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إنــي
لكعبــة
مـن
أحـب
لطـائف
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فعســاه
أن
تحــبى
إلـي
لطـائف
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يـا
حـادي
الأظعـان
يجتاب
الفلا
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سـر
بـي
فسـربي
صـوب
قصدك
عاكف
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وسـق
المطايـا
فـي
نشـر
الخطـا
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نطـوى
الفيـافي
والبعيـد
يشارف
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وإذا
أتيـت
الحـي
فادخل
في
حمى
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يرعــى
بــه
جـار
ويـأمن
خـائف
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وأنــزل
بــواد
لاح
فيــه
أهلـة
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أنوارهـا
لسـنا
الشـموس
كواسـف
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واد
هـــو
الفـــردوس
إلا
أنــه
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عـن
وصـفه
بالحسـن
يعيي
الواصف
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فـالحور
غيـد
والريـاض
خـدودها
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والخمــر
ظلـم
والكـؤوس
مراشـف
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وأنشـد
معـي
قلباً
أضر
به
النوى
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قـد
ضـاع
مـذ
قـذفته
ثـم
قواذف
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واجنـح
لـترك
اللوم
حيث
جوانحي
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فيهـا
جـوى
عـن
صـرف
لومك
صارف
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وتـوق
طعـن
السـمر
مـن
سمر
قست
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منهــا
قلــوب
إذ
تليـن
معـاطف
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وحـذار
ألحـاظ
العيـون
فغمزهـا
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بالنبـل
عـن
قـوس
الحواجب
قاذف
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وإذا
ثنايـا
الثغـر
لاح
وميضـها
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فاحــذر
بــوارقه
فتلـك
خواطـف
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واخـش
الظبـاء
فإن
قسورة
الحمى
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لكناســـها
بعرينـــه
متجــانف
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يـا
ويـح
قلـب
ذاب
من
حر
الظما
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والنهــر
جـار
والغضـنفر
واقـف
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للَـــه
غــزلان
لمــا
غازلتهــا
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إلا
وقـــد
شــردت
ودمعــي
ذارف
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تبـدي
بوحشـتها
النفار
ولم
تكد
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يومـاً
ترينـي
الأنـس
وهـي
تؤالف
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جارت
ببيض
ظبا
الجفون
السود
في
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حكـم
الغـرام
وليـس
ثـم
مسـاعف
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يـا
مهجـتي
صـبراً
عسى
أن
يرعوي
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مـن
كـان
لـم
يتلاف
مـا
هو
تالف
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ولئن
قضــى
جهلاً
علــى
فمخلصــي
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مــولى
لــديه
عــوارف
ومعـارف
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هـو
شـيخ
كـل
مشـايخ
الإسـلام
من
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هـم
فـي
الشـريعة
للرسـول
خلائف
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هــو
بحـر
أفضـال
مـوارد
فضـله
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عـذبت
منهالهـا
لمـن
هـو
راشـف
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أكــرم
بــه
متفـرداً
فيـه
لقـد
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جمـع
التليـد
من
العلى
والطارف
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بــرا
إذا
صــدرت
طــوائف
بـره
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عــن
بحــره
وردت
عليـه
طـوائف
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يبــدي
العجيــب
بفطنـة
سـيالة
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فـي
فهـم
مـا
هـو
للعقول
مواقف
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وإذا
المجيـد
أراد
سـؤدد
عبـده
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عطفتــه
منــه
للســداد
عواطـف
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شــكر
التوفيــق
المليـك
وضـعه
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مــا
ليـس
فيـه
للوفـاق
مخـالف
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نشر
الزمان
العدل
بعد
أن
انطوى
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جــبراً
لســالفه
بمـا
هـو
آنـف
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بشـرى
لنـا
بسـعود
طـالع
حظـوة
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والحــظ
وافـى
والحبـور
محـالف
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زينـت
بـه
الـدنيا
ولاحـت
تزدهي
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بالحســن
منهــا
غــرة
وسـوالف
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وبــدا
لهــا
شـمم
بسـطوة
عـزه
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فـي
الـدهر
ترغـم
للعدو
ومراعف
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آيـات
مجـد
لا
تـزال
علـى
الورى
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تتلــى
وآنــاء
الزمـان
صـحائف
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يــا
روض
إحســان
يـرى
ثمراتـه
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وضـعت
علـى
طـرف
الثمام
القاطف
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رعيــاً
لعهــد
مـر
حلـو
زمـانه
|
غــض
المجـاني
والحظـوظ
تصـادف
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قسـماً
لئن
قـرب
المزار
وكان
لي
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فـي
خدمـة
الحـرم
الشريف
وظائف
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لا
مـر
غنالخـد
فـي
الـترب
الذي
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مــن
تـبره
أبـدا
تحـاز
زخـارف
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وليهنــك
الحــظ
إلا
تـم
بمنصـب
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هتفـت
بـه
فـي
الخـافقين
هواتف
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قصـد
الزمـان
بـه
إعـادة
بـدئه
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للمكرمــات
وبــر
وهـو
الحـالف
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وأتـى
البشـير
يقـول
في
تاريخه
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أنـت
الجـدير
بقصـده
يـا
عـارف
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وإذا
عطــاء
اللَــه
زاد
تكرمـاً
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بالفضـل
وهـو
لمـن
يشـاء
يضاعف
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وقضـى
بصـحة
مـا
إلـى
مـولاي
قد
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أهــديته
والحــب
قلــبي
شـاغف
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أرجــو
قبـول
وصـيفة
قـد
قلـدت
|
بحلاك
عقــدا
لــم
تنلـه
وصـائف
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وزهـت
بنـور
صـفاتك
الحسنى
على
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بـدر
الكمـال
فعـاد
وهو
الخاسف
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غايـات
مـا
تبغيـه
فـض
ختامهـا
|
مـن
حيـث
تنهيهـا
إليـك
صـحائف
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