|
ســمهري
ينثنـي
أم
غصـن
بـان
|
أم
قــوام
دونــه
صـبري
بـان
|
|
صـان
بالعسـال
معسـول
اللمـا
|
وتهـادى
هادمـاً
مـا
أنـا
بان
|
|
يـا
مليـك
الحسـن
رفقـاً
بشـج
|
كلمـا
حـاول
كتـم
الشـجو
بان
|
|
جـاء
لمـا
جـار
سـلطان
الهوى
|
طالبـا
مـن
عـادل
القد
الأمان
|
|
رب
ســاق
وهــو
قــاس
قلبــه
|
عطفــه
منــذ
أدار
الكـاس
لان
|
|
أهيــف
أن
مــاس
تيهـاً
ورنـا
|
رحــت
منـه
بيـن
سـيف
وسـنان
|
|
كسـر
القلـب
ومـا
كـان
التقى
|
فيـه
مـن
حيـن
هـواه
سـاكنان
|
|
يـا
لـه
ثـاني
عطـف
قـد
غـدا
|
واحداً
في
الحسن
فرداً
دون
ثان
|
|
مــن
رآه
وهـو
يسـعى
بـالطلا
|
قـال
مـا
أسـعد
ذيـاك
القران
|
|
هــو
بــدر
أشــرقت
أنــواره
|
وضـياء
البـدر
يبـدو
حيث
كان
|
|
وهــي
شــمس
بسـناها
احتجبـت
|
لكليـم
الطـرف
قـالت
لن
تران
|
|
فاسـتقنيها
أيهـا
الساقي
على
|
عــارض
الآس
وثغــر
الأقحــوان
|
|
فــي
ريــاض
رقصــت
أغصـانها
|
حيـث
غنتهـا
مـن
الطيـر
قيان
|
|
حــدق
النرجــس
فيهــا
عينـه
|
إذ
رأى
المنثور
يومي
بالبنان
|
|
إن
بكـى
الطـل
علـى
أفنانهـا
|
بســم
الزهــر
وعـن
در
أبـان
|
|
بينمـا
الـراووق
يهمـي
دمعـه
|
فـي
رباهـا
قهقهت
منه
القنان
|
|
لمــدير
الكـاس
فـي
أدواحهـا
|
لـم
تلـح
شمس
سوى
شمس
الدنان
|
|
يـا
نـديمي
قـم
وباكرهـا
وطب
|
هـذه
الجنـة
والحـور
الحسـان
|
|
وأدر
لــي
بنــت
كــرم
عتقـت
|
نورهـا
الباهر
يحكي
البهرمان
|
|
زوجــت
بالمــاء
بكـراً
فـأتت
|
إذ
علاهــا
بـذراري
مـن
جمـان
|
|
بــالنهى
قـد
فعلـت
كاسـاتها
|
فعـل
إبراهيـم
سـلطان
الزمان
|
|
أسـد
الهيجـاء
ضـرغام
الـوغى
|
قاصـم
الأعـداء
مـن
قـاص
ودان
|
|
فهــو
كالشــمس
سـمت
آفاقهـا
|
وســناها
كـان
فـي
كـل
مكـان
|
|
فـرع
أصـل
قد
تسامى
في
العلى
|
وعلا
شــأناً
علــى
رغـم
لشـان
|
|
ســره
إن
كــان
ســر
عســكره
|
ورمـى
القـرن
فنـادى
يا
رمان
|
|
ســطوات
بأسـها
حـامي
الحمـى
|
وأكــف
كـم
بهـا
كـف
افتتـان
|
|
كـم
لـه
فـي
السـلم
من
مرحمة
|
وكـــأين
مــن
حنــو
وحنــان
|
|
يمــم
اليــم
ورد
مـا
تشـتهي
|
وعلـى
المـورد
يا
صاح
الضمان
|
|
لـم
يكـن
فـي
كـل
بحـر
لؤلـؤ
|
إنمـا
اللؤلـؤ
فـي
بحـر
عمان
|
|
حلمــه
الــروض
جنـاه
يجتنـي
|
ويرجـى
العفـو
فيـه
كـل
جـان
|
|
همــم
فــوق
الســموات
ســمت
|
ومعــال
دونهــن
الصـعب
هـان
|
|
وحلـــى
جلــت
وجلــت
غايــة
|
إيجـاري
مـن
لـه
سـبق
الرهان
|
|
يــا
عزيــزاً
لا
يضـاهي
أبـدا
|
عـزه
يكسـو
العدا
ثوب
الهوان
|
|
كــم
حـروب
كشـفت
عـن
سـاقها
|
خاضـها
طرفـك
مطـواع
العنـان
|
|
بجيـــوش
شــمرت
عــن
ســاعد
|
مـا
لـه
يـوم
نـزال
مـن
توان
|
|
هــاك
منـي
بنـت
فكـر
تنجلـي
|
فــي
حلــى
مـن
بـديع
وبيـان
|
|
قــد
أعيــذت
بشــهاب
ثــاقب
|
صـانها
عـن
كـل
شـيطان
وجـان
|
|
وبــدت
مــن
خــدرها
قائلــة
|
إن
وصـــلي
للحـــبيب
الآن
آن
|
|
وبـــودي
لــو
ألاقــي
حظــوة
|
منـه
تكسـوني
جلابيـب
امتنـان
|
|
فــدنوي
منــه
غايـات
المنـى
|
وقبــولي
منتهــى
كـل
الأمـان
|