|
جمالـــة
لا
يحاكيهــا
جمــالات
|
أم
لفتـة
دونهـا
يـزري
غـزالات
|
|
نفسـي
الفـداء
لبدر
ليس
يستره
|
ذيـل
الغمـام
ولـم
تحجبه
هالات
|
|
أنواره
أشرقت
في
الكون
بهجتها
|
ولـم
تكـن
نقصـت
فيـه
الكمالات
|
|
بـاهي
العلـى
بأب
غال
غلا
حسبا
|
لــه
المفــاخر
عمــات
وخـالات
|
|
سـمت
فـروع
معـاليه
وقـد
أصلت
|
أصـــالة
لا
تضــاهيها
أصــالات
|
|
عـرج
عليـه
تجد
ما
شئت
من
كرم
|
علـــى
شـــمائله
منـــه
دلالات
|
|
أنعـم
وأكـرم
بـه
ميرا
إمارته
|
إليـه
منـه
بهـا
تبغي
الوسيلا
|
|
دارت
مدارات
إسعاد
الزمان
على
|
مــا
يشــتهيه
وللإســعاد
دولات
|
|
تبـارك
اللَـه
مـا
أحلى
شمائله
|
فــي
كـل
حـال
وللإنسـان
حـالات
|
|
بيــك
أميـر
لـواء
عـز
جـانبه
|
لكنـــه
ســـهلت
منــه
الجبلات
|
|
أراؤه
كفلـت
أحكـام
مـا
حكمـت
|
بـه
العلى
حيث
لا
تغني
الكمالات
|
|
سـارت
بمدحته
الركبان
وانتظمت
|
فـي
عقـد
در
معـانيه
المقـالات
|
|
لــه
يـدان
كتـاب
الأنـام
لهـا
|
إلا
أناملهـــا
آلـــت
أيــالات
|
|
يملي
النسيم
ثناء
عنه
طاب
شذا
|
علــى
الريـاض
فترتـاح
الأثيلات
|
|
والبـان
يركـع
إجلالاً
لـه
فـترى
|
مـا
فيـه
مـن
ألفـات
وهي
دالات
|
|
سـل
عـن
محاسنه
إن
كنت
تجهلها
|
لـو
أمكنت
في
الضروري
الجهالات
|
|
بحــر
لــوا
رده
بــر
لقاصـده
|
ولــم
تكــن
لــترى
منـه
ملالات
|
|
يسـمو
بهمتـه
نـوق
السماك
على
|
وبالـذي
حـل
قـد
تسـمو
المحلات
|
|
كـانت
نهايـات
وصفي
فيه
قاصرة
|
إذ
مــدحه
لا
تــوفيه
الإطــالات
|