهـا
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ومــن
هـام
بـالفردوس
كيـف
يلام
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معاهـد
يأتيهـا
الخلي
من
الهوى
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فيصــدر
عنهــا
والغـرام
غـرام
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وثــم
ريــاض
مونقــات
يزينهـا
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مــن
النــور
فـذ
مشـرق
وتـوام
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حــدائق
بالأكمـام
يرقـص
دوحهـا
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إذا
مـا
تغنـى
فـي
الغصون
حمام
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وإنـي
لحـران
إلـى
مائهـا
الذي
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لـه
بيـن
هاتيـك
الريـاض
رحـام
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لـي
اللَـه
كـم
خيمت
فيهن
نازلاً
|
ومـالي
سـوى
الظـل
الظليل
خيام
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وحــولي
إخـوان
كـرام
تعاقـدوا
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علــى
المجــد
شـيخ
منهـم
وغلام
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مساميح
أما
ما
أصابوا
من
الغنى
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فطـــل
وأمــا
جــودهم
فركــام
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ميـامين
تنجـاب
الهمـوم
بقربهم
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كمـا
انجـاب
من
نور
الصباح
ظلام
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يضــيع
ذمــام
الـود
إلا
لـديهم
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وعنــد
كريــم
لا
يضــيع
ذمــام
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لسـرعان
مـا
مـرت
أويقات
قربهم
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وهــل
لسـرور
فـي
الزمـان
دوام
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وكـم
لـي
فيهـم
مـن
خليـل
مهذب
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براحتــه
جــو
الســماح
يغــام
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ولا
سـيما
موسـى
الحكيم
الذي
له
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لــدي
أيــاد
لــو
تعــد
جسـام
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فـتىً
ماجـد
حـاز
الفضـائل
كلها
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تمامـاً
وهـل
بعـد
التمـام
تمام
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همـام
بـه
تجلـى
الهمـوم
وإنما
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يـذود
الهمـوم
الطارقـات
همـام
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جـرى
للعلـي
مجـرى
أبيـه
وجـده
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إليهــا
وأبنـاء
الكـرام
كـرام
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تقـي
نقـي
لـم
يـزل
منـه
للهدى
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وللطـــالبيه
جـــامع
وإمـــام
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فيـا
نئايً
مـن
مقلتي
وفي
الحشا
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لـــه
منـــزل
يحتلــه
ومقــام
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أبثــك
أشــواقاً
غليــك
تعرقـت
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عظــامي
وشــجات
العظـام
عظـام
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ودونكهـا
عـذراء
صاح
بها
الهوى
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فطــارت
إليكــم
والسـلام
ختـام
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